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ईरान-अमेरिका और इज़राइल संकट में चीन की ज़िम्मेदार भूमिका

 Iran-US-Israel Crisis

 Iran-US-Israel Crisis

इंटरनेशनल डेस्क: 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इज़राइल द्वारा स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र ईरान पर एक बड़े और समन्वित सैन्य हमले के बाद से 6 हफ़्तों से ज़्यादा का समय बीत चुका है। इसमें कोई द्विमत नहीं है कि ईरान के साथ अमेरिका-इज़राइल संघर्ष ने वैश्विक एकता को काफ़ी हद तक तोड़ दिया है, जिससे ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में शिपिंग मार्गों पर नौवहन को खतरा पैदा हो गया है, और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे अंतरराष्ट्रीय राजनयिक निकायों में गहरे मतभेद पैदा हो गए हैं।

इस हमले में पहले ही दिन ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई समेत कई शीर्ष अधिकारी मारे गए, तभी से ईरान की जवाबी कार्रवाई जारी है।

अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर गैर-कानूनी हमले को शुरू से ही ईरान की मिसाइल क्षमता, परमाणु कार्यक्रम और यहाँ तक कि “शासन परिवर्तन” जैसे कथित खतरों को खत्म करने के रूप में पेश किया था । इस युद्ध ने इसके औचित्य और परिणामों पर तीखी बहस छेड़ दी है।

ईरान के जवाबी हमलों से दुनिया भर में लागत बढ़ रही है।

हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियां भले ही तेज हों, लेकिन अमेरिकी जनता समझदार है और ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन का विरोध कर रही है। और यह विरोध बढ़ता ही जा रहा है, जो एक अच्छी खबर है। 1 अप्रैल को हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार, अमेरिकी सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और शांति के मार्ग को अपनाना चाहिए।

ईरान के हमलों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिससे होर्मुज की खाड़ी, एक महत्वपूर्ण तेल शिपिंग लेन, प्रभावी रूप से बंद हो गई है। इससे तेल की कीमतें बढ़कर 111.54 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर चिंता बढ़ गई है।

चल रहे युद्ध के कारण के कारण भारत सहित कई देशों को तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) की कमी का सामना करना पड़ रहा है, और पेट्रोल और डीजल की संभावित कमी को लेकर सामाजिक तनाव बढ़ गया है। भारत की LPG आयात निर्भरता लगभग 88% है, और इसका अधिकांश हिस्सा मध्य पूर्व से आता है।

युद्ध शुरू होने के बाद से चीन शांति के लिए अथक प्रयास कर रहा है। तत्काल युद्धविराम का आह्वान करके चीन ने शुरू से ही एक जिम्मेदार देश की भूमिका निभाई है।

चीनी विदेश मंत्री वांग यी का कहना है कि चीन सैन्य कार्रवाई की तुरंत समाप्ति और यथाशीघ्र बातचीत पर लौटने की इच्छा रखता है। उन्होंने रूस, ओमान, ईरान, फ्रांस, इज़राइल, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों से और यूरोपीय संघ के कूटनीति और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास (Kaja Kallas)से बात की।

तत्काल युद्धविराम का आह्वान करना चीन की सही मायने में एक शांति प्रेमी राष्ट्र होने का प्रमाण है। चीन ने सही कहा है कि सैन्य कार्रवाई कोई समाधान नहीं है, बल्कि बातचीत और समझौता ही आगे का रास्ता है।

चीन का मानना है कि मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता के लिए राजनीतिक समाधान ही एकमात्र रास्ता है। चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू त्सोंग (Fu Cong) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मध्य पूर्व के लोगों की स्वतंत्र पसंद का सम्मान करने और अरब देशों को एकजुटता बढ़ाने में समर्थन देने का आह्वान किया। चीन, अरब देशों के साथ मिलकर शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिए तैयार है।

ईरान-अमेरिका और इज़राइल युद्ध के संदर्भ में चीन के मध्यस्थता प्रयास न केवल सराहनीय हैं, बल्कि संघर्षों को सुलझाने और शांति को बढ़ावा देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भी हैं। चीन खाड़ी क्षेत्र और मध्य पूर्व में क्षेत्र के भविष्य को आकार देने में एक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है, यह कदम एक वैश्विक नेता के रूप में उसकी बढ़ती भूमिका को भी प्रदर्शित करता है। चीन का व्यावहारिक सहयोग और प्रभावी सहायता पर जोर उसे एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में प्रतिष्ठित करता है। ईरान की स्थिति के आगे बढ़ने के साथ, शांति को बढ़ावा देने में चीन की रचनात्मक भूमिका महत्वपूर्ण है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— रविशंकर बसु)

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