विश्व खाद्य दिवस, जो प्रतिवर्ष 16 अक्टूबर को मनाया जाता है, 1945 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की स्थापना के उपलक्ष्य में मनाया जाता है और इसका उद्देश्य वैश्विक भूख और खाद्य सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस अवसर पर विश्व के अनेक देशों में सरकारें, अंतरराष्ट्रीय संगठन, और सामाजिक संस्थाएं खाद्य उत्पादन, वितरण और पोषण से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन करती हैं। यह खाद्य एवं कृषि उत्पादन के विकास, सतत कृषि को बढ़ावा देता है और यह सुनिश्चित करता है कि सभी को पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो। यह दिवस भूख और कुपोषण के विरुद्ध कार्रवाई का एक वैश्विक आह्वान है, जो सरकारों, संगठनों और व्यक्तियों को भूख मुक्त विश्व की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
विश्व खाद्य दिवस दुनिया भर में खाद्य एवं कृषि उत्पादन के विकास पर चर्चा और जागरूकता का महत्वपूर्ण दिन है। इस दिवस की शुरुआत 16 अक्टूबर, 1981 को हुई थी, और तब से हर साल दुनिया की सरकारें इस दिन विभिन्न स्मारक कार्यक्रम आयोजित करके खाद्य सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती हैं। इसका प्रमुख उद्देश्य वैश्विक स्तर पर खाद्य और कृषि उत्पादन के विकास के प्रति गहन ध्यान आकर्षित करना है। यह दिन लोगों को यह याद दिलाता है कि भूख, कुपोषण और खाद्य असमानता जैसे मुद्दे केवल विकासशील देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक वैश्विक चुनौती है।
चीन की खाद्य सुरक्षा में नई उपलब्धियाँ
चीन ने हाल के वर्षों में खाद्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। “14वीं पंचवर्षीय योजना” (2021-2025) की अवधि में चीन ने अनाज उत्पादन क्षमता को निरंतर बढ़ाया है। आधुनिक कृषि तकनीक, स्मार्ट खेती और ग्रामीण पुनरोद्धार नीतियों के ज़रिए चीन ने न केवल अपनी खाद्य आत्मनिर्भरता को सशक्त किया है, बल्कि वैश्विक खाद्य स्थिरता में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। चीनी कृषि एवं ग्रामीण मामलों के मंत्रालय के अनुसार, उन्नत तकनीक, किसानों के लिए बेहतर सहायता योजनाओं और कुशल जल प्रबंधन ने इस उल्लेखनीय सफलता में अहम भूमिका निभाई है। सरकार द्वारा कृषि अनुसंधान और बुनियादी ढाँचे में निवेश को प्राथमिकता दिए जाने के कारण लगातार अच्छी फसल उत्पादन हो रहा है।
2025 तक चीन की समग्र खाद्य उत्पादन क्षमता और भी अधिक मज़बूत हो जाएगी, जिससे देश के लोगों के लिए अधिक सुरक्षित और स्थिर खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इस दिशा में नवाचार आधारित कृषि, जल संसाधन प्रबंधन और हरित तकनीकों का उपयोग प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन द्वारा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की यह प्रतिबद्धता न केवल घरेलू स्तर पर जनता के हित में है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा और कीमतों में स्थिरता लाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश के लिए खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
विश्व खाद्य दिवस के मौके पर, चीन ने खाद्य बर्बादी को कम करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने का भी संकल्प दोहराया है। यह दिवस सभी राष्ट्रों के लिए यह याद दिलाता है कि “भूखमरी शून्य दुनिया” का लक्ष्य हासिल करने के लिए समन्वित प्रयासों की नितांत आवश्यकता है। भोजन केवल एक बुनियादी आवश्यकता नहीं, बल्कि यह मानव गरिमा और विकास का प्रतीक है। हर व्यक्ति तक पर्याप्त और पौष्टिक भोजन पहुँचना मानवता की साझा जिम्मेदारी है। विश्व खाद्य दिवस हमें याद दिलाता है कि खाद्य सुरक्षा केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक, किसान और उपभोक्ता की सामूहिक प्रतिबद्धता है। जागरूकता, नवाचार और सहयोग के माध्यम से ही हम एक ऐसी दुनिया बना सकते हैं, जहाँ कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)