चीनी खिलाड़ियों ने इस साल के पेरिस ओलंपिक खेलों में शानदार प्रदर्शन किया। चीन 40 गोल्ड, 27 सिल्वर और 24 ब्रॉन्ज मेडल के साथ पेरिस ओलंपिक की मेडल टेली में दूसरे स्थान पर रहा। जबकि गोल्ड जीतने के मामले में चीन और अमेरिका दोनों ही 40 मेडल के साथ पहले स्थान पर रहे। पेरिस ओलंपिक में चीनी एथलीटों का जलवा देखने को मिला है। चीन के इस प्रदर्शन से समझा जा सकता है कि खेलों की दुनिया में आज के वक्त में चाइना दुनिया के सबसे सफल देशों में शामिल है, लेकिन यह सब एक दिन में नहीं हुआ है बल्कि इसके पीछे की कड़ी मेहनत और लंबा संघर्ष रहा है, जिसके चलते आज खेलों के मामले में चाइना का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है।
पेरिस ओलंपिक के प्रदर्शन को ही आधार मान लिया जाए तो यहां जा सकता है कि आज के वक्त में चीन खेलों की दुनिया में ‘सुपरपावर’ बन रहा है। इसके पीछे कई कारण हैं। एक स्पष्ट सोच और एक खास मिशन के साथ चीन खेलों की दुनिया में आगे बढ़ रहा है। 1980 के ओलंपिक खेलों के बाद से चीन ने अपनी खेल नीतियों में कई बदलाव किए हैं, जिससे चीन की खेल प्रणाली काफी हद तक मजबूत हुई और ओलंपिक समेत एशियन गेम्स जैसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों में अब चीन का दबदबा बनता जा रहा है।
चीन की सरकार इस बात को अच्छे से समझती है कि अगर खेलों की दुनिया में अच्छा प्रदर्शन करना है तो फिर खिलाड़ियों को हर सुविधा उपलब्ध कराना होगा। यही वजह है कि चीनी सरकार ने अपने खेल बजट को बढ़ाया और इस दिशा में व्यापक स्तर पर काम शुरू किया। बेहतर ट्रेनिंग, अच्छी कोचिंग, डाइट प्लान, संसाधन, इंडोर आउटडोर स्टेडियमों में उच्च स्तर की सुविधाएं जैसे अहम काम चीन ने खेल के क्षेत्र में किए हैं। आज के वक्त में चीन में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग वैज्ञानिक और मेडिकल साइंस के आधार पर जोर देकर करवाई जाती है, ताकि वह हर तरह से अपना सही प्रदर्शन कर सके।
चीन के खिलाड़ी हर टूर्नामेंट में अपना शानदार प्रदर्शन कर सके इसके लिए हर साल चीन में खेलों पर लाखों डॉलर खर्च होते हैं, जबकि चीन का खेल बजट भी लगातार बढ़ता जा रहा है। खेल अकादमियां, टैलेंट स्काउट्स, विदेशी कोचों, मनोवैज्ञानिकों के साथ-साथ नई टेक्नोलॉजी और साइंस पर चाइना सबसे ज्यादा फोकस कर रहा है। खास बात यह है कि चीन प्लान के साथ हर दिशा में आगे बढ़ रहा है। यहां का खेल विभाग उन खेलों पर सबसे ज्यादा जोर देता है जिनमें हर साल बहुत सारे इवेंट्स होते हैं, ताकि इन खेलों में हिस्सा लेकर ज्यादा से ज्यादा मेडल जीते जाए और खिलाड़ियों को पर्याप्त मौका मिले जिससे उनका हौसला बढ़े।
जिमनास्टिक, तैराकी, नौकायन, शूटिंग, वेटलिफ्टिंग, ट्रैक एंड फील्ड जैसे खेलों में चीन सबसे ज्यादा हिस्सा लेता है और इन खेलों में चाइना का दबदबा भी देखने को मिलता है। चीन खेलों के प्रति कितना सजग है इसका अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि आज के वक्त में पूरे चीन 3 हजार से ज्यादा स्पोर्ट्स स्कूल हैं, जहां बचपन से ही बच्चों के खेलों का महत्व बताया जाता है और उन्हें खेलों के प्रति उनका उत्साह बढ़ाया जाता है। चीन अपने 90 प्रतिशत से ज्यादा राष्ट्रीय खिलाड़ियों और लगभग तीन लाख एथलीटों 150 विशेष स्पोर्ट्स कैंपों में ट्रेनिंग देता है।
चीन में एक तरफ सरकार खिलाड़ियों को बढ़ावा देती है तो दूसरी तरफ चीन के लोग भी अपने बच्चों को खेल की दुनिया में आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। चीन में 6 साल की उम्र से ही जिमनास्टिक्स, खेलकूद की क्लास लगनी शुरू हो जाती है। खास बात यह भी है कि चीनी माता-पिता को अपने बच्चों के लिए खेल एक सुनहरा करियर ऑप्शन लगता है। जबकि एक उम्र के बाद यहां के युवा भी खेलों में अपना स्कोप देखते हैं। यही वजह है कि चीन खेलों की दुनिया में लगातार सफलता हासिल कर रहा है। चीन में इतना सबकुछ होता है, इसलिए यहां चैंपियन मटेरियल खिलाड़ी ससबे ज्यादा निकलते हैं।
ओलंपिक खेलों में पिछले कई सालों से चीन का दबदबा देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि चीन के खिलाड़ियों की नजर सबसे ज्यादा ‘गोल्ड’ मेडल पर ही होती है, यानि लाना तो सोना ही है, जिसके लिए वह एड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं। इसलिए चीनी खिलाड़ियों की धमक पूरी दुनिया में सुनाई देती है। आज के वक्त में चीन की खेल प्रणाली को भले ही सख्त कहा जाता हो लेकिन सफलता के लिए यह भी जरूरी है। यहां खेलों के प्रति सरकार की नीतियां, सॉफ्ट पावर, खेलों में निवेश, ट्रेनिंग, कोचिंग और एक शानदार प्लान ने चीन का एक मजबूत ग्रुप तैयार किया है, जिससे वह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल कर रहे हैं।
(लेखक—दिव्या तिवारी)

