Last Updated: September 29, 2026

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कैसे चीनी व्यंजनों ने भारतीय दिलों पर किया कब्जा?

August 8, 2025

कैसे चीनी व्यंजनों ने भारतीय दिलों पर किया कब्जा?

Chinese cuisine : चीन के खान-पान को जानने के बाद ये सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर क्यूं और कैसे चाइनीज़ फूड भारत पहुंचा और आज इतना लोकप्रिय हो गया। सवाल है तो जवाब भी मिलना ही चाहिए। जवाब खोजने की कोशिश में ये मिला कि चीनी लोग भारत में जब बौद्ध शिक्षा की तलाश में अक्सर आने लगे तो उन्हीं चीनी लोगों में से एक यांग थाई चोउ नाम की चीनी शख़्सियत ने साल 1778 में कोलकाता में चाइनीज़ खाने की गुंजाइश को तलाशना शुरू किया। उस समय कोलकाता ब्रिटिश भारत की राजधानी हुआ करती थी। और उसके बाद थाई चोउ जैसे काफ़ी लोग भारत आते रहे जिनमें ज़्यादातर हक्का चीनी ही थे।

कोलकाता में बसा पहला चाइना टाउन
उन्होंने कोलकाता में मिलकर 20वीं सदी की शुरुआत में बाकायदा एक चाइना टाउन बाज़ार खड़ा कर दिया। जैसे की कोई भी समझदार व्यक्ति अपनी सूझ से दूसरे देश की नब्ज़ को टटोलने और पकड़ने की कोशिश करता है वैसे ही इन प्रवासी चीनी लोगों ने किया और भारतीयों के स्वाद को परख लिया। फिर क्या था चाइनीज़ फूड की दुनिया रचने बसने लगी। कितने शानदार तरीके से बसाई इसका अंदाज़ा इसी बात से हो जाता है कि आज शहरी लोगों की रसोई बिना चाइनीज़ फूड के अधूरी-सी होने लगी है। इसका एक दिलचस्प वाक़या ये भी है कि इन प्रवासी चीनी लोगों ने बंगाल में मानी जाने वाली काली मां को अपनी देवी भी बताया और काली मां को भोग में नूडल्स, चोप सुई, चावल और दूसरे वेज़ फूड से भोग दिया।

भारतीय स्वाद को पहचानने की समझदारी
अब कौन रोक सकता था इस चाइनीज़ फूड की बाढ़ को। यहीं से शुरू हो गया इंडो-चाइना फूड का फ़्यूजन। भारत में पहला चाइनीज़ रेस्तरां भी कोलकाता में ‘Nanking Restaurant’ नाम से खुला आज से तकरीबन 100 वर्ष पहले। इसके बाद तो कोलकाता में जैसे चाइनीज़ रेस्तरां की बहार ही आ गयी। और इसी दौरान नामी “फैट मामा” और “किम फा” जैसे रेस्तरां खोले गए। अब बहुत से नए नामों से नई-नई डिश को परोसा गया जिन्हें हिंदुस्तानियों ने हाथों हाथ लिया।

भारतीय ‘चाइनीज़ फूड’ की अलग पहचान
अब चूंकि चाइनीज़ फूड का चस्का लग ही चुका था तो हम भी अब ये बात करेंगे कि आखिरकार कैसे ये चाइनीज़ फूड भारत में इतना लोकप्रिय होता गया और इसने अपनी पहुंच भारत के हर गली नुक्कड़, चौक-चौराहे, यहां तक की ठेले रेहड़ी पर भी बना ली। भारत में चाइनीज़ फूड की लोकप्रियता इस बात से ही साफ़ है कि यहां आप किसी बड़े से बड़े रेस्टोरेंट में पहुंच जाएं या गली चौराहे पे खड़े हों, आपको चाइनीज़ फूड की महक बरबस अपनी ओर खींच ही लेगी। आपके घर की रसोई भी नूडल्स, शेजवान चटनी, सोया सॉस और सिरका से सजने लगी है।

भारतीय बाज़ार में चाइनीज़ फूड ने अब अपनी खास जगह बना ली है, यहां तक कि आपको चाइनीज़ स्वाद वाले उत्पादों के अलग से काउंटर तक मिल जाएंगे। वहीं खाने की दुकान बिना चाइनीज़ फूड के अधूरी-सी मानी जाने लगी है। और यही कारण है कि मेन्यू कार्ड में चाइनीज़ फूड की एक अलग से सूची बनने लगी है।

गली-गली में चाइनीज़ फूड का कब्ज़ा
अगर मन को कुछ अलग खाने की शिकायत हो तो मोमो आज के भारतीय युवा वर्ग की कमजोरी बनने लगे हैं। आप अपनी जेब की गर्मी से ये तय कर लेते हैं कि आपको वैन पर मिलने वाला चाइनीज़ खाना है या आज मन किसी बड़े रेस्तरां में जाकर चाइनीज़ खाने का लुत्फ उठाने का है। गली में आने वाले ठेले पर भी चाइनीज़ फूड पसर गया है। लाल-काले रंग की सॉस, लच्छेदार नूडल्स और भाप में सिकते गरम-गरम मोमो। वहीं किसी बड़े रेस्टोरेंट चले जाएंगे तो आपको चाइनीज़ फूड की थोड़ी और लंबी लिस्ट मिलेगी मेन्यू कार्ड में साथ ही स्वाद में थोड़ा फ़र्क भी।

भारतीय स्वाद के लिए बना खास तड़का
बात दरअसल कुछ ऐसी है कि भारतीयों को चाइनीज़ फूड का चस्का ही इसलिए लगा क्योंकि भारतीयों को चाइनीज़ का स्वाद देने वालों ने असल में हमारी स्वाद ग्रंथियो को चख लिया। और ये समझने में सफल रहे कि तीखापन और खटास हमारे स्वाद का एक बड़ा हिस्सा है। और हमारे इस तीखेपन को जांचने के बाद ही चाइनीज़ खाने को हमारे अंदाज़ में परोसा गया। खाने के जानकार भी मानते हैं इस बात को कि चाइनीज़ फूड भारत में इतनी तेज़ी से लोकप्रिय इसीलिए हुआ क्योंकि कहीं न कहीं उसने हमारे स्वाद को पकड़ने में अपनी सूझ-बूझ का परिचय दिया है।

सछ्वान स्टाइल का मसालेदार जादू
और शायद यही कारण है कि चीन के सछ्वान प्रांत का मिर्चीदार जायका भारत में सबसे ज़्यादा पसंद किया गया। चूंकि शेजवान शैली में काली-लाल मिर्च, अदरक, लहसुन, तिल, मूंगफली और सिरके की खटास को प्रमुखता दी गयी है। ये सब हमारी रसोई का एक अहम हिस्सा हैं फिर भले ही शाकाहार बनाने की बारी हो या मांसाहार। साथ ही ये भी माना जाता है कि भारतीयों ने हमेशा से उन व्यंजनों को अपनी थाली में जगह दी है जो कार्बोहाइड्रेट से भरपूर रहे।

इंडो-चाइनीज़ फूड
ये सब तो बात हुई हमारे स्वाद और चाइनीज़ फूड के लोकप्रिय होने की पर क्या आपको ये पता है कि हम जिसे चाइनीज़ फूड बार-बार कहे जा रहे हैं वो असलियत में असल चाइनीज़ न होकर भारतीय अंदाज़ वाला इंडो-चाइनीज़ फूड है और हमें यही इंडो-चाइनीज़ खाना असल चाइनीज़ के नाम से खिलाया जा रहा है। चलो आपको बताते हैं कि क्या है इंडो-चाइनीज़ की पूरी कहानी।

चाइनीज़ के रूप में खाया जाने वाला इंडो-चाइनीज़ वो चाइनीज़ है जिसको भारतीय अंदाज़ में बनाया जाता है यानी इसमें भारतीय स्वाद के मुताबिक तेज़ मिर्च मसाले मिलाकर तैयार किया जाता है। एक तरह से चाइनीज़ व्यंजनों का भारत में स्थानीय स्वाद के मुताबिक अनुकूलन किया गया है या यूं कहें कि हमने अपनी तकरीबन हर डिश में चाइनीज़ अंदाज़ को समाहित किया है।

थाली से आगे बढ़े भारत-चीन संबंध
खैर, भारत में हम अगर यूं कहें कि चाइनीज़ फूड की एक तरह से दीवानगी है और ये दीवानगी हर दिन दो गुनी और रात चौगुनी हो रही है तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा। और उम्मीद करेंगे कि थाली से बढ़ाकर ये भारत-चीन प्रेम थोड़ा और आगे बढ़े ताकि हिन्दी-चीनी संबंध दूसरे आयामों में भी थोड़े और गहरे और विश्वसनीय हो सकें। कहते हैं न पड़ोसी से संबंध अच्छे रहे तो मधुर संबंध के फायदे बहुत ज्यादा होते हैं।

(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग)

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