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दावोस के बहाने चीनी आर्थिक विकास पर एक नजर

इंटरनेशनल डेस्क: स्विटजरलैंड के खूबसूरत शहर दावोस में सालाना तौर पर आयोजित होने वाली विश्व आर्थिक मंच की बैठक को वैश्विक अर्थव्यवस्था का अग्रदूत माना जाता है। इस बार की बैठक में चीन द्वारा अपनी आर्थिक उपलब्धियों का बखान सहज ही है। इसकी वजह भी है। दरअसल चीन का व्यापार फायदा एक खरब के करीब पहुंच गया है। अमेरिका और उसकी मुद्रा डालर की अगुआई वाले दौर में चीन की इस उपलब्धि को मामूली नहीं कहा जा सकता। चीन ने यह उपलब्धि मौजूदा भूराजनीतिक तनाव और आर्थिक परिवर्तन के बीच अपने कौशल और तकनीकी प्रगति के जरिए हासिल किया है।

चीन की बढ़ती अर्थव्यवस्था को लेकर दावोस में चीन के प्रधानमंत्री ने जो कहा, उसके मायने गहरे हैं…उन्होंने यह कहा कि अपनी प्रगति के साथ चीन का आर्थिक विकास विश्व अर्थव्यवस्था को मजबूत प्रोत्साहन देता रहेगा। दरअसल चीन का कुछ वर्षों में वैश्विक आर्थिक विकास में करीब 30 प्रतिशत का योगदान रहा है। 2023 में चीनी अर्थव्यवस्था की अनुमानित जीडीपी वृद्धि लगभग 5.2 प्रतिशत रही। चीन ने यह उपलब्धि दरअसल आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में बिना किसी बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन के सहारे के हासिल किया। दरअसल चीन ने यह उपलब्धि अपने दीर्घकालिक विकास के नजरिए से हासिल किया है, जिसमें चीन के विनिर्माण उद्योग की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। जो वैश्विक हिस्सेदारी का लगभग 30 प्रतिशत है। एक तरह से इस क्षेत्र में चीन की हिस्सेदारी दुनिया में सबसे ज्यादा तो है ही, लगातार 14 वर्षों से यह जारी है।

दावोस में चीन ने यह भी बताया कि वह 200 से अधिक परिपक्व उद्योग समूहों का भी घर है। चीन ऐसा देश बन चुका है, जिसके आर्थिक लाभांश में जनसंख्या की भागीदारी भी बढ़ रही है। चीन को यह उपलब्धि उसकी अपनी प्रतिभाओं के साथ ही विज्ञान और प्रौद्योगिकी में मानव संसाधन की बेहतर उपस्थिति की वजह से है। आज संख्या के लिहाज से चीन में सबसे ज्यादा शोधकर्ता हैं। इस देश में पूंजी का प्रभाव भी हर जगह बढ़ा है। सालाना पूंजी निर्माण में भी चीन की भागीदारी लगभग 30 प्रतिशत है। चीन ने क्लाउड कंप्यूटिंग, बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन सहित नई तकनीकों को तेजी से अपनाकर अपनी आर्थिकी को मजबूत बनाया है। आज चीन में इंटेलिजेंट टर्मिनल, रोबोट और टेली हेल्थ नए कारोबारी क्षेत्र के रूप में उभर रहे हैं। चीन में अब लगभग 40 लाख हाई-टेक उद्यम हैं और यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या में यह दुनिया भर में दूसरे स्थान पर है।

चीन ने अपनी खेती को भी नए रंग में ढाला है। इस लिहाज से कह सकते हैं कि चीन ने उच्च गुणवत्ता वाले विकास के दौर में पहुंच गया है। चीन की आबादी 1.4 अरब है। इतनी बड़ी जनसंख्या को उत्कृष्ट मानव संसाधन बनाना मामूली बात नहीं है। चीन के प्रधानमंत्री ने दावोस के मंच पर इन सबकी जानकारी देकर एक तरह से दुनिया को चौंकाया ही है।

चीन के पास वैश्विक बाजार के साथ ही अपने उत्पादों के लिए खुद का भी बड़ा बाजार है। जिसमें 40 करोड़ लोगों का अपना मध्य वर्ग है। चीन को ही उम्मीद है कि कुछ वर्षों में यह संख्या दोगुनी हो जाएगी। चीनी प्रधानमंत्री ली ने अपनी बात हरित और निम्न-कार्बन विकास की ओर अपने संक्रमण को गहरा कर रहा है। दुनिया की स्थापित फोटोवोल्टिक क्षमता का लगभग आधा हिस्सा चीन के पास है। दुनिया के आधे से ज़्यादा ऊर्जा वाहन चीन की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। चीन में इन दिनों करीब दो करोड़ वाहन सतत ऊर्जा से चलने वाले हैं। दुनिया में हो रहे वनरोपण का एक चौथाई चीन में ही हो रहा है। बायोफार्मा आदि में भी चीन अपना दबदबा कायम करता जा रहा है।

चीन के वैश्विक कारोबार में भी लगातार हिस्सेदारी बढ़ी है। चीन के कारोबारी रिश्ते 140 से अधिक देशों से हैं। पिछले कुछ वर्षों में, बहुराष्ट्रीय निगमों ने चीनी बाजार को विकास किया है। दावोस में पेश आंकड़ों के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में, चीन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर लगभग नौ प्रतिशत रिटर्न रहा है। शायद यही वजह है कि चीन को वैश्विक स्तर पर निवेश भी मिल रहा है।

दावोस के मंच के साथ ही कुछ अन्य वैश्विक मंचों पर चीन ने अपनी यह उजली तसवीर सफलता पूर्वक पेश की है। शायद यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में दावोस में हिस्सा लेने वाली चीनी कंपनियों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। चीन की प्रमुख सौर कंपनी लोंगी ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी के अनुसार, सौर फोटोवोल्टिक तकनीक अब अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रही है। दावोस की बैठक के दौरान, लोंगी ने नवाचार को बढ़ावा देने और सौर फोटोवोल्टिक प्रौद्योगिकी की तैनाती के तरीकों का पता लगाने के साथ ऊर्जा क्षेत्र में काम करने के लिए कई देशों और कंपनियों से चर्चा की और अपना कारोबार बढ़ाने की कोशिश की। दावोस की इस बैठक में दुनियाभर से उद्योग जगत के करीब 3,000 नेता जुटे, जबकि करीब 350 राजनेताओं ने हिस्सा लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, शीतकालीन दावोस फोरम में वित्त, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और संस्कृति जैसे विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले 10 मंत्री स्तर के अधिकारियों सहित 140 सदस्यीय चीनी प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया।
दावोस की बैठक के मौके पर सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने चीन की आर्थिक तसवीर भी पेश की।

इसके अनुसार, 2023 में, विदेशों में सक्रिय चीनी कंपनियों ने मेजबान देशों और क्षेत्रों को विभिन्न करों में कुल 75.3 अरब डॉलर का भुगतान किया। 2023 के अंत तक, विदेश में इन कंपनियों के लिए काम करने वाले कर्मचारियों की कुल संख्या 42 लाख 9 हजार तक पहुंच गई, जिसमें 25 लाख 7 हजार स्थानीय कर्मचारी भी शामिल थे। जो पिछले साल की तुलना में करीब 77 हजार और करीब 60 प्रतिशत ज्यादा रहा। दावोस बैठक के मौके पर ही पता चला कि साल 2023 के अंत तक, चीन के घरेलू निवेशकों ने 189 देशों और क्षेत्रों में 48 हजार विदेशी उद्यमों की स्थापना की।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)

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