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संयुक्त राष्ट्र की 6 आधिकारिक भाषाओं में चीनी भी, दुनियाभर में बढ़ रहा ‘मैंडरिन’ का क्रेज 

चीन आज के वक्त में दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का नाम बन चुका है, ऐसे में अगर चीन को समझना है तो आपको चीनी भाषा को भी समझना फायदेमंद हो सकता है। चीन की संस्कृति और सभ्यता के साथ-साथ यहां की भाषा भी बेहद प्रभावशाली मानी जाती है। यही वजह है कि पूरब के साथ-साथ अब पश्चिमी देशों में भी चाइनीज भाषा जिसे ‘मैंडरिन’ भी कहा जाता है, उसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। चीनी भाषा को सीखने में लोगों की रुचि भी बढ़ी है। इस बात का अंदाजा इस चीज से लगाया जाता है कि हर साल 20 अप्रैल को ‘संयुक्त राष्ट्र चीनी भाषा दिवस’ मनाया जाता है जिसका अपना अलग महत्व है, दरअसल, संयुक्त राष्ट्र में जो 6 आधिकारिक भाषाएं हैं, उनमें चीनी भाषा भी शामिल है। इस दिन पर चाइना में खास तैयारी रहती है। चीनी भाषा की विविधता और उपयोगिता को समझना आज के वक्त में जरूरी सा दिखने लगा है, क्योंकि चीनी भाषा का महत्व तेजी से बढ़ा है। 

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र संघ यानि यूएन में जितने भी काम होते हैं, उनमें चीनी भाषा अहम भूमिका में रहती है। इसी से इसके महत्व को समझा जा सकता है। चीनी भाषा ‘मैंडरीन’ की पूरी विरासत है, जिसमें दिलचस्प इतिहास और संस्कृती के कई रंग हैं। जैसे-जैसे आप इस भाषा को समझेंगे आपको इसे सीखने की उत्सुकता उतनी ही तेजी से बढ़ती जाएगी। हिंदी की ही तरह चीनी भाषा भी हजारों अक्षरों का संगम है। जो किसी के भी ज्ञान को और बढ़ाती है। खासतौर पर भारत में चीनी को लेकर भी लोगों में दिलचस्पी बढ़ी दिखी है। 

भारत के साथ-साथ दुनिया भर में हर वर्ग और जनरेशन में चीनी भाषा मैंडरिन को लेकर क्रेज बढ़ा है और लोग इसे सीखने के लिए कोशिश कर रहे हैं। कई देशों के बड़े-बड़े शहरों में चीनी भाषा सिखाने के लिए क्लासेस चल रही है, जैसे कभी इंग्लिश सीखने के लिए होती थीं। भाषाई जानकारों का भी मानना है कि आज के वक्त में तेजी से आगे बढ़ने के लिए चीनी भाषा सीखना उपयोगी है, इसलिए युवाओं का इस भाषा के प्रति रूझना तेजी से बढ़ा है, इसकी एक वजह यह भी है कि चीनी भाषा दुनिया में सबसे ज्यादा बोले जानी वाली भाषाओं में से एक है, करीब 100 करोड़ लोग इस भाषा का इस्तेमाल करते हैं। चीन एक व्यापक और बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ दुनिया में खड़ा नजर आ रहा है, ऐसे में अगर आपने मैंडरिन यानि चीनी भाषा सीख ली तो आपको इसका खासा फायदा मिल सकता है।

भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जब चीन के दौरे पर गई थी तो उन्होंने पेइचिंग में कहा था कि भारत और चीन के लोगों को एक दूसरे की भाषा सीखनी चाहिए, क्योंकि इससे भाषाई रुकावट दूर होगी और दोनों देशों के बीच संबंध और घनिष्ठ होंगे। आज के वक्त में भारत का युवा बड़ी संख्या में चीनी कंपनियों से जुड़ा है। चीनी कंपनियों को भी ऐसे युवाओं की जरुरत हैं जिनकी चीनी भाषा पर पकड़ हो, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध भी अच्छे हैं, इसलिए दोनों देशों की भाषाएं उपयोगी है। खास बात यह है कि भारत में चीनी भाषा सिखाने के लिए आज के वक्त में 200 से भी ज्यादा संस्थाएं चल रही हैं, भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित चीनी दूतावास में भी मैंडरिन भाषा सिखाई जाती है। ऐसे में दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित करने का एक अच्छा तरीका भी बनता जा रहा है। 

दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं में जो भाषाएं शामिल हैं, उनमें चीनी भाषा भी शामिल है, क्योंकि इसका इतिहास हजारों साल पुराना है, जिसका अपना एक गहन इतिहास रहा है। चीनी भाषा का सबसे पहला लिखित रिकॉर्ड 1250 ईसा पूर्व में मिलता है, जो शांग राजवंश के समय का बताया जाता है। यह भाषा बोलने में बेहद लचीलेपन और अनुकूलता का माहौल बनाती है। इसलिए चीन में पिछले कुछ समय में तेजी से बदलाव हुआ है, लेकिन उनकी विरासत और सभ्यता और भाषा को इस देश ने आज भी संभाल कर रखा है। 

चीनी भाषा बहुभाषावाद को भी बढ़ावा देती है, यानि आप मैंडरिन के साथ-साथ एक से अधिक भाषाओं को भी समझने और संवाद करने की क्षमता अपने अंदर करते हैं, जो चीनी भाषा का वैश्वीकृत समाज में एक उपयोगी उदाहरण हैं। चीनी भाषा बाधाओं को तोड़कर न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान करती है बल्कि एक दूसरे की भाषा के प्रति सम्मान भी बढ़ाती है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र चीनी भाषा दिवस में भाषाओं के सीखने के महत्व को बताया जाता है, जो विशाल सांस्कृतिक परिदृश्य का दरवाजा दुनियाभर में खोलती है और सभी की सराहना करती है। 

आज के आधुनिक दौर में जब चीन का प्रभाव दुनियाभर में तेजी से बढ़ा है, तब चीनी भाषा का भी महत्व बढ़ा है, एक अरब से अधिक लोग आज के वक्त में चीनी भाषा बोलते हैं, लेकिन इसका महत्व संख्या में न तौलकर उसकी उपयोगिता में तोला जा सकता है, अगर आप चीनी भाषा सीख लेते हैं तो आपको उस ऐतिहासिक और समृद्धशाली विरासत को समझने का मौका मिलेगा, जिसने दुनिया में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। इसलिए 20 अप्रैल का दिन चीनी संस्कृति से जुड़ने का दिन माना जाता है, इस दिन आप विश्व की सांस्कृतिक विरासत में चीनी सभ्यता के योगदान को समझ सकते हैं।

(लेखकः दिव्या तिवारी)

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