हाल ही में भारत में ब्रिक्स वाणिज्य और उद्योग चैंबर (सीसीआई) द्वारा आयोजित “युवा नेता शिखर सम्मेलन 2.0 – नेतृत्व संवाद” में भारत स्थित चीनी दूतावास के मंत्री हे मेंग ने भाग लिया और महत्वपूर्ण भाषण दिया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित भारतीय युवाओं के साथ चीन-भारत संबंधों और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों के तहत दोनों देशों के सहयोग पर विस्तार से चर्चा की।
हे मेंग ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है। उन्होंने भारत में ब्रिक्स सीसीआई द्वारा स्थापित किए गए इस युवा शिखर सम्मेलन की सराहना की, जो भारतीय और अन्य ब्रिक्स देशों के युवाओं को राजनयिक और अंतर्राष्ट्रीय मामलों पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन, सीसीआई के साथ अपने संबंधों और सहयोग को और गहरा करने के लिए उत्सुक है।
अपने भाषण में, हे मेंग ने इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि 70 साल से भी पहले, चीन, भारत और अन्य देशों के नेताओं ने मिलकर शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पाँच सिद्धांतों को प्रतिपादित किया था, जो आज भी अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के लिए एक बुनियादी मानदंड हैं। उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा प्रस्तावित मानव जाति के लिए एक साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण की अवधारणा और वैश्विक विकास, वैश्विक सुरक्षा व वैश्विक सभ्यता संबंधी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इन पहलों को 100 से अधिक देशों और संगठनों से समर्थन मिला है, क्योंकि ये वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए चीन के ठोस प्रस्ताव पेश करती हैं।
ब्रिक्स के विस्तार पर बोलते हुए, हे मेंग ने कहा कि नए सदस्य देशों के शामिल होने के बाद, यह समूह दुनिया की आधी से ज़्यादा आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक आर्थिक उत्पादन में लगभग 30% और आर्थिक विकास में 50% से अधिक का योगदान देता है। इसी कारण, यह ग्लोबल साउथ का एक महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र बन गया है।
हे मेंग ने ब्रिक्स देशों की ज़िम्मेदारियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधिपत्यवाद के सामने, ब्रिक्स को निष्पक्षता और न्याय बनाए रखने में “मुख्य शक्ति” के रूप में काम करना चाहिए, और एकतरफ़ावाद के सामने, उन्हें एकजुट होकर सहयोग को बढ़ावा देने में “रीढ़ की हड्डी” की भूमिका निभानी चाहिए।
हे मेंग ने कहा कि इस वर्ष चीन और भारत के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ है। पिछले 75 वर्षों में, चीन-भारत संबंधों में उतार-चढ़ाव आए हैं, लेकिन मैत्रीपूर्ण सहयोग हमेशा मुख्यधारा रहा है। पिछले वर्ष, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने कज़ान में अपनी बैठक में महत्वपूर्ण सहमति पर पहुँचकर चीन-भारत संबंधों के सुधार और विकास की दिशा निर्धारित की।
इस महीने के अंत में, प्रधानमंत्री मोदी एससीओ थिआनचिन शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन का दौरा करेंगे। मेरा विश्वास है कि जब तक हम अपने नेताओं द्वारा बनाई गई इस महत्वपूर्ण सहमति का पालन करते रहेंगे कि “हम एक दूसरे के लिए विकास के अवसर हैं और एक दूसरे के लिए खतरा नहीं हैं” और “हम भागीदार हैं, प्रतिस्पर्धी नहीं” तथा हम आपसी समझ और आपसी समर्थन करते हैं, तब तक चीन और भारत निश्चित रूप से “ड्रैगन और हाथी का नृत्य” हासिल कर लेंगे।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

