इंटरनेशनल डेस्क: हाल ही में यूनेस्को ने चीन के स्प्रिंग फेस्टिवल (चीन का सबसे बड़ा त्योहार, चंद्र नये साल की शुरुआत) और भारत के दीवाली को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल किया। दोनों त्योहार रोशनी, परिवार और समृद्धि के प्रतीक हैं! दोनों का यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होना सिर्फ़ सांस्कृतिक मान्यता नहीं, बल्कि एशिया की दो प्राचीन सभ्यताओं के बीच संवाद का ऐतिहासिक अवसर है। जैसे-जैसे चीनी वसंत उत्सव नज़दीक आ रहा है, यह विषय और भी प्रासंगिक हो जाता है। आने वाले दिनों में चीन अपना सबसे बड़ा और खुशियों भरा त्योहार – वसंत उत्सव मनाने जा रहा है। इसी तरह, दिवाली भारत में प्रकाश, खुशियों और नए सिरे से शुरुआत का प्रतीक है। दोनों ही त्योहार अपने-अपने समाज में पारिवारिक एकता, आशा और अच्छाई की जीत के संदेश लेकर आते हैं।
साझा आध्यात्मिकता, अलग-अलग रंग
वसंत उत्सव पर चीन में लाल रंग की सजावट, आतिशबाजी, पारिवारिक दावतें और “होंगबाओ” (लाल लिफाफे) का चलन है। दिवाली पर भारत में दीयों की रोशनी, पटाखे, मिठाइयाँ और पूजा-अर्चना की जाती है। दोनों ही त्योहार अंधकार पर प्रकाश की जीत, बुराई पर अच्छाई का विजय और नए साल की नई शुरुआत का संकेत देते हैं। दीपावली हो या स्प्रिंग फेस्टिवल दोनों ही त्योहार प्रकाश, परिवार, सौहार्द और नए आरंभ का संदेश देते हैं। भारत में दीपावली अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है, वहीं चीन में स्प्रिंग फेस्टिवल बसंत के आगमन, पुनर्जन्म और समृद्धि का उत्सव। परंपराएँ अलग हो सकती हैं, लेकिन भावनाएँ एक जैसी हैं घर लौटना, बड़ों का सम्मान, बच्चों की खुशियाँ और भविष्य के प्रति आशा।
इन दोनों त्योहारों को वैश्विक सांस्कृतिक विरासत का दर्जा मिलना चीन और भारत से यह अपेक्षा भी करता है कि वे सभ्यताओं के पारस्परिक अध्ययन को और गहरा करें। सांस्कृतिक प्रतीक केवल अतीत की स्मृति नहीं होते, वे वर्तमान को जोड़ते और भविष्य की दिशा तय करते हैं। लोककला, भोजन, फिल्म, संगीत, साहित्य और युवा आदान-प्रदान जैसे माध्यमों से दोनों देश जन-जन के स्तर पर रिश्तों को मज़बूत कर सकते हैं। आज जब दुनिया बहुध्रुवीय और परस्पर निर्भर हो रही है, तब पीपुल-टू-पीपुल एक्सचेंज सबसे विश्वसनीय पुल बनते हैं। चीनी स्प्रिंग फेस्टिवल और भारतीय दीपावली दोनों ही इस पुल के उजले दीपक हैं। सोशल मीडिया, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शैक्षणिक सहयोग के ज़रिये इन त्योहारों की कहानियाँ साझा करना, एक-दूसरे की परंपराओं को समझना और सम्मान देना यही सच्ची सांस्कृतिक कूटनीति है।
सभ्यताओं का पारस्परिक आदान-प्रदान
यूनेस्को की यह मान्यता चीन और भारत के लिए एक सुनहरा अवसर है। इन सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से हम…
· एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।
· सांस्कृतिक और पर्यटन आदान-प्रदान को बढ़ावा दे सकते हैं।
· लोगों के बीच आपसी सम्मान और मैत्री की भावना को मजबूत कर सकते हैं।
आने वाले दिनों में, जब चीन वसंत उत्सव मनाएगा, भारत से उठने वाली शुभकामनाएँ और साझा उत्सव की भावना दोनों देशों के संबंधों में नई ऊर्जा भर सकती हैं। प्रकाश की यह साझी परंपरा हमें याद दिलाती है सभ्यताएँ तब फलती-फूलती हैं, जब वे एक-दूसरे से सीखती हैं। आइए इस वसंत उत्सव पर चीन की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जानने का प्रयास करें। और जब दिवाली आए, तो भारत के उज्ज्वल त्योहार की कहानी दुनिया को सुनाएँ। यही सभ्यताओं का असली संवाद है। यह केवल त्योहार नहीं, बल्कि दोनों देशों की जनता के दिलों को जोड़ने वाली धड़कन है। आइए, इस सांस्कृतिक समृद्धि का जश्न मनाएं और भविष्य की ओर मिलकर कदम बढ़ाएं। चीनी वसंत उत्सव (स्प्रिंग फेस्टिवल) की हार्दिक शुभकामनाएँ!
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)

