Last Updated: September 23, 2026

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POK में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ा बवाल,12 नागरिकों की हुई मौत

October 2, 2025

POK में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ा बवाल,12 नागरिकों की हुई मौत

इंटरनेशनल डेस्क: पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर (POK) में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई। जिसमें 12 नागरिकों की जान चली गई है। यह क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में इस तरह के सबसे बड़े और तीव्र विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रहा है। शुरू में ये प्रदर्शन सरकार की 38 प्रमुख मांगों के निस्तारण की मांग को लेकर शुरू हुए थे, लेकिन अब यह सेना की मनमानी और अन्य अत्याचारों के खिलाफ व्यापक और गहन आंदोलन का रूप ले चुका है।

विरोध प्रदर्शन आज अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर गया है। दादियाल में प्रदर्शनकारियों और सेना के बीच जबरदस्त झड़प हुई, जिसके बाद सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हजारों अतिरिक्त सैनिकों को तैनात कर दिया। प्रदर्शन की आग मुज़फ़्फ़राबाद से लेकर रावलाकोट, नीलम घाटी और कोटली तक फैल गई है।

संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी ने बातचीत के लिए बुलाया बैठक

चौधरी अनवरुल हक और संघीय मंत्री तारिक फ़ज़ल चौधरी ने बुधवार को संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को बातचीत के लिए आमंत्रित किया, ताकि इस हिंसा को रोकने और शांति बहाल करने के उपाय किए जा सकें। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, मुज़फ़्फ़राबाद और धीरकोट में 10 प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि दादियाल में दो प्रदर्शनकारी मारे गए। इसके अलावा, तीन पुलिसकर्मी भी इस हिंसा में शहीद हुए हैं। 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (AAC) के नेतृत्व में हो रहे हैं, जिसने पूरे POK में आर्थिक और सामाजिक जीवन को ठप कर दिया है। आंदोलन की मुख्य मांगों में 12 विधानसभा सीटों को खत्म करने की अपील है, जो पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। साथ ही कर में राहत, आटा और बिजली पर सब्सिडी, तथा विकास परियोजनाओं की तत्काल पूर्ति की मांग भी शामिल है।

29 सितंबर से जीवन ठप, संचार माध्यम बंद

29 सितंबर से पूरे क्षेत्र में बाजार, दुकानें और स्थानीय व्यवसाय बंद हैं। मोबाइल, इंटरनेट और लैंडलाइन सेवाएं पूरी तरह ठप हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में हजारों प्रदर्शनकारी पत्थरबाजी करते, सड़कों पर बड़े कंटेनरों को गिराकर मार्च रोकने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।

अन्य शहरों में भी प्रदर्शनकारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद सड़कों पर उतर आए और “Rulers, beware, we are your doom” तथा “Kashmir is ours, we will decide its fate” जैसे नारे लगाए। यह पहली बार है जब POK के नागरिक खुले तौर पर पाकिस्तानी सेना और सरकार के खिलाफ इतनी मजबूती से आवाज़ उठा रहे हैं।

पाकिस्तानी सरकार की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय अपील

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ ने कहा है कि सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों को गंभीरता से ले रही है और मामले को सुलझाने के लिए एक वार्ता समिति बनाई गई है। उन्होंने सुरक्षा बलों को संयम बरतने का निर्देश भी दिया है।

इसी बीच, यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) के प्रवक्ता नासिर अजीज खान ने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस मानवाधिकार संकट को रोकने के लिए कदम नहीं उठाए गए तो POK में हालात और बिगड़ सकते हैं।

इससे पहले, खैबर पख़्तूनख्वा में पाकिस्तान एयर फ़ोर्स की हवाई हमलों में 30 नागरिकों की मौत हो चुकी है, जो क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ावा देने वाला एक गंभीर संकेत है।

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