
Clean Water and Green Mountains : हाल ही में तुर्की के चीनी विद गिरे फिदान ने दक्षिण पूर्वी चीन के फुच्येन प्रांत के सानमिंग शहर का दौरा किया। वहां की पारिस्थितिक सभ्यता निर्माण ने उन पर गहरा प्रभाव डाला। उनको लगता है कि स्वच्छ पानी और हरित पहाड़ अनमोल संपत्ति होने की अवधारणा चीन के विकास के विभिन्न पहलुओं में घुल गयी है, जो अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी के समन्वित विकास के बढ़ा रही है।
बता दें कि सानमिंग करीब 900 साल के पहले महान दार्शनिक चुशी का जन्मस्थान है। चुशी ने एक मशहूर वाक्य लिखा था कि नदी का पानी कैसे इतना साफ है, क्योंकि उसके उद्गम से स्वच्छ पानी निरंतर आता है। इसका मतलब है कि सिर्फ विचार हमेशा जीवंत और सक्रिय हैं, तो हम समय के अनुसार अग्रसर रह सकते हैं। खास बात है कि 1985 से 2002 तक शी चिनफिंग फुच्येन में साढ़े 17 साल तक कार्यरत थे। इस दौरान उन्होंने 11 बार सानमिंग का निरीक्षण किया था।
फिदान सानमिंग में शानछिंग नदी दृश्य क्षेत्र, छांगखो गांव, छिंगयु संतरा कंपनी के उद्यान, सानकांग स्टील ग्रुप गये। उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ व्यापक मुद्दों पर चर्चा की और उनके जीवन का महसूस किया। फिदान ने बताया कि एक चीनीविद् के नाते उनको पता है कि चीन की परंपरागत संस्कृति में मानव और प्रकृति के सामंजस्यपूर्ण सहअस्तित्व की कई अवधारणाएं हैं। सानमिंग में उन्होंने जो देखा और सुना, उनसे जाहिर है कि ऐसे विचारों का वर्तमान चीनियों पर बड़ा प्रभाव बना रहता है।
उन्होंने बताया कि वहां के सतत् और हरित व्यवसायों ने न सिर्फ ग्रामीण लोगों का जीवन पर्यावरण को बदला है, बल्कि उनकी आय के तरीके भिन्न-भिन्न हो गये हैं, यहां तक कि स्वच्छ वायु भी बिक सकती है। स्थानीय उद्यम अपने कार्बन उत्सर्जन से पैदा प्रदूषण के भुगतान के लिए कार्बन टिकेट्स खरीदते हैं, जबकि स्थानीय किसान पेड़ लगाने से कार्बन टिकेट्स प्राप्त कर उद्यम बेच सकते हैं।
इस तरह कार्बन कारोबार से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। यह आर्थिक विकास और पारिस्थितिकी संरक्षण का संतुलन स्थापित करने की पहल है। फिदान ने बताया कि सानमिंग में स्थानीय लोग पर्यावरण संरक्षण के लाभार्थी हैं। स्वच्छ पानी और हरे-भरे पहाड़ आम लोगों के सुखी जीवन का साधन बन गये हैं।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)
मेष: दिन शुभ रहेगा...