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चीन में ब्याज दरों में कटौती से संबंधित मामले में विचार 

September 15, 2025

चीन में ब्याज दरों में कटौती से संबंधित मामले में विचार 

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती के बाजवूद चीन के केंद्रीय बैंक की ओर से किसी ब्याज दर में कटौती नहीं करने जा रहा है। अमेरिकी टैरिफ युद्ध के चलते चीन के केंद्रीय बैंक की ओर से ऐसे कदम उठाने की उम्मीद बढ़ना स्वाभाविक है। चीन के केंद्रीय बैंक की ओर से कोशिश है कि शेयर मार्केट को गिरने से बचाने के साथ ही चीन में निवेश और उत्पादन को बढ़ाए रखा जाए। हालांकि अमेरिकी टैरिफ युद्ध के चलते चीन समेत सभी संबंधित अर्थव्यवस्थाओं की ओर से प्रोत्साहन पैकेज का दबाव है। जाहिर है कि चीन भी ऐसे दबाव का सामना कर रहा है। लेकिन दिलचस्प यह है कि चीन का शेयर बाजार लगातार उछाल पर है। चीन के केंद्रीय बैंक और अर्थव्यवस्था के लिए यह खुशी की बात हो सकती है। 

उम्मीद की जा रही है कि अगले हफ्ते तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपेक्षित ब्याज दरों में कटौती की तैयारी में है। ऐसे में चीन के केंद्रीय बैंक की ओर से निकट भविष्य में नीतिगत ढील देने से बचने के आसार बढ़ गए हैं। हालांकि चीन के आर्थिक विशेषज्ञों पर एक दबाव यह भी है कि शेयर बाजार में और तेजी बढ़ाए बिना ही अर्थव्यवस्था को बनाए रखा जाए और चीन की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया जाए।

   मंदी का खतरा यह है कि अगर यह आई तो स्थानीय रोजगार और समाज पर चुनौती बढ़ा सकती है। फेड द्वारा ब्याज दरों में कटौती से पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना को युआन के अवमूल्यन में बिना जोखिम, ढील की गुंजाइश हो सकती है। हालांकि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि केंद्रीय बैंक अमेरिका के कदम का तुरंत अनुसरण करने की बजाय स्पष्ट आर्थिक संकेतों की प्रतीक्षा की जानी चाहिए। दुनियाभर के वित्त बाजारों को लगता है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी 16-17 सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में एक चौथाई तक की कटौती कर सकता है। साल के अंत तक ऐसी दो और कटौतियों की आशंका है।

चीन के एक आर्थिक विशेषज्ञ के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना से चीन की मौद्रिक नीति के लिए ज़्यादा गुंजाइश बढ़ती है। चीन के जानकार मानते हैं कि आर्थिक मोर्चे पर कोई भी नीतिगत कार्रवाई चीनी अर्थव्यवस्था की हालत पर निर्भर करेगी। चीन का शेयर बाज़ार अभी बहुत तेज है। ऐसे में अगर चीन में ब्याज दरों में कटौती की जाएगी तो उस पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। 

मौजूदा वर्ष में अब तक, पीबीओसी ने सात दिवसीय रिवर्स रेपो दर में सिर्फ 10 आधार अंकों की कटौती की है और बैंकों के आरक्षित जरूरी अनुपात यानी आरआरआर में 50 आधार अंकों की कटौती की है। चीन के केंद्रीय बैंक ने ये दोनों कदम अमेरिकी टैरिफ युद्ध के बीच अपनी आर्थिकी और कारोबारी जगत को व्यापक प्रोत्साहन उपायों के तौर पर उठाए थे। 

आर्थिक जानकार  चीनी शेयरों को लेकर आशावादी बने हुए हैं, उनका कहना है कि इस तेजी का नेतृत्व संस्थागत निवेशक कर रहे हैं, और खुदरा निवेशक भी इसमें शामिल हो रहे हैं। इस बीच खर्च से बच रहे और निवेश करने से कतरा रहे चीनी परिवारों के पास रिकॉर्ड 160 ट्रिलियन युआन यानी करीब 22.45 ट्रिलियन डॉलर की अपार बचत है। यह चीनी अर्थव्यवस्था के लिए राहत और ताकत की खबर है। 

चीन के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कोविड महामारी से पहले, 2015-2019 के दौरान चीन की अर्थव्यवस्था औसतन 6.7 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ती रही थी। मैक्वेरी के मुख्य चीन अर्थशास्त्री लैरी हू को लगता है कि कुछ कमज़ोर आर्थिक आँकड़ों के कारण चीन सरकार और केंद्रीय बैंक नए छोटे प्रोत्साहन उपाय लागू कर सकते हैं। उनके अनुसार, चीन सरकार राजकोषीय नीति को भी बढ़ावा दे सकती है। वैसे अब तक, पीबीओसी की ओर से अपेक्षाकृत कम नीतिगत ढील दी गई है, जिसका कारण अमेरिकी टैरिफ युद्ध है। चीन और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के कुछ जानकारों के अनुसार, अमेरिका से उलट चीन लगातार अपनी मौद्रिक नीति को ढीला कर रहा है, इसलिए उसकी ओर से ब्याज दरों में आगे और कटौती की गुंजाइश बहुत कम है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)

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