Last Updated: October 17, 2026

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जहां से मिलेगा सस्ता तेल वहीं से खरीदेंगे, रूस में भारतीय राजदूत की दो टूक

August 25, 2025

जहां से मिलेगा सस्ता तेल वहीं से खरीदेंगे, रूस में भारतीय राजदूत की दो टूक

Crude Oil : भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ वॉर एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां भारत ने एक बार फिर रूस से तेल आयात पर उठते सवालों का सख्त लहज़े में जवाब दिया है। मॉस्को में भारत के राजदूत विनय कुमार ने रूस की सरकारी समाचार एजेंसी से बातचीत में स्पष्ट कहा है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सर्वोत्तम सौदे वाली जगहों से ही तेल खरीदना जारी रखेगा, चाहे वो रूस हो या कोई और देश। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका ने हाल ही में भारतीय उत्पादों पर टैरिफ को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया है। अमेरिकी फैसले की आलोचना करते हुए राजदूत ने इसे “अनुचित, अविवेकपूर्ण और निष्पक्ष व्यापार सिद्धांतों के विरुद्ध” बताया।

ऊर्जा नीति पर नहीं होगा कोई समझौता
राजदूत कुमार ने कहा, “भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह से अपने 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित है, न कि किसी बाहरी राजनीतिक दबाव पर। हमारी प्राथमिकता सस्ती, विश्वसनीय और स्थिर आपूर्ति है, और इसके लिए जो भी स्रोत सबसे बेहतर सौदा देगा, भारत उससे व्यापार करेगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत का रूस से बढ़ता तेल आयात वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लाने में भी सहायक रहा है।

राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार से हल हुई भुगतान की समस्या
भारत-रूस ऊर्जा व्यापार को लेकर अक्सर वित्तीय लेनदेन पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन राजदूत ने बताया कि अब दोनों देशों के बीच एक प्रभावी भुगतान प्रणाली स्थापित हो चुकी है। उन्होंने कहा, “हमने राष्ट्रीय मुद्राओं में निपटान की एक कार्यशील प्रणाली तैयार की है, जिससे अब तेल आयात के भुगतान में कोई रुकावट नहीं है।

जयशंकर की भी तीखी प्रतिक्रिया
इससे पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी अमेरिकी टैरिफ को ‘अनुचित’ करार दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि भारत अपने किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि भारत व्यापार में आत्मनिर्भरता और संतुलन के पक्ष में है, न कि दबाव में आने के।

रूस-भारत द्विपक्षीय व्यापार में नई गति
यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर भारी प्रतिबंध लगाए, तब भारत ने एक रणनीतिक संतुलन बनाए रखा। भारत ने रूस से सस्ते दरों पर कच्चा तेल खरीदना शुरू किया, जिससे घरेलू मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली। अब भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार और ऊर्जा साझेदारी नई ऊंचाइयों को छू रही है।

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