Last Updated: October 18, 2026

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चीन के कारोबारी विकास में कस्टम सुधार का बड़ा योगदान

January 25, 2024

चीन के कारोबारी विकास में कस्टम सुधार का बड़ा योगदान

सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के हिसाब से साल 2010 से लगातार चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। चीन ने यह स्थिति अपनी औद्योगिक नीति में उपभोग और सेवाओं पर जोर देकर हासिल की है। चीन की अर्थव्यवस्था जापान, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम और भारत की पूरी अर्थव्यवस्था से बड़ी है। न सीमा शुल्क मूल नियमों के प्रशासन में उनके निर्माण से लेकर उनके कार्यान्वयन तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चीन के कारोबारी क्षेत्र में तेजी की एक बड़ी वजह कस्टम सुधार का भी बड़ा योगदान है। व्यापार और सीमा शुल्क सुधार पर नज़र रखने वाले जानकारों के मुताबिक, चीन ने हाल के वर्षों में नई योजनाएं बनाईं। जैसे “मूल प्रमाणपत्रों का स्वयं मुद्रण”, इलेक्ट्रॉनिक मूल डेटा एक्सचेंज सिस्टम (ईओडीईएस) और “इंटेलिजेंस परीक्षण” जैसी योजनाओं के जरिए चीन से निर्यात होने वाले उत्पादों को वैश्विक बाजार के लिए सुलभ बनाने की कोशिश की है। 

सबसे पहले चीन के कस्टम विभाग ने “स्मार्ट कस्टम्स, स्मार्ट बॉर्डर्स और स्मार्ट कनेक्टिविटी” यानी थ्री एस की पद्धति लागू की। जिसके जरिए सीमा शुल्क नियंत्रण, शासन और सहयोग के लिए आधुनिक और सहज समाधान की दिशा में एक रोडमैप तैयार किया। जिससे चीन के निर्यात में बढ़ोतरी हुई। चीन ने मार्च 2018 से प्रवेश-निकास निरीक्षण और आपसी कारोबार सेवाओं के कार्यों और कार्यबल को चीन सीमा शुल्क में एकीकृत किया। इसी में मूल प्रमाण पत्र का प्रशासन भी शामिल किया गया।

इन दो उपायों ने चीन के सीमा शुल्क को उत्पत्ति के नियमों से जुड़ी प्रक्रियाओं की समीक्षा करने और अंततः मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और तरजीही व्यापार व्यवस्था (पीटीए) के कार्यान्वयन में सुधार को बढ़ावा दिया। 

चीन में तीन प्रकार के मूल प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं: गैर-तरजीही, तरजीही और विशेष। प्रमाणपत्र की इस अंतिम श्रेणी का उपयोग उन विशेष उत्पादों और उद्योगों के लिए किया जाता है, जिनके लिए आयातक देश में मूल आवश्यकताओं के विशिष्ट नियम लागू होते हैं। इसके तहत निर्यातक अपना आवेदन के प्रमाण पत्र की दस्तावेजी प्रति या इलेक्ट्रॉनिक रूप में, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सिंगल विंडो सिस्टम से जुड़कर या सीमा शुल्क की वेबसाइट पर जाकर जमा कर सकते हैं। एक बार आवेदन की जांच और अनुमोदन हो जाने के बाद, चीन सीमा शुल्क निर्यातक को सूचित करता है। इसके बाद निर्यातक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए चीन परिषद से प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। इसके बाद जारी करने की प्रक्रिया की निगरानी चीन सीमा शुल्क द्वारा की जाती है। अधिसूचना प्राप्त होने पर, निर्यातकों के पास दो विकल्प होते हैं: वे सीमा शुल्क विभाग से उन्हें प्रमाणपत्र की मूल प्रति मांग सकते हैं, जिस पर मैन्युअल हस्ताक्षर और क्षेत्रीय सीमा शुल्क कार्यालय की मुहर होती है। इसके लिए निर्यातक वैकल्पिक रूप से, “स्वयं-मुद्रण सेवा” का उपयोग कर सकता है और खुद अपना प्रमाणपत्र प्रिंट कर सकता है, जिस पर चीन के सीमा शुल्क विभाग के प्राधिकारी की इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर और मुहर होती है। दस्तावेज़ का प्रभाव सीमा शुल्क अधिकारी द्वारा मैन्युअल रूप से हस्ताक्षरित और मुद्रांकित प्रमाण पत्र के समान होता है। सिर्फ पहली प्रति ही प्रमाण के रूप में मानी जाती है। दूसरी प्रति को सिर्फ कॉपी माना जाता है। स्व-मुद्रण सेवा का उपयोग करने के लिए स्व-मुद्रित प्रमाणपत्रों का आयातक देश में मान्यता प्राप्त होना आवश्यक है। 

चीन के कस्टम विभाग का सर्च इंजन निर्धारित मानकों के हिसाब से निर्यातक के आंकड़ों का विश्लेषण करता है और उसकी घोषणाओं को वर्गीकृत करता है। कम जोखिम के रूप में पहचाने गए लेन-देन को बिना किसी और निरीक्षण (ग्रीन चैनल) के जारी कर दिया जाता है, जबकि उच्च जोखिम यानी लाल चैनल वाले लेन-देन की गहन जांच की जाती है। इसके लिए आयातक या उसके प्रतिनिधि को मूल प्रमाणपत्र की हार्ड कॉपी या अतिरिक्त जानकारी प्रदान करने की आवश्यकता हो सकती है। इस दस्तावेज़ की जाँच के बाद माल का भौतिक निरीक्षण किया जा सकता है। नियंत्रण के दौरान, सीमा शुल्क माल की प्रकृति और आयातक द्वारा प्रदान किए गए दस्तावेजों की प्रामाणिकता दोनों पर ध्यान केंद्रित करता है।  वर्तमान में मौजूद प्रक्रिया में दो मुख्य मुद्दे हैं। पहला यह है कि किसी अन्य क्षेत्राधिकार यानी निर्यातक देश में स्थित पार्टियों और अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत मूल के दस्तावेजी प्रमाण की स्कैन प्रतियों की प्रामाणिकता की जांच करना बोझिल प्रक्रिया है। दूसरा यह है कि यह कि उसे प्रस्तुत होने के साथ ही नहीं किया जा सकता है। इन मुद्दों को हल करने के लिए, चीन सीमा शुल्क ने इलेक्ट्रॉनिक ओरिजिन डेटा एक्सचेंज सिस्टम यानी (EODES) विकसित किया है। यह चीन के साथ एफटीए/पीटीए पर हस्ताक्षर करने वाले 11 साझेदारों में चीन सीमा शुल्क और नामित प्रशासन को वरीयता दावे के तहत अपने संबंधित देश से आयात या निर्यात किए जाने वाले सामान के मूल के प्रमाण पर इलेक्ट्रॉनिक डेटा का आदान-प्रदान करने में सक्षम बनाता है। आयातकों और निर्यातकों को प्रमाणपत्र या अन्य दस्तावेजी साक्ष्य जमा करने और आदान-प्रदान करने की आवश्यकता नहीं है; इसके बजाय, उन्हें बस अपनी घोषणा पर प्रमाणपत्र संख्या बताने की आवश्यकता होती है।

चीन के कस्टम विभाग ने निर्यात करने वाले आवेदकों के दस्तावेजों की जांच तेज करने और उनमें होने वाली धोखाधड़ी को पकड़ने के लिए अगस्त 2020 में “इंटेलिजेंट एग्जामिनेशन” नामक एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। इसका उद्देश्य एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रणाली बनाना था, जो अपने एल्गोरिदम को संशोधित कर सकता है और तब तक के इनपुट और आंकड़ों के जवाब में नया एल्गोरिदम विकसित कर सकता है। यह तकनीक दिसंबर 2020 से उपयोग में है और मूल प्रमाणन के लिए 4.6 मिलियन से अधिक अनुरोधों के सुरक्षित प्रसंस्करण के लिए इसका उपयोग पहले ही किया जा चुका है। एआई प्रणाली को अभी भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके डेवलपर्स को उम्मीद है कि यह एक धोखाधड़ी विश्लेषक की विचार प्रक्रियाओं की नकल करने और नए धोखाधड़ी पैटर्न सामने आने पर उनका पता लगाने और उन्हें अपनाने में सक्षम होगा।

(लेखक—उमेश चतुर्वेदी, वरिष्ठ भारतीय पत्रकार)

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