Site icon Dainik Savera Times

नेपाल बाढ़ से मरने वालों की संख्या 600 से ज्यादा हुई, भारत ने भेजी 10 टन अतिरिक्त राहत सामग्री

nepal floods

नई दिल्लीः नेपाल और तिब्बत में भारी बारिश और बाढ़ के बाद हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं। कई इलाकों में लोग लापता हैं और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। दूसरी ओर, तिब्बत में भूस्खलन के कारण बनी झील का पानी फिर से बढ़ने लगा है, जिससे एक और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, तिब्बत में भूस्खलन के मलबे से बनी एक झील में पानी का स्तर दोबारा बढ़ रहा है। इससे आसपास के इलाकों में खतरा बढ़ गया है। अधिकारियों को डर है कि पानी का दबाव बढ़ने से फिर से जमीन खिसक सकती है या मलबा नीचे की ओर आ सकता है। इसलिए इलाके में लगातार निगरानी की जा रही है।

ग्यारोंग पोर्ट के पास ड्रोन से निगरानी
नेपाल और तिब्बत के बीच एक प्रमुख जमीन सीमा क्षेत्र ग्यारोंग पोर्ट के आसपास बचाव कार्य चल रहा है। यहां बचाव दल ने सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं। ढलानों और आसपास के इलाकों पर नजर रखने के लिए ड्रोन लगाए गए हैं। इसके साथ ही निगरानी चौकियां भी बनाई गई हैं। इनका उद्देश्य जमीन खिसकने के संकेतों को समय रहते पहचानना है, ताकि वहां काम कर रहे बचावकर्मियों को तुरंत चेतावनी दी जा सके।

नेपाल में मौतों के आंकड़े को लेकर अलग-अलग जानकारी
नेपाल में बाढ़ और आपदा के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। बीबीसी की एक रिपोर्ट में स्थानीय पुलिस के हवाले से बताया गया कि मृतकों की संख्या बढ़कर 626 हो गई थी। इससे पहले 579 लोगों की मौत की जानकारी दी गई थी। हालांकि, बाद में सुबह 10 बजे से पहले दिए गए एक अपडेट में नेपाल पुलिस ने मृतकों की संख्या 616 बताई। यानी अलग-अलग समय पर जारी किए गए आंकड़ों में अंतर है। नेपाल में अभी भी करीब 2,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इसलिए मृतकों की संख्या आगे और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

तिब्बत में भी लोगों की मौत
चीन के सरकारी मीडिया ने इससे पहले तिब्बत में भूस्खलन और संबंधित आपदा के कारण 7 लोगों की मौत की पुष्टि की थी। अगर नेपाल और तिब्बत के आंकड़ों में किसी व्यक्ति की गिनती दो बार नहीं हुई है, तो दोनों जगहों को मिलाकर मृतकों की संख्या कम से कम 623 हो सकती है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़े बदल रहे हैं, इसलिए अंतिम संख्या अभी स्पष्ट नहीं है।

खराब मौसम के बीच बचाव अभियान जारी
आपदा प्रभावित इलाकों में मौसम में बदलाव के बावजूद बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं। टीमें मलबे और प्रभावित क्षेत्रों में बचे हुए लोगों की तलाश कर रही हैं। बचावकर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खराब मौसम, भूस्खलन का खतरा और कई जगहों पर रास्तों का बंद होना है। इन परिस्थितियों के कारण राहत और बचाव कार्य में मुश्किलें आ रही हैं।

सड़कों को फिर से खोलने की कोशिश
बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई सड़कें प्रभावित हुई हैं। प्रशासन और बचाव दल बंद रास्तों को दोबारा खोलने का काम भी कर रहे हैं, ताकि राहत सामग्री और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच सकें। सड़कें खुलने से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सामान पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

अंतरराष्ट्रीय मदद भी तेज
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद करीब 2,000 लोगों के लापता होने की खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियां और कई देशों की सरकारें राहत कार्यों में मदद कर रही हैं। आपदा प्रभावित लोगों तक भोजन, पानी, चिकित्सा सहायता और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। बचाव दलों का मुख्य उद्देश्य लापता लोगों को ढूंढना और प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित जगहों तक पहुंचाना है। वहीं, वायुसेना का एक C-130J विमान प्रभावित परिवारों के लिए दवाएं और भोजन जैसी 10 टन आवश्यक जीवन रक्षक राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंच चुका है।

नेपाल और तिब्बत में राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन कई इलाकों में खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। तिब्बत में भूस्खलन से बनी झील का बढ़ता पानी और दोबारा जमीन खिसकने की आशंका चिंता का कारण बनी हुई है।

वहीं नेपाल में बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण बचाव अभियान बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है। आने वाले समय में मौसम और जमीन की स्थिति के आधार पर हालात में बदलाव हो सकता है।

 

Exit mobile version