5 जून को दक्षिण चीन के हाईनान प्रांत के सान्या शहर में चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के चीनी भाषा विभाग द्वारा “ज्वार और आवाजें” विषय पर एक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सीएमजी की “दक्षिण चीन सागर अनुसंधान विशेषज्ञ समिति” से जुड़े चीनी और विदेशी विशेषज्ञों ने दक्षिण चीन सागर के शासन, सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति बनाने, बाहरी हस्तक्षेप समाप्त करने, दक्षिण चीन सागर में शांति बनाए रखने और क्षेत्रीय समृद्धि को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
हाल ही में आयोजित शांगरी-ला संवाद में फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में तथाकथित “दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता निर्णय” का हवाला देते हुए चीन पर आरोप लगाए और दक्षिण चीन सागर मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। इस पर शांगहाई अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान के उपाध्यक्ष ली खाइशंग ने कहा कि फिलीपींस द्वारा अवैध और अमान्य “दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता निर्णय” को “दक्षिण चीन सागर आचार संहिता” के ढांचे में शामिल करने का प्रयास विफल होने के बाद, कुछ फिलीपीनी राजनेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उकसावे वाली बयानबाजी करते हुए खुले तौर पर “आचार संहिता” संबंधी परामर्शों का विरोध किया।
उनके अनुसार, इस प्रकार के विरोधाभासी बयान न केवल क्षेत्रीय सहयोग की सहमति को कमजोर करते हैं, बल्कि दक्षिण चीन सागर में अव्यवस्था फैलाने की फिलीपींस की मंशा को भी उजागर करते हैं। वहीं, चीनी सामाजिक विज्ञान अकादमी के शांति और विकास संस्थान के शोधकर्ता यांग श्याओ ने कहा कि फिलीपींस के कुछ सैन्य राजनेताओं ने शांगरी-ला संवाद को एक “हास्यास्पद तमाशे” में बदल दिया। उनका कहना था कि आसियान के घूर्णनशील अध्यक्ष देश के रूप में फिलीपींस को आम सहमति बनाने और “आचार संहिता” पर बातचीत को आगे बढ़ाने में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन उसके अवसरवादी और अस्थिर रवैये ने उसकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है और क्षेत्रीय मामलों में आसियान की भूमिका को भी कमजोर किया है।
कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि दक्षिण चीन सागर की स्थिति फिलहाल सामान्य रूप से स्थिर है, लेकिन बाहरी शक्तियों का हस्तक्षेप अब भी क्षेत्रीय सुरक्षा जोखिमों का प्रमुख कारण बना हुआ है। विशेषज्ञों ने कहा कि कुछ बाहरी शक्तियों द्वारा हाल के समय में उठाए गए सैन्य और सुरक्षा संबंधी कदम तथा फिलीपींस के साथ उनकी बढ़ती सैन्य मिलीभगत, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर रही है। उन्होंने क्षेत्रीय देशों से सतर्क रहने की अपील भी की।
हालांकि दक्षिण चीन सागर की स्थिति में समय-समय पर उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, फिर भी शांति, सहयोग और मित्रता इस क्षेत्र की मुख्य धारा बनी हुई है। कार्यक्रम में “इस सागर में, हम साथ मिलकर मछली पकड़ते हैं” शीर्षक एक शॉर्ट वीडियो भी दिखाया गया। इसमें चीन और इंडोनेशिया के बीच समुद्री मत्स्य पालन सहयोग की जीवंत कहानी प्रस्तुत की गई, जिसने उपस्थित मेहमानों और दर्शकों को काफी प्रभावित किया।
यांग श्याओ ने यह भी कहा कि जहां कुछ बाहरी देश संघर्ष और टकराव को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं, वहीं चीन क्षेत्रीय देशों के साथ व्यावहारिक सहयोग को लगातार मजबूत कर रहा है। उनके अनुसार, विकास के माध्यम से सुरक्षा को बढ़ावा देने की यह नीति दक्षिण चीन सागर की स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। बताया गया कि “ज्वार और आवाजें” विषय पर आयोजित इस चर्चा कार्यक्रम को चाइना मीडिया ग्रुप की “दक्षिण चीन सागर अनुसंधान विशेषज्ञ समिति” का अकादमिक समर्थन प्राप्त था। कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्रीय सहमति को मजबूत करने, समुद्री मतभेदों को उचित तरीके से संभालने और शांतिपूर्ण विकास को आगे बढ़ाने के लिए मीडिया तथा बुद्धिजीवियों के संसाधनों को एक मंच पर लाना है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

