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डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बोला तीखा हमला, कहा- होर्मुज स्ट्रेट के जरिए नहीं कर सकता “ब्लैकमेल”

Donald Trump

इंटरनेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं। जिस होर्मुज स्ट्रेट को लेकर शुक्रवार को राहत की खबर आई थी, शनिवार ये तस्वीर पूरी तरह बदल गई। ईरान के अचानक यू-टर्न और समुद्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

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इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अब वह होर्मुज स्ट्रेट के जरिए अमेरिका या दुनिया को “ब्लैकमेल” नहीं कर सकता। उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमता और नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान दशकों से क्षेत्र में अस्थिरता फैलाता रहा है, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने यह भी दोहराया कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं होता, अमेरिकी नौसेना की सख्ती और निगरानी जारी रहेगी।

24 घंटे में बदला ईरान का रुख

विवाद तब और गहरा गया जब ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के सिर्फ 24 घंटे बाद ही फिर से सख्त नियंत्रण लागू कर दिया। शुक्रवार को ईरान ने घोषणा की थी कि यह जलमार्ग कमर्शियल जहाजों के लिए खुला रहेगा। इसके बाद कई टैंकर, जिनमें कुछ पहले से प्रतिबंधित जहाज भी शामिल थे, इस रास्ते से गुजरने लगे। करीब आठ से अधिक जहाजों की आवाजाही से लगा कि हालात सामान्य हो रहे हैं। लेकिन शनिवार को अचानक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने फिर से अपनी पकड़ मजबूत कर ली और आवाजाही पर सख्ती बढ़ा दी। हालात तब और गंभीर हो गए जब रिपोर्ट्स में सामने आया कि ईरानी गनबोट्स ने ओमान के पास एक कमर्शियल टैंकर पर फायरिंग की। हालांकि जहाज और क्रू सुरक्षित रहे, लेकिन यह घटना स्थिति की नाजुकता को साफ दिखाती है।

सबसे चिंताजनक बात यह रही कि भारतीय जहाज भी इस तनाव की चपेट में आ गए। समुद्री ट्रैकिंग रिपोर्ट्स के अनुसार, दो भारतीय जहाजों जिनमें एक बड़ा सुपरटैंकर भी शामिल था को फायरिंग के बाद वापस लौटना पड़ा। बताया जा रहा है कि यह जहाज भारी मात्रा में तेल लेकर जा रहा था।

भारत और दुनिया पर असर

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव सीधे तौर पर तेल की कीमतों और सप्लाई को प्रभावित कर सकता है। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करते हैं, इस स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। अगर तनाव जारी रहता है, तो इसका असर आम लोगों तक महंगाई के रूप में पहुंच सकता है।

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