इंटरनेशनल डेस्क: Donald Trump ने अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। अपने 2026 के स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण में उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बढ़ता तनाव अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। ट्रंप ने दावा किया कि पिछली अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से तेहरान की क्षमताएं काफी कमजोर हुई हैं और अमेरिका किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
भाषण के दौरान ट्रंप ने 2025 में ईरानी परमाणु ठिकानों पर किए गए अमेरिकी हवाई हमले का जिक्र किया, जिसे ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ नाम दिया गया था। उनके मुताबिक, अगर यह ऑपरेशन नहीं किया जाता तो ईरान आतंकवाद को बढ़ावा देता रहता। ट्रंप ने कहा कि उस कार्रवाई से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को गंभीर नुकसान पहुंचा। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका ने एक ‘रेड लाइन’ तय कर दी है और ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान लंबी दूरी की मिसाइल तकनीक विकसित कर रहा है। उनके अनुसार, ईरान ऐसी मिसाइलें बना चुका है, जो यूरोप और विदेशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए खतरा बन सकती हैं। साथ ही वह ऐसी मिसाइलें बनाने की कोशिश कर रहा है, जो भविष्य में सीधे अमेरिका तक पहुंच सकें।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के भीतर ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। कुछ मीडिया संस्थानों ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि ईरान के खिलाफ ऑपरेशन वेनेजुएला की तरह आसान नहीं होगा। बताया जा रहा है कि ईरान में किसी भी बड़े अभियान के लिए एक से अधिक सैन्य हमलों की जरूरत पड़ सकती है, जिससे मध्य पूर्व में लंबे समय तक सैन्य मौजूदगी बनानी पड़ सकती है।
इसी बीच अमेरिकी एफ-22 लड़ाकू विमान इजरायल के एक एयरबेस पर तैनात किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि, पेंटागन के कुछ अधिकारियों ने ऐसे किसी बड़े सैन्य अभियान पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि इससे अमेरिकी सैनिकों की जान जोखिम में पड़ सकती है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने ईरान के साथ पूर्ण युद्ध के विचार का समर्थन नहीं किया है।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि अमेरिका ईरान पर बड़ा हमला करेगा या नहीं। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप अभी इस बात पर अंतिम निर्णय नहीं ले पाए हैं कि वे ईरान के साथ नई डील करना चाहते हैं, सरकार पर दबाव बनाने के लिए सीमित कार्रवाई करेंगे या फिर लंबा सैन्य अभियान छेड़ेंगे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
कुल मिलाकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। हालांकि आगे क्या कदम उठाया जाएगा, यह पूरी तरह से व्हाइट हाउस के फैसले पर निर्भर करेगा। दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में अमेरिका की रणनीति क्या होगी और इससे मध्य पूर्व की स्थिति पर क्या असर पड़ेगा।
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