वॉशिंगटन: अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा ऐलान किया है जिसने खासकर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स में चिंता की लहर दौड़ा दी है। ट्रंप ने H-1B वीजा के लिए नए नियमों का प्रस्ताव रखा है, जिसमें अमेरिकी कंपनियों को हर H-1B आवेदन पर 1 लाख डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) की भारी-भरकम फीस चुकानी होगी।
हालांकि, यह चार्ज एक वन-टाइम फीस होगा, न कि हर साल लिया जाने वाला टैक्स इस बात की पुष्टि व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने की है। लेकिन इसके बावजूद इसका असर काफी गहरा और दूरगामी माना जा रहा है।
क्या है H-1B वीजा और क्यों है भारतीयों के लिए अहम?
H-1B वीजा अमेरिका का एक गैर-स्थायी (Non-Immigrant) वीजा है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मेडिकल, फाइनेंस और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में विदेशी प्रोफेशनल्स को हायर कर सकती हैं।
इस वीजा की सबसे ज्यादा मांग आईटी और टेक सेक्टर में होती है और भारतीय पेशेवरों का इसमें दबदबा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, FY 2024 में H-1B वीजा पाने वालों में लगभग 71% भारतीय थे। यानि अगर 4 लाख वीजा जारी हुए, तो उनमें से लगभग 3 लाख भारतीयों को मिले।
Infosys, TCS, Google, Amazon, Microsoft और Meta जैसी दिग्गज कंपनियों में भारतीय इंजीनियर्स और डेवलपर्स की संख्या हजारों में है, और वे अधिकतर H-1B वीजा पर ही अमेरिका में काम कर रहे हैं।
क्या कहता है नया नियम?
राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से लाए गए इस नए प्रस्ताव में कहा गया है कि:
अमेरिकी कंपनियों को हर नए H-1B वीजा एप्लिकेशन पर $100,000 की फीस देनी होगी।
यह फीस वीजा रिन्यूअल के केस में भी लागू होगी।
जब तक कंपनी यह शुल्क अदा नहीं करती, कर्मचारी को अमेरिका में एंट्री नहीं मिल सकेगी।
हालांकि इस बीच ट्रंप की टीम से मिल रहे विरोधाभासी बयानों के कारण कंफ्यूजन की स्थिति बनी हुई है क्योंकि अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने कहा कि यह चार्ज एनुअल फीस होगा, जबकि व्हाइट हाउस की ओर से इसे सिर्फ एक बार लिया जाने वाला शुल्क बताया गया।
भारत पर असर: क्यों बढ़ी चिंता?
भारत के लिहाज से यह फैसला एक तगड़ा झटका है। न केवल इसलिए कि वीजा धारकों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है, बल्कि इसलिए भी क्योंकि अगर कंपनियों के लिए इतनी महंगी फीस दे पाना मुश्किल हुआ, तो भारतीय प्रोफेशनल्स की हायरिंग पर ब्रेक लग सकता है।
इसका सीधा असर होगा:
नई भर्तियों में गिरावट
वर्तमान कर्मचारियों के वीजा रिन्यूअल में देरी
छंटनी या विदेश भेजे जाने की संभावनाएं
अमेरिकी टेक कंपनियां पहले ही लागत में कटौती के चलते हजारों लोगों की छंटनी कर चुकी हैं, ऐसे में यह अतिरिक्त बोझ उन्हें भारतीय टैलेंट से दूरी बनाने पर मजबूर कर सकता है।
एयरपोर्ट्स पर अफरातफरी, टिकटों के दाम दोगुने
नए प्रस्ताव के ऐलान के बाद एक और बड़ी हलचल देखी गई। कई भारतीय वीजा धारक, जो छुट्टियों के बाद अमेरिका लौटने की तैयारी में थे, अचानक से एयरपोर्ट्स पर पहुंचने लगे।
सैन फ्रांसिस्को क्रॉनिकल के अनुसार, कुछ यात्रियों ने डर के चलते अपनी उड़ानें तक कैंसल कर दीं, क्योंकि उन्हें यकीन नहीं था कि वे अमेरिका में दोबारा एंट्री पा सकेंगे या नहीं।
ट्रैवल इंडस्ट्री में भी इसका सीधा असर दिखा दिल्ली से न्यूयॉर्क की फ्लाइट की कीमतें महज 2 घंटे में ₹37,000 से बढ़कर ₹80,000 तक पहुंच गईं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह प्रस्ताव यदि लागू होता है, तो यह न केवल भारतीयों के लिए मुश्किलें खड़ी करेगा बल्कि खुद अमेरिका की टेक इंडस्ट्री के लिए भी घाटे का सौदा साबित हो सकता है। “भारत की तकनीकी प्रतिभा अमेरिकी टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने में अहम रोल निभा रही है। अगर कंपनियां इन पर निर्भर नहीं रहेंगी, तो उनका ग्रोथ भी प्रभावित हो सकता है,” अमेरिका में स्थित एक इमिग्रेशन लॉ फर्म के पार्टनर का ऐसा कहना है।

