इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई लगातार जारी है और ईरान भी इसका जवाब दे रहा है। बीती रात ईरान की राजधानी तेहरान में मिसाइलों और बम धमाकों की तेज आवाजें सुनी गईं। बताया जा रहा है कि इस तरह का हमला ईरान ने पहले कभी नहीं देखा था। रविवार को भी कई शहरों में हमले जारी रहे, जिससे हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि ईरान ने पहले से ज्यादा ताकतवर हमला करने की बात कही है, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका अब तक का सबसे बड़ा और घातक जवाब देगा। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान को ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए, वरना परिणाम गंभीर होंगे।

इजरायल ने ईरान पर अपने हमलों को ‘लायन रोर’ नाम दिया है, जबकि अमेरिका ने अपने अभियान को ‘एपिक फ्यूरी’ कहा है। दूसरी तरफ ईरान ने जवाबी कार्रवाई को ‘खत्म-ए-तूफान’ नाम दिया है। तीनों देशों के बीच इस टकराव ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान के अलावा कौम, खोर्रमाबाद और इस्फहान जैसे ईरानी शहरों को निशाना बनाया गया। इजरायल के शहर हाइफा का भी जिक्र सामने आया है। ईरान सरकार के कुछ अहम दफ्तरों पर भी हमले की खबर है। इसके जवाब में ईरान ने उन देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जहां अमेरिका के सैन्य अड्डे हैं। इनमें कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान की आधिकारिक जानकारी अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि खामेनेई एक दृढ़ और वफादार नेता थे और ईरान उनके बताए रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ेगा। गालिबाफ ने अमेरिका और इजरायल पर ‘रेड लाइन’ पार करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उनका कहना है कि ईरानी सेना ने इजरायली ठिकानों और अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया है और यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
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