वाशिंगटनः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और रूस को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। आपको बता दें कि ट्रंप ने दावा किया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। ट्रंप ने इस कदम को मॉस्को पर दबाव बढ़ाने और रूस को यूक्रेन युद्ध के चलते आर्थिक रूप से कमजोर करने की दिशा में एक “महत्वपूर्ण फैसला” बताया है।
ट्रंप बोले – मोदी महान शख्सियत, भारत विश्वसनीय साझेदार
बता दें कि व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “मैं खुश नहीं था कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने मुझे भरोसा दिलाया है कि भारत अब ऐसा नहीं करेगा। यह बहुत बड़ा कदम है और अब हम चीन से भी ऐसी ही उम्मीद कर रहे हैं।” ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा, “वह एक महान शख्स हैं, मेरे मित्र हैं। हमारे बीच बेहद अच्छे रिश्ते हैं। भारत अमेरिका का एक विश्वसनीय साझेदार है।”
#WATCH | Responding to ANI’s question on the meeting between US ambassador-designate Sergio Gor and PM Narendra Modi, US President Donald Trump says, “I think they were great…Modi is a great man. He (Sergio Gor) told me that he (PM Modi) loves Trump…I have watched India for… pic.twitter.com/gRHpjv2RDp
— ANI (@ANI) October 15, 2025
रूस-यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप का बयान
रूस-यूक्रेन युद्ध पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि यह जंग कभी शुरू नहीं होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा युद्ध है जिसे रूस को पहले ही हफ्ते में जीत लेना चाहिए था, लेकिन अब यह चौथे साल में प्रवेश कर रहा है। मैं चाहता हूं कि यह युद्ध जल्द खत्म हो।” ट्रंप ने कहा कि रूस को अलग-थलग करने के लिए अमेरिका लगातार प्रतिबंधों का दायरा बढ़ा रहा है और वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कोई भी देश मॉस्को को आर्थिक मदद न दे।
भारत ने पहले ही साफ किया था अपना रुख
भारत कई बार साफ कर चुका है कि रूस से तेल खरीदना उसकी ऊर्जा जरूरतों पर आधारित है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहले भी कहा था कि देश की ऊर्जा खरीद पूरी तरह राष्ट्रीय हित और बाजार की वास्तविकताओं पर निर्भर है, न कि किसी राजनीतिक दबाव पर। भारत ने यह भी कहा है कि उसका रूस से तेल आयात G7 देशों द्वारा तय मूल्य सीमा के अनुरूप है और सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए किया जाता है। भारत का तर्क है कि विकासशील देशों की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए किसी भी स्रोत से किफायती ऊर्जा खरीदना उसका अधिकार है।
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