इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि वह इस बात से सहमत नहीं हैं कि ईरान के उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम का नियंत्रण रूस या चीन जैसे देशों के पास जाए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दुनिया भर में चर्चा तेज हो गई है। रूस और चीन को लंबे समय से ईरान का करीबी सहयोगी माना जाता है।
दरअसल, परमाणु मामलों के जानकारों का मानना था कि अगर भविष्य में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच कोई समझौता होता है, तो ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को किसी तीसरे देश को सौंप सकता है। इस भूमिका के लिए रूस और चीन को सबसे मजबूत विकल्प माना जा रहा था, लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया कि उन्हें यह व्यवस्था स्वीकार नहीं है।
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डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम या तो अमेरिका को सौंपा जाना चाहिए या फिर उसे ईरान में ही नष्ट कर दिया जाना चाहिए। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसियों की देखरेख में हो सकती है, ताकि दुनिया को यह भरोसा मिल सके कि यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में नहीं होगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान का कुछ संवर्धित यूरेनियम उन परमाणु ठिकानों के नीचे दबा हो सकता है, जिन्हें पिछले साल अमेरिकी हवाई हमलों में निशाना बनाया गया था। इसी वजह से इस मुद्दे पर अमेरिका की चिंता और बढ़ गई है।
हालांकि, ट्रंप के हालिया बयान को उनके रुख में कुछ नरमी के तौर पर भी देखा जा रहा है। इससे पहले वह लगातार यह कहते रहे थे कि ईरान के यूरेनियम भंडार पर अमेरिका का सीधा नियंत्रण होना चाहिए। लेकिन अब उन्होंने संकेत दिए हैं कि अगर कोई भरोसेमंद व्यवस्था बनती है, तो यूरेनियम को किसी सुरक्षित स्थान पर नष्ट भी किया जा सकता है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देशों की चिंता लंबे समय से बनी हुई है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। वहीं ईरान लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल बिजली उत्पादन और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
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