वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक अपनी टैरिफ नीति में बदलाव करते हुए बीफ, कॉफी और उष्णकटिबंधीय फलों समेत कई अन्य आयातित उत्पादों पर अमेरिकी शुल्क हटाने की घोषणा की। यह फैसला शुक्रवार को सामने आया और इसे उनकी प्रशासन पर बढ़ते उपभोक्ता मूल्य नियंत्रण दबाव का परिणाम माना जा रहा है। डेमोक्रेट्स ने इसे अमेरिकी नागरिकों की जेब पर पड़े असर को स्वीकार करने के तौर पर देखा है।
ट्रंप ने क्यों बदली नीति
ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिकी बाजार में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए आयातित उत्पादों पर भारी शुल्क लगाया गया था। हालांकि, इस कदम के चलते उपभोक्ता कीमतों में वृद्धि हुई और मुद्रास्फीति बनी रही। हाल के चुनावों में आर्थिक चिंताओं के चलते डेमोक्रेट्स को वर्जीनिया और न्यू जर्सी समेत कई राज्यों में जीत मिली। यही दबाव ट्रंप के इस नाटकीय कदम का मुख्य कारण माना जा रहा है।
राष्ट्रपति के बयान
एयर फोर्स वन पर फ्लोरिडा की उड़ान के दौरान ट्रंप ने कहा, “हमने कुछ खाद्य वस्तुओं, जैसे कॉफी, पर टैरिफ में बदलाव किया है।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शुल्क नीति कुछ मामलों में कीमतों को प्रभावित कर सकती है, हालांकि उनका कहना था कि अधिकांश देशों ने इस बदलाव को स्वीकार कर लिया है।
आलोचना और समर्थन
डेमोक्रेट्स ने इसे अमेरिकी उपभोक्ताओं पर शुल्क के असर को मानने के रूप में देखा। वर्जीनिया के डेमोक्रेटिक सांसद डोन बेयर ने कहा कि ट्रंप आखिरकार यह मान रहे हैं कि उनकी नीति अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए महंगी साबित हो रही है। दूसरी ओर, फूड इंडस्ट्री एसोसिएशन ने इस कदम को “त्वरित राहत” के रूप में सराहा और इसे उपभोक्ताओं के लिए स्थिर कीमतों और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने वाला कदम बताया।
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आगे की रणनीति
ट्रंप प्रशासन ने यह भी बताया कि अब शुल्क की आवश्यकता कम हो गई है क्योंकि अमेरिका ने इक्वाडोर, ग्वाटेमाला, एल सल्वाडोर और अर्जेंटीना के साथ फ्रेमवर्क समझौते किए हैं। इन समझौतों से अमेरिकी फर्मों को इन देशों में उत्पाद बेचने में मदद मिलेगी और वहां उत्पादित कृषि वस्तुओं पर शुल्क कम होंगे।
टैरिफ राजस्व का उपयोग
ट्रंप ने कहा कि शुल्क से प्राप्त आय का उपयोग राष्ट्रीय ऋण चुकाने या सीधे अमेरिकी नागरिकों के लिए वित्तीय मदद प्रदान करने में किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह “असली पैसे” हैं जो विदेशों से आए हैं और इसका लाभ आम लोगों तक पहुंचेगा।

