वाशिंगटन: भारत पर अमेरिकी आयात शुल्क (टैरिफ) में 25% की भारी बढ़ोतरी की घोषणा के बाद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया है। ट्रंप ने जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना “मित्र” बताया, वहीं भारत के व्यापारिक रवैये को लेकर असंतोष भी जाहिर किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के उन देशों में से एक है जो सबसे अधिक टैरिफ लगाता है, और यह अमेरिका के लिए स्वीकार्य नहीं है।
#WATCH ANI द्वारा पूछे गए इस सवाल पर कि क्या वह टैरिफ पर भारत के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “हम अभी उनसे बात कर रहे हैं। देखते हैं क्या होता है। भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा या लगभग सबसे ज़्यादा टैरिफ लगाने वाला देश था… देखते हैं। हम… pic.twitter.com/Qbexi9j5Gm
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 31, 2025
भारत के साथ टैरिफ पर बातचीत जारी
एक प्रेस बातचीत में जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे भारत के साथ टैरिफ पर कोई समझौता करने के लिए तैयार हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, “हम इस समय भारत से बात कर रहे हैं। देखते हैं कि क्या होता है।” उन्होंने दोहराया कि अमेरिका निष्पक्ष व्यापार चाहता है, और वर्तमान में भारत का टैरिफ ढांचा असमान है। “भारत के साथ व्यापार संतुलन हमारे पक्ष में नहीं है,” ट्रंप ने कहा।
“मोदी मेरे मित्र हैं, लेकिन…”
अपने बयान में ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए उन्हें “मित्र” कहा, लेकिन साथ ही व्यापारिक संबंधों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी मेरे अच्छे मित्र हैं। लेकिन व्यापार के मोर्चे पर भारत अमेरिका से पर्याप्त व्यापार नहीं करता, क्योंकि उनके टैरिफ बहुत अधिक हैं।”
रूस से भारत की निकटता पर सवाल
ट्रंप ने भारत द्वारा रूस से तेल और सैन्य उपकरणों की खरीद पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की इस नीति से यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष समर्थन मिल रहा है। ट्रंप प्रशासन अब ऐसे देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी में है जो रूस के साथ रणनीतिक संबंध बनाए हुए हैं।
वाणिज्य मंत्रालय का जवाब
भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों देश “निष्पक्ष, संतुलित और पारस्परिक लाभकारी” व्यापार समझौते के लिए लगातार संवाद में हैं। मंत्रालय ने कहा कि भारत इस दिशा में पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी एकतरफा फैसले से बातचीत की प्रक्रिया पर असर नहीं पड़ना चाहिए।
द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य पर असर
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार को 2030 तक 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य इस टैरिफ फैसले से प्रभावित हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि टैरिफ और रूस से जुड़े मुद्दों पर समझ नहीं बन पाई, तो रणनीतिक साझेदारी भी प्रभावित हो सकती है, खासकर जब अमेरिका भारत को चीन के खिलाफ एक अहम सहयोगी मानता है।

