वॉशिंगटन: अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पाकिस्तान पर अचानक आई ‘मेहरबानी’ ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। हाल ही में ट्रंप ने पाकिस्तान पर लगाए जाने वाले टैरिफ को घटाकर महज 19% कर दिया, जो दक्षिण एशिया के देशों में सबसे कम दर है। यह फैसला ऐसे समय आया है। तेल और व्यापार समझौते के बाद जब अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते पहले से ही गर्मजोशी की ओर बढ़ रहे हैं।
दो दिन, दो इनाम: ट्रंप का पाकिस्तान प्रेम
महज 48 घंटों के भीतर ट्रंप ने पाकिस्तान को दो बड़े तोहफे दिए:
टैरिफ कटौती– पहले जहां पाकिस्तान पर 29% टैरिफ लागू था, अब उसे घटाकर सिर्फ 19% कर दिया गया है। भारत पर अभी भी 25% टैरिफ जारी है।
तेल और व्यापार डील– ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की है कि अमेरिका, पाकिस्तान में तेल खोज, भंडारण और प्रसंस्करण के क्षेत्र में निवेश करेगा। ट्रंप ने इस डील को “साउथ एशियन एनर्जी कॉरिडोर की नींव” बताया।
आखिर ट्रंप क्यों हो रहे हैं पाकिस्तान पर मेहरबान?
इस बदलाव के पीछे कुछ गहरे भू-राजनीतिक और आर्थिक समीकरण छिपे हैं:
1. भू-राजनीतिक लाभ
पाकिस्तान की सीमा अफगानिस्तान और ईरान जैसे देशों से लगती है, जहां अमेरिका की निगाहें हमेशा रही हैं। ट्रंप पाकिस्तान को एक रणनीतिक लॉजिस्टिक बेस की तरह देख रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिकी उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।
2. भारत पर परोक्ष दबाव
हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं खासकर रूस से भारत की हथियार खरीद और कृषि क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों की सीमित पहुंच जैसे मुद्दों को लेकर। पाकिस्तान के प्रति ट्रंप की उदारता भारत को ‘सिग्नल’ देने की रणनीति भी हो सकती है।
3. चीन की घेराबंदी
CPEC जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए पाकिस्तान में चीन की बढ़ती मौजूदगी अमेरिका को खटक रही है। टैरिफ राहत और निवेश के ज़रिए ट्रंप पाकिस्तान के ज़रिए BRI में चीन की पकड़ को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
4. कपड़ा निर्यात को बढ़ावा
पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र कपड़ा उद्योग है। अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बांग्लादेश, भारत और वियतनाम जैसे देशों से होती है, लेकिन उन पर ज्यादा टैरिफ के कारण पाकिस्तान को अब बड़ा फायदा मिल सकता है।
5. डिजिटल टैक्स विवाद का समाधान
पाकिस्तान द्वारा डिजिटल टैक्स हटाने के तुरंत बाद अमेरिका की ओर से यह टैरिफ छूट एक स्पष्ट जवाब माना जा रहा है। यह संकेत देता है कि ट्रंप की डिप्लोमेसी में ‘फेवर के बदले फेवर’ की नीति सक्रिय है।
6. राजनीतिक समर्थन की अहमियत
पाकिस्तान द्वारा ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करना कोई मामूली घटनाक्रम नहीं है। जब वैश्विक स्तर पर ट्रंप की आलोचना हो रही है, ऐसे में पाकिस्तान का समर्थन उन्हें राजनीतिक पूंजी के रूप में मिल सकता है।

