इंटरनेशनल डेस्क: जापान में आज एक बार फिर भूकंप के तेज झटकों ने लोगों को डर के साए में ला दिया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, शिमाने प्रांत के पूर्वी हिस्से में भूकंप दर्ज किया गया। शुरुआती आकलन में इसकी तीव्रता 6.3 बताई गई थी, हालांकि बाद में संशोधित आंकड़ों में इसे घटाकर 4.5 कर दिया गया।
एजेंसी ने स्पष्ट किया कि भूकंप का केंद्र शिमाने प्रांत के पूर्वी क्षेत्र में स्थित था और राहत की बात यह रही कि किसी भी प्रकार की सुनामी चेतावनी जारी नहीं करनी पड़ी।
तीव्रता को लेकर अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़े
जहां जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने संशोधित तीव्रता 4.5 बताई, वहीं अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के रियल-टाइम डेटा में भूकंप की तीव्रता 5.8 दर्ज की गई। स्थानीय टीवी चैनल एनएचके के अनुसार, जापान के भूकंपीय पैमाने (1 से 7) पर कुछ इलाकों में झटकों की तीव्रता 5 या उससे अधिक महसूस की गई।
भूकंप के झटकों के बाद कई इलाकों में लोग एहतियातन घरों से बाहर निकल आए, हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की सूचना नहीं मिली है।
31 दिसंबर को भी आया था शक्तिशाली भूकंप
गौरतलब है कि इससे पहले 31 दिसंबर को भी जापान के पूर्वी नोडा क्षेत्र के तट के पास 6.0 तीव्रता का भूकंप आया था। उस भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 19.3 किलोमीटर नीचे था। लगातार आ रहे झटकों ने जापान में भूकंप को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
2011 की त्रासदी की यादें अब भी ताजा
जापान में भूकंप का नाम आते ही 2011 की भयावह आपदा की यादें लोगों के जेहन में ताजा हो जाती हैं। उस साल 9.0 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप और उसके बाद आई सुनामी ने करीब 18,500 लोगों की जान ले ली थी या वे लापता हो गए थे।
नानकाई ट्रफ को लेकर बढ़ी वैज्ञानिकों की चिंता
हाल ही में अगस्त 2024 में जापान ने नानकाई ट्रफ क्षेत्र को लेकर पहली बार विशेष चेतावनी जारी की थी। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस लगभग 800 किलोमीटर लंबी समुद्री खाई में यदि महा-भूकंप आता है, तो इससे करीब 2.98 लाख लोगों की जान जा सकती है और देश को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है जापान
जापान प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियां अत्यधिक सक्रिय रहती हैं। यह देश चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के संगम पर बसा हुआ है। लगभग 12.5 करोड़ की आबादी वाले जापान में हर साल औसतन 1,500 से अधिक छोटे-बड़े भूकंप दर्ज किए जाते हैं।

