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EMERGENCY 1975: जब एक जंग की वजह से हिल गई थी इंदिरा गांधी की कुर्सी, जानें वो किस्सा

June 25, 2025

EMERGENCY 1975: जब एक जंग की वजह से हिल गई थी इंदिरा गांधी की कुर्सी, जानें वो किस्सा

इंटरनेशनल डेस्क : भारत में इमरजेंसी के 50 साल पूरे हो चुके हैं। यह वो दौर था, जिसको याद करके आज भी लोग सिहर उठते हैं। 25 जून 1975 को भारत में इमरजेंसी का ऐलान किया गया था। इसे काला अध्याय माना जाता है, जिसने भारत की राजनीति, संविधान और समाज की आत्मा को झकझोर दिया था। आखिर वे कौन से हालात थे, जिन्होंने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को देश में इमरजेंसी लागू करने के लिए मजबूर किया था? विस्तार से इस बारे में बात करते हैं।

तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी की कुर्सी 1970 के दशक की शुरुआत के साथ ही डगमगाने लगी थी। इमरजेंसी की पटकथा की शुरुआत 1973 से हुई थी। इस दौरान इजरायल और अरब देशों के बीच जंग शुरू हो चुकी थी। इस युद्ध का सीधा असर भारत पर पड़ा। दुनियाभर में तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं।

1974 में गुजरात से शुरू हुआ आंदोलन

भारत को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए तेल की अधिक मात्रा में जरूरत थी। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होने के कारण भारत पर आर्थिक संकट मंडराने लगा था। महंगाई लगातार बेकाबू होती जा रही थी। बसों का किराया, पेट्रोल, बिजली के अलावा रोजमर्रा की चीजें आसमान छूने लगी थीं।

1974 में गुजरात के अहमदाबाद में छात्रों ने आंदोलन शुरू कर दिया था। यह आंदोलन महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ था, जिसकी वजह से पूरे राज्य में फैल गया। गुजरात के तत्कालीन सीएम चिमनभाई पटेल ने इसकी वजह से रिजाइन कर दिया था। 18 मार्च 1974 को बिहार की राजधानी पटना में भी ऐसा आंदोलन शुरू हो गया। यह आंदोलन हिंसक हो गया और कई छात्र घायल हो गए थे।

हाई कोर्ट ने चुनाव को ठहराया था अवैध

जनाक्रोश व्यापक हो गया और जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने 5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान से ‘संपूर्ण क्रांति’ का नारा दिया। देखते ही देखते यह आंदोलन सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन में बदल गया। आंदोलन का समर्थन लगभग हर वर्ग ने किया। इसी दौरान 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इंदिरा गांधी के चुनाव को अयोग्य ठहरा दिया।

साथ ही उनके 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी। इंदिरा गांधी को अपनी कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा था। जेपी ने सेना और पुलिस से उनके आदेशों का पालन न करने की अपील कर दी। इसके बाद इंदिरा गांधी ने 25 जून की रात को राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से इमरजेंसी लगवाने की घोषणा करवा दी थी।

 

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