Energy Conference : भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच जोहानिसबर्ग में आयोजित पहला ऊर्जा सम्मेलन बृहस्पतिवार को संपन्न हो गया, जिसमें दोनों देशों के बीच भविष्य के ऊर्जा पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के लिए एक समझौता हुआ।
आयोजकों ने दो दिवसीय सम्मेलन को अत्यंत सफल बताया। ‘मतला-ऊर्जा एनर्जी कॉन्फ्रेंस’ (सेसोथो भाषा में ‘मतला’ का अर्थ होता है ‘शक्ति’) नामक इस सम्मेलन में 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने ऊर्जा क्षेत्र में अपने विचार साझा किए।
बृहस्पतिवार शाम समापन रात्रिभोज में कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए महावाणिज्य दूत महेश कुमार ने सम्मेलन की कुछ सफलताओं पर प्रकाश डाला। कुमार ने कहा, ‘‘हम भारतीय व्यवसायों और शिक्षा जगत तथा दक्षिण अफ्रीका के उनके समकक्षों के सर्वश्रेष्ठ लोगों को एक साथ लाए हैं।
भारतीय और दक्षिण अफ्रीकी शिक्षाविद एवं शोधकर्ता शैक्षणिक विद्युत क्षेत्र सुधारों, विद्युत के भविष्य, ऊर्जा मॉडलिंग, मूल्य निर्धारण तथा इसके सामाजिक-आर्थिक पहलुओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक साथ आए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद, बृहस्पतिवार को हमने व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा को आगे बढ़ाया कि व्यवसाय इन मुद्दों को लेकर कैसा दृष्टिकोण रखता है।’’ राजनायिक ने कहा, ‘‘यह उन विशाल अवसरों को दर्शाता है जो विद्युत क्षेत्र में सभी के लिए मौजूद हैं। हमारे दृष्टिकोण से, ये दो दिवसीय वार्ता बहुत सफल रही।’’
विट्स बिजनेस स्कूल के प्रमुख प्रोफेसर मौरिस राडेबे ने कहा कि सम्मेलन से प्रतिनिधियों को गरीबी और भुखमरी को कम करने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र के रणनीतिक विकास लक्षय़ों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।

