Last Updated: October 4, 2026

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महिलाओं को सशक्त करना हर देश का फर्ज है

October 22, 2025

महिलाओं को सशक्त करना हर देश का फर्ज है

इंटरनेशनल डेस्क: 1995 में पेइचिंग ने विश्व महिला सम्मेलन की मेजबानी की थी जहां 189 देशों ने पेइचिंग घोषणा और एक्शन प्लेटफॉर्म को अपनाया। ये दस्तावेज महिलाओं की बराबरी, विकास और शांति के लिए एक रोडमैप बन गए। अब 30 साल बाद पेइचिंग ने एक बार फिर से इतिहास रच दिया। 13-14 अक्टूबर 2025 को ग्लोबल लीडर्स मीटिंग ऑन विमेन का आयोजन हुआ जिसे चीन और यूएन वुमन ने मिलकर होस्ट किया। ये चीन का दूसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय महिला सम्मेलन था जिसका मकसद था पेइचिंग घोषणा को नई सदी की चुनौतियों के बीच मजबूत करना।

जुटे दर्जनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष

चाइना नेशनल कन्वेंशन सेंटर में दर्जनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री, मंत्री और यूएन के बड़े अधिकारी जमा हुए। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने उद्घाटन भाषण में जोर देकर कहा कि महिलाओं को राजनीति और सरकार में ज्यादा जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने चार बड़े प्रस्ताव रखे: सहमति बढ़ाना, ठोस कदम उठाना और महिलाओं का सर्वांगीण विकास तेज करना। आइसलैंड की राष्ट्रपति हल्ला टोमासडॉटिर और घाना के राष्ट्रपति जॉन द्रामानी महामा ने चीन की तारीफ की। यूएन वुमन की डायरेक्टर सिमा सामी बाहौस ने कहा कि ये पेइचिंग घोषणा का 30वां साल है और ये समिट हमें और आगे ले जाएगा।

चीन का बड़ा ऐलान

चीन ने सिर्फ बातें नहीं कीं बल्कि ठोस कदमों का ऐलान भी किया। शी चिनफिंग ने अगले पांच सालों के लिए यूएन वुमन को 10 मिलियन डॉलर का ग्रांट देने की घोषणा की। ग्लोबल डेवलपमेंट फंड में 100 मिलियन डॉलर सिर्फ महिलाओं और लड़कियों के लिए रखे जाएंगे। 1000 छोटे-मोटे आजीविका प्रोग्राम चलाएंगे। जिसमें महिलाओं को प्राथमिकता मिलेगी। इसके अलावा 50,000 महिलाओं को ट्रेनिंग के लिए चीन बुलाया जाएगा। चाइना विमेंस यूनिवर्सिटी में ग्लोबल सेंटर फॉर विमेंस कैपेसिटी बिल्डिंग भी शुरू हो चुका है। कंबोडिया की महिला मामलों की मंत्री इंग कान्था फावी ने कहा कि चीन ने ग्लोबल साउथ की 200,000 से ज्यादा महिलाओं को ट्रेनिंग दी है। ये समिट नई ऊर्जा लाएगी।

चुनौतियां अभी बाकी हैं

दुनिया में महिलाओं की स्थिति अभी भी आसान नहीं है। करीब 10% महिलाएं अत्यधिक गरीबी में जी रही हैं।600 मिलियन से ज्यादा युद्धग्रस्त इलाकों में फंसी हैं जहां स्वास्थ्य,शिक्षा और न्याय तक पहुंच मुश्किल है। जेंडर डिजिटल डिवाइड बढ़ रहा है, और हिंसा व भेदभाव खत्म नहीं हुआ। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में एक चीनी फेमिनिस्ट एक्टिविस्ट ने कहा कि चीन ने शिक्षा में 50% और नौकरियों में 43% जगह महिलाओं को दी।

उम्मीद की किरण

इस समिट ने उम्मीद की किरण दिखाई। चेयर स्टेटमेंट में कहा गया कि जेंडर बराबरी के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, निवेश और सहयोग जरूरी है। ये यूएन 2030 एजेंडे को गति देगा। रॉयटर्स और साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट्स बताती हैं कि चीन ने समय समय पर पूरी दुनिया में अपनी ताकत दिखाई है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि पेइचिंग से नई शुरुआत हो रही है जो महिलाओं के लिए नया चैप्टर खोलेगी।

आधी आबादी,आधा आसमान

2025 का ग्लोबल विमेंस समिट एक मील का पत्थर साबित हुआ।1995 की तरह ये दिखाता है कि महिलाओं की ताकत दुनिया बदल सकती है, लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब ये वादे हकीकत बनेंगे। महिलाओं को सशक्त करना हर देश का फर्ज है आखिर वो आधी आबादी हैं।

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(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— डी के)

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