New Development Bank : हाल ही में नव विकास बैंक की महानिदेशक डिल्मा रुसेफ ने शांगहाई में स्थित मुख्यालय में सीएमजी को एक विशेष साक्षात्कार दिया। उन्होंने बताया कि नव विकास बैंक ब्रिक्स देशों के सहयोग तंत्र की एक प्रतीकात्मक उपलब्धि बन गया है। पहुपक्षीय सहयोग विश्व के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी प्रतीक्षा है कि बहुपक्षीय व्यवस्था और अधिक सहयोग पर आधारित नया विश्व स्थापित होगा।
ध्यान रहे इस अप्रैल के अंत में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने नव विकास बैंक की यात्रा की। इस यात्रा की चर्चा में रुसेफ ने कहा कि हम ने नव विकास बैंक के अगले दस साल के विकास पर विचार किया। इसके साथ राष्ट्रपति शी ने हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सुझाव पेश किया। उन्होंने कहा कि नव विकास बैंक को प्रारंभिक आकांक्षा का पालन कर वैश्विक दक्षिण देशों की सेवा में संलग्न रहना खासकर ब्रिक्स देशों के निवेश व विकास की सेवा करनी चाहिए। इसके साथ नव विकास बैंक को विकासशील देशों खासकर नवोदित आर्थिक समुदायों के लिए कुंजीभूत क्षेत्रों पर फोकस रखना चाहिए। वार्ता में हमने वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति में मौजूद चुनौतियों पर भी विचार किया।
रुसेफ ने बताया कि नव विकास बैंक की स्थापना का स्पष्ट लक्ष्य है यानी बुनियादी संस्थापन, सतत् विकास और नवोदित बाजार तथा विकासशील देशों के ऊर्जा परिवर्तन के लिए वित्त पोषण करना। इसके अलावा ब्रिक्स देशों के गुणवत्ता विकास के लिए पूंजी प्रदान करना है। नये विकास बैंक की एक अहम विशेषता है कि सभी सदस्य देश समानता के आधार पर भाग लेते हैं और वीटो व्यवस्था मौजूद नहीं है। नव विकास बैंक ब्रिक्स देशों की भावना और विभिन्न सदस्य देशों के नेताओं का दृष्टिकोण दिखाता है। अब तक हम ने करीब 120 परियोजनाओं की पुष्टि की है,जिन की कुल रकम 40 अरब अमेरिकी डॉलर है।
रुसेफ ने कहा कि नये विकास बैंक के सदस्यों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। पाँच स्थापना देशों को छोड़कर मिश्र, बांग्लादेश और यूएई भी इसके सदस्य हैं। हम अधिक सदस्य स्वीकार करेंगे, जिनमें अल्जीरिया और उरुग्वे शामिल हैं। अब हमें 17 नये सदस्यों के भाग लेने का प्रस्ताव मिला है।
विश्व में चल रहे व्यापार युद्ध के बारे में रुसेफ ने कहा कि यह व्यापार युद्ध शायद अमेरिका की सबसे बड़ी गलती है। मेरी नजर में अमेरिका का लक्ष्य पूरा नहीं होगा। इसके विपरीत वे खुद को नुकसान पहुंचा रहे हैं। दूसरी ओर अमेरिकी चालू खाते में घाटा की समस्या यानी व्यापार घाटा शुल्क से पैदा नहीं हुआ। अमेरिका प्रभुत्व-मुद्रा का नियंत्रक है। इसी कारण सवाल पैदा हुआ है। उन्होंने बल दिया कि हमें जंगल कानून को अंतर्राष्ट्रीय सम्बंध का मापदंड अपनाने का विरोध करना है। वैश्विक दक्षिण देशों को सहयोग मजबूत कर समान हितों की सुरक्षा करने और समान विकास का रास्ता निर्मित करने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)