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शीत्सांग रेलवे के साथ-साथ आधुनिक व सामंजस्यपूर्ण शीत्सांग का अनुभव हासिल करें

पेइचिंग समयानुसार 27 जून को, चीन के शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश के प्रचार विभाग और चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के एशिया-अफ्रीका भाषा कार्यक्रम केंद्र द्वारा सह-आयोजित “ चाइना वॉक : आधुनिकीकरण की ओर- शीत्सांग की यात्रा China Walk:Towards Modernization·Xizang Tour)” कार्यक्रम का उद्घाटन समारोह शीत्सांग के ल्हासा में आयोजित हुआ। भारत, बांग्लादेश, नेपाल, कंबोडिया, मंगोलिया और अन्य देशों के प्रमुख मीडिया के प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया और आधुनिक व सामंजस्यपूर्ण शीत्सांग का व्यक्तिगत रूप से अनुभव किया। उस दिन की दोपहर, ये विदेशी मीडिया प्रतिनिधि ल्हासा रेलवे स्टेशन पर आये और ल्हासा-शिगात्से रेलवे पर चलने वाली फुक्सिंग ईएमयू में सवार हुए।

चीन रेलवे छिंगहाई-शीत्सांग (तिब्बत) कंपनी के शिनिंग इंजीनियरिंग निर्माण कमांड के सुरक्षा व गुणवत्ता विभाग के निदेशक जेन जीवेन ने इन विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों को शित्सांग रेलवे के निर्माण विकास, पारिस्थितिकी व पर्यावरण संरक्षण अभ्यास और फ़ूक्सिंग अधिक-ऊंचाई ईएमयू की नवीन तकनीकों का परिचय दिया। जेन जीवन के मुताबिक़, 1 जुलाई 2006 को, छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे को यातायात के लिए खोला गया, जिससे शीत्सांग में रेलवे न होने का इतिहास खत्म हो गया। 16 अगस्त 2014 को, छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे के विस्तार लाइन ल्हासा-न्यिंगची रेलवे को परिचालन में लाया गया।

25 जून 2021 को, शीत्सांग की पहली विद्युतीकृत रेलवे ल्हासा-न्यिंगची रेलवे को यातायात के लिए खोला गया और फ़ूक्सिंग ईएमयू ट्रेन छिंगहाई-शीत्सांग पठार पर संचालित हुई। अब तक, ल्हासा, शान्नान, नाछु, शिगात्से और न्यिंगची ने ट्रंक रेलवे कनेक्शन हासिल कर लिया है। पूरे शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश में रेलवे परिचालन माइलेज 1,187.8 किमी. तक पहुंच चुका है। छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे, ल्हासा-शिगात्से रेलवे और ल्हासा-न्यिंगची रेलवे मिलकर शीत्सांग में “वाई” आकार के रेलवे का मुख्य ढांचा बनाते हैं, जिससे लोगों की यात्रा में काफी सुविधा होती है। इस रेलमार्ग पर आर्थिक व सामाजिक विकास को बढ़ाया गया है और इस पठार का एक सुंदर परिदृश्य बना है।

छिंगहाई-शीत्सांग पठार के विशेष वातावरण को ध्यान में रखते हुए, फ़ूक्सिंग अधिक-ऊंचाई वाले इलेक्ट्रिक दोहरे स्रोत ईएमयू को सफलतापूर्वक विकसित किया गया। यह मॉडल विशेष रूप से छिंगहाई-शीत्सांग पठार के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो बिजली व आंतरिक दहन शक्ति के बीच स्वतंत्र रूप से स्विच कर सकता है। इससे ईएमयू ऊर्जा की खपत (बिजली और ईंधन की खपत) कम हो सकती है। साथ ही इस ट्रेन के सभी गाड़ियां के यूवी संरक्षण प्रदर्शन में सुधार कर सकता है। यह ट्रेन ऑक्सीजन की आपूर्ति का अहसास करता है, आराम के स्तर में सुधार करता है और 60 डेसिबल से नीचे इस ट्रेन में शोर को नियंत्रित करने के लिए उन्नत ध्वनि इन्सुलेशन तकनीक का उपयोग किया जाता है।

चीन रेलवे छिंगहाई-शीत्सांग कंपनी के रसद केंद्र के उप प्रभारी 42 वर्षीय डुओ जी शिगात्से में जिलोंग बंदरगाह से हैं। उन्होंने शीत्सांग में परिवहन व रसद के विकास में जबरदस्त बदलावों को व्यक्तिगत रूप से देखा है। वर्ष 2002 में, जब वे विश्वविद्यालय में थे, तो उन्होंने जिलोंग से शुरुआत की, पहले घोड़े पर सवार हुए, फिर कार ली और इसके बाद ट्रेन। उन्हें उत्तर-पश्चिमी चीन के कानसु प्रांत के लान्चो पहुंचने में सात दिन लगे थे। वहीं, ल्हासा से जिलोंग वापस आने में कम से कम तीन दिन की ज़रूरत होती थी। अगर सड़क भारी बर्फ से अवरुद्ध हो जाती थी, तो उन्हें यात्रा में एक सप्ताह तक का समय लगता था। वर्ष 2006 में छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे को यातायात के लिए खोले जाने के बाद, लान्चो से ल्हासा की यात्रा का समय लगभग 20 घंटे रह गया है। वर्तमान में, ल्हासा से शिगात्से तक ईएमयू से यात्रा करने में केवल लगभग 2 घंटे का समय लगता है। काम में शामिल होने के बाद, डुओ जी ने शीत्सांग के रेलवे रसद के तेजी से विकास में व्यक्तिगत रूप से भाग लिया है।

उन्होंने विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों को ल्हासा रेलवे स्टेशन के ज़रिए ल्हासा शहर को “विस्तार” किये जाने और शीत्सांग में माल यार्ड सुविधाओं के आधुनिकीकरण की कहानी से परिचित कराया। चीन रेलवे छिंगहाई-शीत्सांग कंपनी के गोलमुद लोकोमोटिव भाग के प्रशिक्षक चालक सिलांग वांगजा का जन्म शीत्सांग के कामदो शहर के लुओलोंग काउंटी में एक साधारण किसान व चरवाहे परिवार में हुआ था। अगस्त 2007 में, सिलांग वांगजा एक रेलवे कर्मचारी बने। पिछले 18 वर्षों में, उनके करियर की दिशा पश्चिमी चीन में रेलवे नेटवर्क के विकास के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है। जिस वर्ष उन्होंने स्कूल से स्नातक किया, छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे उसी वक्त बनकर तैयार हुआ था और एक साल के लिए यातायात के लिए खोला गया था। रेलगाड़ी चालक बनने के बाद, उनके दिल में एक सपना था, उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में रेलगाड़ी उनके गृहनगर तक चल सकेगी।

तब से उनकी इच्छा धीरे-धीरे हकीकत में बदलती रही है। शीत्सांग ने छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे, ल्हासा-शिगात्से रेलवे और ल्हासा-न्यिंगची रेलवे का क्रमिक रूप से निर्माण किया है। उन्होंने इन तीनों रेलवे पर लोकोमोटिव क्रू का काम भी किया है, जिसमें डोंगफेंग प्रकार डीजल लोकोमोटिव, सीआरएच और फ़क्सिंग इलेक्ट्रिक डुअल-सोर्स ईएमयू आदि विभिन्न प्रकार के लोकोमोटिव चलाए हैं। सिलांग वांगजा ने कहा कि इन लोकोमोटिव के प्रतिस्थापन और शीत्सांग रेलवे के जोरदार विकास ने न केवल चीन की रेलवे प्रौद्योगिकी की छलांग को प्रदर्शित किया, बल्कि उनके करियर के विकास व परिवर्तन के हर कदम को भी देखा।

अभी तक, सिलांग वांगजा ने 3,296 बार सुरक्षित रूप से ड्राइविंग की है, जिसकी कुल माइलेज 7,80,000 किलोमीटर है। यह पृथ्वी के चारों ओर 19.67 चक्करों के बराबर है। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि 25 जून वर्ष 2021 को शीत्सांग में पहली विद्युतीकृत रेलवे, ल्हासा-न्यिंगची रेलवे को चालू किया गया और फ़क्सिंग ईएमयू पहली बार इस पठार पर चली। सिलांग वांगजा फ़ूक्सिंग ईएमयू के लिये चालकों के पहले बैच में भाग लिया। उन्होंने इस ऐतिहासिक क्षण में गवाह किया और भाग लिया। वह अपने गृहनगर के लोगों का गौरव भी बने हैं। उन्हें अपने गृहनगर के पर्यटन प्रचार के लिए छवि प्रवक्ता के रूप में अनुशंसित किया गया। ल्हासा से शिगात्से तक फुक्सिंग ईएमयू की ट्रेन कंडक्टर टान जेन ने ल्हासा से शिगात्से तक इस रेलवे पर यात्री प्रवाह का परिचय दिया।

साथ ही, यात्रियों को दैनिक सेवा के दृष्टिकोण से, उन्होंने परिचालन की शुरुआत के बाद से शीत्सांग में स्थानीय लोगों के जीवन में आए बदलावों के बारे में भी बात की। इसके अलावा, इस ट्रेन के कर्मचारियों ने सभी अतिथियों के लिए तिब्बती गीत और नृत्य आदि अद्भुत प्रदर्शन पेश किए। नेपाल, कंबोडिया और भारत के मीडिया प्रतिनिधियों ने भी इस ईएमयू की रेलगाड़ी में पर्यटकों को डेयरी उत्पाद, याक गुड़िया आदि शीत्सांग को विशेष उत्पाद बेचने के लिए ट्रेन सेल्समैन होने का अनुभव किया। विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों ने कहा कि वे शीत्सांग रेलवे का व्यक्तिगत रूप से अनुभव करके सुखद आश्चर्यचकित हैं। आशा है कि उनके देश चीन के साथ सहयोग को बढ़ावा दे सकेंगे और मानव साझा भविष्य वाले समुदाय को साकार करने में संयुक्त प्रयास करेंगे।

भारतीय चैनल हिंदी ख़बर के प्रबंध निदेशक एवं प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल ने कहा कि चीन के शीत्सांग आने पर प्रदूषण रहित वातावरण और आधुनिक सुविधाओं को देखकर उनके दिमाग़ के पुर्जे हिल चुके हैं। उन्होंने चीन के मानव और प्रकृति के बीच सामंजस्यपूर्ण विकास की सराहना की। उन्होंने कहा कि चीन उच्च गुणवत्ता वाले विकास को बहुत महत्व देता है। चीनी शैली का आधुनिकीकरण न केवल चीनी लोगों के लिए बेहतर जीवन लाता है, बल्कि दुनिया के अन्य देशों के लिए अत्यधिक व्यवहार्य विकास अनुभव और समाधान भी प्रदान करता है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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