Last Updated: October 2, 2026

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भारतीय विमान हादसे के क्या रहे कारण, विशेषज्ञ लगा रहे कयास

June 14, 2025

भारतीय विमान हादसे के क्या रहे कारण, विशेषज्ञ लगा रहे कयास

भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात के अहमदाबाद में एयर इंडिया के विमान एआई-171 के हादसे के बाद देशभर में शोक की लहर है।  यह विमान हादसा बारह जून को भारतीय समय के अनुसार एक बजकर 39 मिनट पर हुआ था। इस हादसे की जांच भारत का विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो कर रहा है। इस जांच में मदद के लिए ब्रिटेन की एयर एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्रांच यानी एएआईबी और अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड यानी एनटीएसबी भी कर रही है।  

इस बीच अमेरिकी के संघीय उड्डयन प्रशासन यानी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने एक बयान जारी किया है। जिसके मुताबिक, वह जांच के लिए एनटीएसबी के संपर्क में है। यहां बताना जरूरी है कि अमेरिका में हवाई यात्रा के नियमों के पालन और सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिकी सरकार की संस्था फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के पास है। एफएए के मुताबिक, हवाई यात्रा से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की जांच वही करती है। विदेशी सरकारें और संस्थान ऐसी स्थिति में सहायता मांगते हैं तो वह उनकी मदद भी करती है। वहीं एनटीएसबी आधिकारिक तौर पर अमेरिका की प्रतिनिधि संस्था है और वह एफएए तकनीकी मदद देती है। एफएए का कहना है कि भारतीय विमान हादसे की जांच के लिए वह एनटीएसबी के संयोजन से जांच टीम बनाने की तैयारी में हैं।

सवाल यह उठ सकता है कि भारत में हुए विमान हादसे की जांच ब्रिटिश संस्था एएआईबी क्यों ले रही है? दरअसल इस हादसे में ब्रिटेन के 53 नागरिक मारे गए हैं। इसलिए वह इस जांच में शामिल हो रही है। इस जांच में अमेरिका के शामिल होने की वजह यह है कि जिस बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान का हादसा हुआ है, उसका निर्माण अमेरिकी कंपनी बोइंग करती है। कुछ साल पहले अमेरिका ने अपने यहां उड़ रहे सभी ड्रीमलाइनर की उड़ान रद्द करके उनकी तकनीकी जांच कराई थी। 

इस बीच भारत में हादसे के कारणों को लेकर खूब चर्चा हो रही है। एक पूर्व भारतीय पायलट अहसान खालिद का कहना है कि विमान 600 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था, फिर भी उसका लैंडिंग गियर नीचे था। खालिद का करहना है कि जैसे ही विमान उड़ान भरता है, लैंडिंग गियर उठा दिया जाता है। खालिद के अनुसार, ऐसा लगता है कि विमान के पायलटों को इंजन में खराबी का पता चल गया था,इसीलिए लैंडिंग गियर नीचे था। वैसे हादसे के वीडियो से भी पता चलता है कि विमान उड़ते हुए नीचे भी आया। 

खालिद का कहना है कि हो सकता है कि विमान में पावर की कमी हो गई हो। जिसकी वजह इंजन की खराबी हो सकती है। वैसे ऐसा कभी नहीं देखा गया कि विमान के दोनों इंजन एक-साथ खराब हों। लेकिन जिस तरह से हादसा हुआ है, उससे लगता है कि विमान के दोनों इंजनों में खराबी आ गई थी और उन्होंने काम करना बंद कर दिया था। 

भारतीय मीडिया के बड़े हिस्से में अमेरिकी एयरोस्पेस सुरक्षा सलाहकार एंथनी ब्रिकहाउस का भी बयान छपा है। उन्होंने भी खालिद जैसी ही चिंता जताई है। उनका कहना है कि उड़ान के वक्त लैंडिंग गियर का होना सामान्य बात नहीं है। ब्रिकहाउस का मानना है कि पायलटों को गड़बड़ी का पता चल गया था। 

इस बीच भारतीय जांचकर्ताओं का ध्यान दूसरे कारणों की ओर भी जा रहा है। जांच टीम से जुड़े एक सदस्य का कहना है कि विमान जब उड़ता है तो उसमें ईंधन के रूप एक हिस्सा फ्यूल और तीन हिस्सा हवा काम करता है। चूंकि हादसे के वक्त अहमदाबाद का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस था, इसलिए हो सकता है कि फ्यूल और हवा का अनुपात बिगड़ गया हो। क्योंकि तेज गर्मियों में कई बार ऐसा होने की आशंका रहती है। तब हवा का घनत्व कम हो जाता है और वह फैलने लगती है। इससे फ्यूल इंजन को जरूरी पावर आपूर्ति नहीं कर पाता। इसे समझने के लिए जानकारों कहना है कि उदाहरण के तौर पर अगर किसी दिन शहर का तापमान 30 डिग्री है और फ्यूल से इंजन को 100 यूनिट ऊर्जा मिल रही है, लेकिन वही तापमान अगर अहमदाबाद जैसा हो जाएगा तो ऐसी हालत में इंजन को महज 60 यूनिट ही ऊर्जा ही मिल पाएगी। जानकारों को लगता है कि यह भी एक कारण हो सकता है, जिसकी वजह से विमान पर इंजन कंट्रोल नहीं कर पाया हो। 

एक और अमेरिकी विमान सुरक्षा विशेषज्ञ और शिकागो में क्लिफोर्ड लॉ ऑफिस के संस्थापक रॉबर्ट ए क्लिफोर्ड का कहना है कि उपलब्ध वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी की समीक्षा से साफ है कि विमान में ऊर्जा या उड़ान नियंत्रण की कमी थी। भारत के जांचकर्ताओं के पास फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर की जानकारी आ चुकी है, उसके विश्लेषण के बाद इस मार्मिक और दर्दनाक हादसे की तह तक पहुंचना आसान होगा। क्लिफोर्ड छह साल पहले इथियोपिया में हुए बोइँ 737 मैक्स 8 दुर्घटना में मुख्य वकील रह चुके हैं। 

जांच के जो नतीजे निकलेंगे, उससे निश्चित तौर पर भारत समेत दुनिया को भविष्य में हादसों को रोकने के सबक मिलेंगे। इसके लिए कोशिशें जारी हैं। तब तक स्तब्ध भारत इन नतीजों का इंतजार करता रहेगा।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)

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