
वॉशिंगटन: अमेरिका में कोविड-19 वैक्सीनेशन नीति को लेकर एक नया मोड़ सामने आया है। नोवावैक्स की पारंपरिक प्रोटीन-आधारित कोविड-19 वैक्सीन पर अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा संभावित नए क्लीनिकल ट्रायल की मांग ने स्वास्थ्य क्षेत्र में हलचल मचा दी है। माना जा रहा है कि यह फैसला ट्रंप प्रशासन के नियामक दृष्टिकोण का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव अन्य वैक्सीन निर्माताओं पर भी पड़ सकता है।
-वैक्सीन को जल्दी ही मिलेगी मंजूरी
नोवावैक्स ने हाल ही में बताया कि FDA ने उन्हें सूचित किया है कि यदि उनकी वैक्सीन को पूर्ण अनुमोदन मिलता है, तो उसके बाद एक अतिरिक्त क्लीनिकल परीक्षण जरूरी होगा। कंपनी ने इस निर्देश पर अपनी प्रतिक्रिया भेज दी है और उसे उम्मीद है कि वैक्सीन को जल्दी ही मंजूरी मिल जाएगी।
-FDA के आयुक्त मार्टी मकारी ने दी जानकारी
हालांकि FDA के आयुक्त मार्टी मकारी ने सोशल मीडिया पर जो संकेत दिए हैं, वे ज्यादा चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वैक्सीन का वार्षिक स्ट्रेन अपडेट किया जाता है, तो उसे बाजार में लाने से पहले फिर से परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है। यह प्रक्रिया साल के अंत से पहले पूरी नहीं हो पाएगी, जिससे वैक्सीन की उपलब्धता और उपयोग पर असर पड़ सकता है।
-विशेषज्ञों का मानना है कि
यदि नोवावैक्स पर यह नीति लागू होती है, तो फाइजर और मॉडर्ना जैसे अन्य वैक्सीन निर्माताओं को भी इसी तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे टीकाकरण कार्यक्रम की गति और लचीलापन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या FDA इस नियम को सभी टीकों पर समान रूप से लागू करेगा, या नोवावैक्स के मामले में कोई विशेष विचार किया जा रहा है। जो भी हो, यह घटनाक्रम आने वाले महीनों में अमेरिका की वैक्सीन नीति को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
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