Last Updated: September 28, 2026

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पाकिस्तान-तालिबान सीमा पर भड़की भीषण जंग, दोनों तरफ से हुई भयंकर गोलीबारी

October 15, 2025

पाकिस्तान-तालिबान सीमा पर भड़की भीषण जंग, दोनों तरफ से हुई भयंकर गोलीबारी

इंटरनेशनल डेस्क: पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच सीमा पर विवाद फिर से तेज हो गया है। बता दें कि बीती रात को कुर्रम जिले के सुदूर उत्तर-पश्चिमी इलाकों में पाकिस्तानी सैनिकों और तालिबानी लड़ाकों के बीच भारी गोलीबारी हुई, जिसमें दोनों तरफ से जबरदस्त जवाबी कार्रवाई दर्ज की गई। पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि अफगान तालिबान और फितना अल-खवारिज की ओर से बिना किसी उकसावे के हमला किया गया, जिसके खिलाफ सेना ने पूरी ताकत से जवाब दिया।

इस जवाबी कार्रवाई में अफगानिस्तान की टैंकों और सैन्य चौकियों को भी नुकसान पहुंचा है। अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत के पुलिस उप प्रवक्ता ताहिर अहरार ने इस झड़प की पुष्टि की है, हालांकि उन्होंने घटना के विस्तार में जानकारी साझा नहीं की। हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच सीमा के विभिन्न हिस्सों में कई बार गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।

पिछली झड़पें और सीमा सुरक्षा

पिछले सप्ताह भी पाकिस्तान और तालिबान के बीच शनिवार और रविवार को कई बार सीमा पर गोलीबारी हुई थी, जिससे दोनों ओर दर्जनों लोग घायल और मारे गए। इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान की सेना ने सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी है। सऊदी अरब और कतर की मध्यस्थता के कारण रविवार को थोड़ी देर के लिए संघर्ष रुका था, लेकिन फिर से दोनों पक्षों के बीच लड़ाई शुरू हो गई। इस तनाव के चलते पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सभी सीमाएं फिलहाल पूरी तरह बंद हैं।

एयर स्ट्राइक के बाद बढ़ा तनाव

इन झड़पों का एक बड़ा कारण हाल ही में पाकिस्तान वायु सेना द्वारा अफगानिस्तान में किए गए हवाई हमले भी माने जा रहे हैं। यह हमला तब किया गया जब तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी भारत दौरे पर थे, जिससे क्षेत्रीय राजनीति और अधिक जटिल हो गई है।

डूरंड रेखा विवाद और सीमा संघर्ष की जड़ें

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवादित डूरंड रेखा, जो करीब 2500 किलोमीटर लंबी है, इस सीमा संघर्ष की मुख्य वजह बनी हुई है। यह रेखा 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच बनी थी, लेकिन अफगानिस्तान इसे कभी वैध सीमा नहीं मानता। अफगानिस्तान का दावा है कि यह समझौता ब्रिटिश औपनिवेशिक दबाव में हुआ था और यह पश्तून जनजातियों को दो हिस्सों में बांटती है, जो दोनों देशों में निवास करते हैं।

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