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AI 171 की आखरी उड़ान

इंटरनेशनल डेस्क। 12 जून 2025 एक आम दिन की तरह ही था जब तक एक विनाशकारी, दुखद, और अप्रिय घटना नहीं घटी थी। दोपहर आते आते ये ख़बर आई कि भारत के अहमदाबाद में एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है अभी आंशिक ख़बर ही थी मगर दिल की धड़कन बढ़ गई थी और मन में कई सवाल कौंधने लगे थे कि वाक़ई ऐसा हुआ है? और अगर हुआ है तो कितना विनाशकारी हुआ होगा.. यही सोचते सोचते मैं दुर्घटना की पुष्टि करने के लिए अपने कंप्यूटर पर तेज़ी से उंगलिया चलाने लगा था साथ ही टेलीविज़न पर न्यूज़ चैनल का प्रसारण भी देख रहा था और कुछ ही देर में यह स्पष्ट हो गया कि यह दुखद घटना सच में घटित हो गई है। ईश्वर से सभी मुसाफ़िरों के लिए प्रार्थना करते हुए अपने काम पर ध्यान रखना था। तुरंत अहमदाबाद के लिए रवाना होते हुए मन व्यथित था पर पत्रकार होने के नाते यही तो अपना काम है किसी भी घटना को जल्द से जल्द, सही तरीक़े से आप तक पहुँचा सकू।

भाग्यवश शाम को 06:10 मिनट की फ्लाइट में दिल्ली से अहमदाबाद की टिकट मिल गई, तकरीबन 07:45 पर अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचते ही दुर्घटना स्थल की तरफ़ रुख़ किया जल्द ही दुर्घटना स्थल के नज़दीक हमे पुलिस ने आगे जाने से रोक दिया, फिर गाड़ी छोड़कर पैदल ही बाक़ी का रास्ता तय किया। दुर्घटना स्थल के नज़दीक आते ही जलने की तेज दुर्गंध ने साँस लेना भारी कर दिया, लेकिन आगे जाना भी ज़रूरी था। यूँ तो मैंने अपने 20 वर्षों के पत्रकारिता जीवन में कई दुर्घटनाएं कवर की मगर यकीन मानिए यहाँ का मंज़र बेहद डरावना और दुखद था। पत्रकार होने के नाते सबसे पहले कुछ चित्रों को अपने कैमरे में फ़िल्माया, फिर दुर्घटना की भयावहता और नुक़सान की जानकारी इकट्ठा की और कैमरे के सामने आकर उसे बया किया। मौक़े का दौरा करते समय मैंने देखा कि कई जगह पर अभी भी छुटपुट आग लगी हुई है, जिसे दमकल कर्मियों द्वारा बुझाया जा रहा था। दरअसल, यह विमान अहमदाबाद एयरपोर्ट के पास बीजे मेडिकल कॉलेज हॉस्टल की इमारत से टकराकर क्रैश हुआ था। इस विमान में 242 लोग सवार थे जिनमें से कई लोगों की मौत हो गई थी।

बिल्डिंगों पर धुंए के काले-काले निशान थे। सड़के सुन-सान पड़ी थीं, जिससे अभी भी उस हादसे की दहशत दिखाई दे रही थी, वहीं रोड पर पुलिस और अन्य फोर्स भी भारी तादात में नजर आ रही थी। इस विमान दुर्घटना की भयावहता इस बात से ज़ाहिर थी कि दुर्घटना स्थल के आसपास रहने वाले जानवरो यानी कुत्तो तक को अपनी जान बचाने का मौका नहीं मिला था। घटनास्थल का मंज़र बहुत ही भयावह था चारों तरफ़ विमान का मलबा बिखरा पड़ा था, कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर ये विमान का कौन सा हिस्सा है। कुछ ही दूरी पर रेसिडेंट डॉक्टर और स्टूडेंट्स का मेस था जहाँ हादसे के वक्त कई लोग दिन का खाना खा रहे थे लेकिन दुर्घटना वश कई लोग या तो मारे गए या गंभीर रूप से घायल हो गए। हॉस्टल की बिल्डिंग में मौजूद लोगो को भी नुकसान पहुंचा और वहाँ पर हर तरफ़ समान बिखरा पड़ा था। विमान की पिछला हिस्सा बिल्डिग की छत पर गिरा हुआ था, जिसे क्रेन की सहायता से निकाला जा रहा था।

तुरंत सब कुछ अपने कैमरे में फिल्माने के बाद मैं नज़दीक ही सिविल अस्पताल पहुंचा जहाँ मृतकों और घायलों को भर्ती किया गया था। घायलों से मिलने की अनुमति नहीं थी लेकिन पोस्टमार्टम रूम के बाहर परिजनों का ताँता लगा हुआ था जो अपनों की तलाश में भटकते नज़र आए। कुछ परिजनों से बात की किसी ने अपने पिता को, किसी ने अपने भाई को, किसी ने अपने बच्चों को इस विमान हादसे में खो दिया, अपनों की ज़िंदा रहने की उम्मीद में परिजन इधर उधर भटकते नजर आए। देर रात तक साफ़ हो चला था कि विमान में सवार 242 यात्रियों और क्रू मेंबर्स में से केवल एक यात्री चमत्कारिक रूप से सुरक्षित है पर बाक़ी लोगो की मौत हो चुकी है। देर रात तक काम करने फिल्माने के बाद सुबह फिर से घटना स्थल पर पहुंचा और देखा यहां मलबा साफ़ करने का काम चल रहा है और साथ ही कई शव बरामद किए जा रहें हैं। आगे की जानकारी के लिए फिर से सिविल अस्पताल पहुंचा और यात्रियों के शवों की पहचान के लिए आए परिजनों से उनके DNA सैंपल लिए जा रहे थे। कई परिजनों से बात हुई सभी बहुत दुखी थे, रोते रोते अपना सैंपल दे रहे थे। थोड़े देर बाद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना स्थल और अस्पताल का दौरा किया घायलों से मिले उन्हें हौसला दिया, मृतकों के परिजनों से मुलाक़ात कर उन्हें सांत्वना दी। 13 जून का पूरा दिन घटना स्थल, सिविल अस्पताल और दूसरी जगहों पर ख़बर करते हुए बीता।

इस तरह का एक और हादसा मैं पहले भी देख चुका हूँ जब 2 जून को 2023 को उड़ीसा के बालासोर में ट्रेन दुर्घटना हुई थी जिसमे लगभग 296 लोग अपनी जान से हाथ गवाँ बैठे थे और लगभग 1200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इंसानी जीवन में यात्रा का अपना अलग महत्व है, लेकिन कोई यात्रा कब आख़िरी यात्रा बन जाये ये कोई नहीं कह सकता। जैसा AI 171 के साथ हुआ। इस दुर्घटना में मारने वाले लोगो को मेरी ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)  (लेखक—देवेंद्र सिंह)

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