21 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में कहा कि चीन बड़ी संख्या में पवन टरबाइन का उत्पादन करता है, लेकिन उन्हें चीन में कोई पवन ऊर्जा संयंत्र नहीं मिला। हाल ही में, कई विदेशी मीडिया संस्थानों ने इन टिप्पणियों की पुष्टि और स्पष्टीकरण किया है।
यूरोन्यूज़ और द गार्जियन की वेबसाइटों पर प्रकाशित लेखों में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान तथ्यों से पूरी तरह मेल नहीं खाता। चीन के पास विश्व की सबसे बड़ी स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता है, और उसके निर्माणाधीन पवन और सौर ऊर्जा परियोजनाएं अन्य सभी देशों और क्षेत्रों की कुल परियोजनाओं से दोगुनी हैं।
लेख में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में चीन वैश्विक स्तर पर अग्रणी है। वैश्विक ऊर्जा थिंक टैंक एम्बर के आंकड़ों का हवाला देते हुए इसमें कहा गया है कि 2024 में वैश्विक पवन ऊर्जा उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी 40% थी। अप्रैल 2025 में चीन के कुल बिजली उत्पादन में पवन और सौर ऊर्जा का अनुपात रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया।
ऑस्ट्रेलियाई वेबसाइट “रिन्यू इकोनॉमी” पर प्रकाशित एक लेख में बताया गया है कि चीन की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता अमेरिका सहित 18 अन्य वैश्विक बाजारों की संयुक्त क्षमता से अधिक है। लेख में प्रसिद्ध ऊर्जा विश्लेषक जेरार्ड रीड के हवाले से यह भी कहा गया है कि नवीकरणीय ऊर्जा, विशेष रूप से पवन ऊर्जा, के “स्पष्ट” आर्थिक लाभ हैं और यह दुनिया को जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित कर रही है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

