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‘हमारे ऊर्जा फैसले हमेशा राष्ट्रीय हित के आधार पर होंगे’, रूसी तेल आयात पर विदेश सचिव का बयान

Foreign Secretary's statement on Russian oil imports

Foreign Secretary's statement on Russian oil imports

नई दिल्ली: रूस से तेल आयात में कटौती की खबरों के बीच, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने साफ कहा है कि भारत के ऊर्जा से जुड़े सभी फैसले राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर ही लिए जाएंगे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत की ऊर्जा नीति का मुख्य आधार तेल और गैस की पर्याप्त उपलब्धता, सही कीमत और सप्लाई की भरोसेमंद व्यवस्था है।

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विदेश मंत्रालय ने ब्रीफिंग में क्या कहा?

सोमवार को विदेश मंत्रालय की एक विशेष ब्रीफिंग में बोलते हुए मिसरी ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में फैसले सरकार ही नहीं, बल्कि तेल कंपनियां भी बाज़ार की स्थितियों को देखकर लेती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेल की वास्तविक खरीद कंपनियों द्वारा की जाती है, जिनमें कई बातों को ध्यान में रखा जाता है। विदेश सचिव ने बताया कि तेल कंपनियां खरीद से पहले तेल की उपलब्धता, कीमत, जोखिम, परिवहन व्यवस्था (लॉजिस्टिक्स) और अन्य व्यावसायिक पहलुओं का आकलन करती हैं। इसके साथ ही वे अपनी आंतरिक जवाबदेही और नियमों का पालन करती हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी बातों को मिलाकर ही खरीद का फैसला किया जाता है।

राष्ट्रीय हित ही हमेशा सबसे ऊपर रहेगा

मिसरी ने यह भी कहा कि चाहे फैसले सरकार ले या निजी कंपनियां, राष्ट्रीय हित ही हमेशा सबसे ऊपर रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सेक्टर में जो भी बदलाव दिखते हैं, वे ज़्यादातर बिज़नेस और बाज़ार से जुड़े फैसलों का नतीजा होते हैं। उन्होंने बताया कि भारत तेल और गैस के मामले में एक नेट आयातक देश है, यानी भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा बाहर से मंगाता है। भारत एक विकासशील अर्थव्यवस्था है और अपनी लगभग 80 से 85 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतें आयात पर निर्भर करता है। ऐसे में तेल के आयात की कीमतें बढ़ने से देश में महंगाई पर असर पड़ सकता है। विदेश सचिव ने कहा कि इसी वजह से सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि भारतीय उपभोक्ताओं को महंगे तेल के बोझ से बचाया जाए और उन्हें सही दाम पर ऊर्जा उपलब्ध कराई जाए।

वैश्विक ऊर्जा बाजारों की अनिश्चितता  पर क्या बोले मिसरी 

वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में चल रही अनिश्चितता पर बात करते हुए मिसरी ने कहा कि हाल के वर्षों में दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाज़ारों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। भारत, कई अन्य देशों की तरह, चाहता है कि ऊर्जा की कीमतें स्थिर रहें और सप्लाई भरोसेमंद बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत न केवल दुनिया के बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में शामिल है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में एक स्थिरता लाने वाले देश की भूमिका भी निभाता है। इसी कारण भारत एक ही देश पर निर्भर रहने के बजाय कई देशों से तेल और गैस आयात करता है।

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भारत कच्चे तेल के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं

विदेश सचिव ने साफ किया कि भारत अपने कच्चे तेल के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं है। भारत दर्जनों देशों से तेल खरीदता है और बाज़ार की स्थितियों के अनुसार समय-समय पर आयात के स्रोत बदलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति का मकसद आयात के स्रोतों में विविधता लाना, सप्लाई को सुरक्षित रखना और देश की ऊर्जा ज़रूरतों को बिना रुकावट पूरा करना है। जितने ज़्यादा स्रोत होंगे, भारत उतना ही ज़्यादा सुरक्षित रहेगा।

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