इंटरनेशनल डेस्क: ब्राज़ील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो को देश की सुप्रीम कोर्ट ने तख्तापलट की कोशिश के मामले में 27 साल की कड़ी सज़ा सुनाई है। यह फैसला उस समय आया है जब लंबे समय से देश में यह धारणा बनी हुई थी कि बोल्सोनारो जैसे प्रभावशाली नेता को इतनी सख्त सज़ा मिलना लगभग असंभव है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एलेक्जेंडर डी मोरेस की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि 2022 के चुनाव परिणाम मानने से इनकार करते हुए बोल्सोनारो ने सत्ता में बने रहने के लिए संगठित तरीके से तख्तापलट की योजना बनाई। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें उसी जेल में रखा जाएगा, जहाँ शनिवार को भागने की संभावित कोशिश के बाद गिरफ्तार किया गया था।
स्वास्थ्य आधार पर राहत की मांग खारिज
बोल्सोनारो के वकीलों ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर हिरासत को जेल से हटाकर किसी अन्य सुविधा में रखने की अपील की थी। लेकिन जस्टिस मोरेस ने सभी दलीलों को मानने से इनकार कर दिया। अगस्त से हाउस अरेस्ट में रह रहे बोल्सोनारो को उस वक्त जेल भेजा गया, जब उन्होंने अपने टखने पर लगे इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटर को हटाने की कोशिश की। बोल्सोनारो ने इसे “गलतफहमी” बताया, लेकिन कोर्ट ने इसे जानबूझकर भागने की कोशिश माना।
कौन-कौन से आरोप साबित हुए?
सुप्रीम कोर्ट के पैनल ने बोल्सोनारो और उनकी टीम को लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश का दोषी पाया। आरोपों में शामिल हैं: राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा, उपराष्ट्रपति गेराल्डो अल्कामिन और जस्टिस मोरेस की हत्या की साज़िश
2023 की शुरुआत में तख्तापलट की योजना
हथियारबंद आपराधिक संगठन का नेतृत्व
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लोकतांत्रिक सरकार को ज़बरदस्ती हटाने की कोशिश
बोल्सोनारो ने इन सभी आरोपों से लगातार इंकार किया है, लेकिन कोर्ट ने उपलब्ध सबूतों के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया। यह फैसला न केवल ब्राज़ील की राजनीति में हलचल मचा रहा है, बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे की मजबूती का एक महत्वपूर्ण संकेत भी माना जा रहा है।

