इंटरनेशनल डेस्कः ईरान-इजरायल तनाव के बीच भारत, चीन, पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया और ताइवान समेत कई देशों के सामने गैस संकट गहरा सकता है। ईरान का पड़ोसी देश कतर दुनिया में एलएनजी का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। समस्या यह है कि कतर से निकलने वाली अधिकतर गैस होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है, जिसे ईरान ने बंद कर दिया है। दुनिया की लगभग 20% एलएनजी सप्लाई इसी मार्ग से होती है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का कहना है कि इस जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा गैस आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। कतर, भारत का सबसे बड़ा गैस आपूर्तिकर्ता है और भारत अपनी करीब 40% गैस कतर से आयात करता है।
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चार साल पहले रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय गैस व्यापार में भारी उथल-पुथल देखी गई थी। रूस दुनिया के प्रमुख गैस निर्यातकों में से एक है। उस समय यूरोप में गैस की कीमतें आसमान छूने लगी थीं, क्योंकि यूरोप रूस का सबसे बड़ा निर्यात बाजार था। इस बार संकट का सबसे अधिक असर एशियाई देशों पर पड़ सकता है। पिछले वर्ष कतर ने जितनी गैस बेची, उसका लगभग 20% एशियाई देशों ने खरीदा। कतर से गैस खरीदने में चीन पहले और भारत दूसरे स्थान पर है। चीन अपनी लगभग एक-तिहाई गैस जरूरत कतर से पूरी करता है।
कतर से कौन-कौन खरीदता है गैस?
पिछले साल कतर ने 82.2 मिलियन टन एलएनजी का निर्यात किया। इसमें चीन ने 20 मिलियन टन, भारत ने 12 मिलियन टन, ताइवान ने 8 मिलियन टन, जबकि पाकिस्तान और दक्षिण कोरिया ने 7-7 मिलियन टन गैस खरीदी। अन्य देशों ने मिलकर 29 मिलियन टन एलएनजी का आयात किया। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, कम से कम 11 एलएनजी टैंकरों ने अपनी यात्रा रोक दी है। कतर के अलावा संयुक्त अरब अमीरात भी इसी जलमार्ग से एलएनजी का निर्यात करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खासकर एशियाई देशों के लिए कतर की गैस का तत्काल कोई व्यवहारिक विकल्प उपलब्ध नहीं है। यदि ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष लंबा खिंचता है और शिपिंग बाधित होती है, तो एलएनजी की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। चीन के आयातकों ने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश शुरू कर दी है। हालांकि QatarEnergy ने अभी तक किसी शिपमेंट को रोकने की घोषणा नहीं की है।
तुर्की की बढ़ सकती है परेशानी
भारत, जापान और अन्य देशों के ट्रेडर्स संभावित मूल्यवृद्धि को लेकर सतर्क हो गए हैं। पिछले एक वर्ष से पर्याप्त आपूर्ति के कारण एलएनजी की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं था। आमतौर पर एलएनजी कॉन्ट्रैक्ट कच्चे तेल के बेंचमार्क से जुड़े होते हैं। ऐसे में यदि ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़ती है, तो गैस की कीमतों में भी तेजी आ सकती है। तुर्की की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं, क्योंकि वह ईरान से पाइपलाइन के जरिए गैस आयात करता है। तुर्की की कुल गैस आपूर्ति में ईरान की हिस्सेदारी लगभग 15% है।
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