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जर्मनी ने ‘राइख सिटीजन’ संगठन पर लगाया प्रतिबंध, नेताओं के घरों पर हुई छापेमारी

बर्लिन: जर्मन सरकार ने मंगलवार को देश के सबसे बड़े अतिवादी दक्षिणपंथी समूह ‘राइख सिटीजन’ (Reich Citizens) पर प्रतिबंध लगा दिया, और इसे एक खतरनाक संगठन घोषित किया, जो जर्मनी की लोकतांत्रिक प्रणाली को कमजोर करने की कोशिश कर रहा था। गृह मंत्री अलेक्जेंडर दोंब्रिट ने इसे एक गंभीर चुनौती करार देते हुए बताया कि इस संगठन के सदस्य खुद को ‘जर्मनी का साम्राज्य’ मानते हैं और देश की वैधानिक व्यवस्था को नकारते हैं।

सुबह होते ही, देश के विभिन्न राज्यों में सुरक्षा बलों ने व्यापक अभियान चलाया। सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों ने इस संगठन के नेताओं और प्रमुख सदस्यों के घरों पर छापे मारे और उनकी संपत्तियों की तलाशी ली। गृह मंत्री ने कहा कि यह संगठन न केवल वैचारिक रूप से जर्मनी की सत्ता को चुनौती देता है, बल्कि यह आर्थिक आपराधिक गतिविधियों में भी शामिल है।

-दोंब्रिट ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि

‘राइख सिटीजन’ के सदस्य जर्मनी को एक वैध राज्य के रूप में मान्यता देने से इंकार करते हैं। इसके अलावा, उन्होंने जर्मनी में लागू होने वाले करों, सामाजिक सुरक्षा योगदान और जुर्माने का विरोध किया। समूह ने यहूदियों के खिलाफ घृणा और साजिश का प्रचार करते हुए सत्ता पर अपनी पकड़ बनाने का प्रयास किया है, जो जर्मनी की वैधानिक व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है।

इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार ऐसे समूहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला करते हैं और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने का प्रयास करते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि “हम इस खतरे से निपटने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे, ताकि हमारी लोकतांत्रिक परंपराएं और स्वतंत्रता सुरक्षित रह सकें।”

-संघर्ष की पृष्ठभूमि

‘राइख सिटीजन’ आंदोलन जर्मनी में पिछले कुछ सालों से सक्रिय था, जो सरकार और उसके संस्थाओं के खिलाफ कट्टरपंथी विचारों को फैलाता था। इस आंदोलन के सदस्य न केवल राज्य की वैधता को नकारते थे, बल्कि वे अपने हिसाब से एक ‘पुनर्निर्मित’ जर्मन साम्राज्य का दावा करते थे। इस प्रकार की विचारधाराएं खासकर जर्मनी में 20वीं सदी के मध्य के नाजी शासन के बाद से बेहद संवेदनशील मानी जाती हैं।

जर्मन सरकार के इस कदम से यह साफ हो गया है कि वह ऐसे संगठनों को समाप्त करने के लिए दृढ़ है, जो समाज में उथल-पुथल मचाने का प्रयास करते हैं। अब देखना यह है कि ‘राइख सिटीजन’ के खिलाफ यह कार्रवाई किस हद तक प्रभावी साबित होती है, और क्या यह अन्य ऐसे संगठनों के लिए चेतावनी का काम करेगी।

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