Last Updated: September 24, 2026

Dainik Savera Times Logo

एआई में वैश्विक सहयोग: चीन का साझा प्रगति का संदेश

August 30, 2025

एआई में वैश्विक सहयोग: चीन का साझा प्रगति का संदेश

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को लेकर चीन ने एक बार फिर वैश्विक सहयोग और साझा प्रगति पर जोर दिया है। चीन का कहना है कि एआई केवल तकनीकी प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह मानवता की भलाई और वैश्विक विकास के लिए साझा अवसर प्रदान करता है।अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर चीन लगातार यह संदेश देता आया है कि एआई का उपयोग जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य सेवाओं, खाद्य सुरक्षा और सतत् विकास जैसे प्रमुख मुद्दों से निपटने के लिए होना चाहिए।

चीन का मानना है कि एआई अनुसंधान और विकास में संयुक्त योगदान से दुनिया भर के देशों को समान रूप से लाभ मिल सकता है। चीन ने हाल के वर्षों में एआई अनुसंधान और नवाचार में भारी निवेश किया है और विदेशी विश्वविद्यालयों, संस्थानों और कंपनियों के साथ सहयोग की नीति अपनाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे वैश्विक स्तर पर तकनीकी साझेदारी को नई दिशा मिल सकती है।

साथ ही, चीन एआई नैतिकता और नियमन पर भी विशेष जोर देता है। उसका तर्क है कि निजता की सुरक्षा, गलत सूचनाओं की रोकथाम और रोजगार पर एआई के प्रभाव जैसे मुद्दों के लिए साझा अंतर्राष्ट्रीय मानक आवश्यक हैं। भारतीय विशेषज्ञ भी चीन के इस दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका मानना है कि, “एआई किसी एक देश या क्षेत्र की सीमा में नहीं बंधा है। भारत और चीन जैसे बड़े देशों के बीच सहयोग से एशिया को वैश्विक एआई विकास का केंद्र बनाया जा सकता है।”

“भारत के पास एआई टैलेंट और सॉफ्टवेयर क्षमताएं हैं, जबकि चीन के पास हार्डवेयर और बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग का अनुभव है। यदि दोनों देश मिलकर काम करें, तो यह सहयोग न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एआई की दिशा तय कर सकता है।” विश्लेषकों का मानना है कि चीन का दृष्टिकोण इस विचार को मजबूत करता है कि एआई किसी एक देश की संपत्ति नहीं, बल्कि वैश्विक साझेदारी का साधन है। 

(दिव्या पाण्डेय – चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें