Global energy crisis: अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्ध के दौरान दुनिया भर में तेल और गैस का संकट पैदा हो गया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे कीमतें आसमान छूने लगी। दोनों देशों के बीच युद्ध विराम हुआ तो लोगों ने उम्मीद लगाई की अब हालात नार्मल हो जाएंगे, बावजूद इसके कीमतें बढ़ती गई और सप्लाई पूरी नहीं हो रही। आम लोगों ने सोचा कि युद्ध रुकेगा तो तेल और गैस की कीमतें कम होंगी, लेकिन सब कुछ इसके उल्ट हुआ। कीमतों में कटौती तो दूर की बात, दाम और बढ़ा दिए गए। तो आइए जानते है इसके पीछे क्या कारण रहे…
युद्ध रुका लेकिन कीमतें बढ़ी
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर हो चुका है पर फिर भी कीमतें आउट ऑफ कट्रोल हो रहीं है। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण सप्लाई का रेगुलर न होना है। ईरान की जिद्द है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कंट्रोल चाहता है तो अमेरिका की भी हठ है कि वह ईरान को इसकी इजाजत नहीं देगा और उसके बंदरगाहों से निकलने वाले जहाजों का रास्ता ब्लॉक करेगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के कारण इस रास्ते से दुनिया में सप्लाई होने वाले 20% तेल का मार्ग अवरुद्ध हो गया।
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ईरान की बड़ी शर्तों से बाजार में अनिश्चितता
सुपरपावर अमेरिका लगातार ईरान को बैकफुट पर धकेलने के प्रयास कर रहा है। दोनों देश एक दुसरे से अपनी शर्तों पर बात करने की जिद्द पर अड़े है। इसी कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ रही। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ब्यान सामने आया जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के साथ सीजफायर ‘लाइफ सपोर्ट’ पर है। शर्तें मंजूर न होने पर ईरान की और से भी आक्रामक ब्यान सामने आए। इससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। कोई नहीं जानता कि ऊँट कब किस करवट बैठ जाए।

US में भी बढ़ी कीमतें
महाशक्ति कहलाने वाला अमेरिका भी इस संकट से खुद को बचा नहीं सका। तेल के पर्याप्त भंडार होने के बावजूद यहां कीमतों में इजाफा हुआ। अमरीका में पेट्रोल के दाम 4 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए है। यहां ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम लगभग $107 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गए है। अमेरिका में महंगाई का असर अब भारत में भी देखने को मिल रहा है।
उत्पादन हुआ प्रभावित
युद्ध के दौरान खाड़ी देशों में हुए हमलों के कारण तेल और गैस का उत्पादन प्रभावित हुआ। कतर में स्थित दुनिया के सबसे बड़ा LNG निर्यात केंद्र रास लफ्फान प्लांट प्रभावित हुआ। यहां से पूरी क्षमता से सप्लाई नहीं हो रही। होर्मुज से कुछ जहाज अनुमति के साथ ही निकल रहे है। इसी कारण दुनिया में गैस की कीमतें उच्च स्तर पर बनी हुई है। जब तक मरम्मत का काम पूरा नहीं हो जाता तब तक समस्या बनी रह सकती है।
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कीमतों में लम्बी अवधि के लिए कटौती नहीं होगी संभव
भारत तेल और गैस का एक बड़ा आयातक देश है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की बढ़ी कीमतों का असर भारत में पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ खाने पीने और जरूरत की चीजों पर भी देखने को मिल रहा है। युद्ध समाप्त होने के बाद भी कीमतों में लम्बे समय तक कटौती संभव नहीं होगी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने के बाद जब तक सप्लाई पूर्ण रूप से नार्मल नहीं हो जाती तब तक कीमतें बढ़ी रहेंगी।
उत्पादन बढ़ा लेकिन सप्लाई अभी भी बड़ी समस्या
OPEC समेत अन्य देशों ने तेल का उत्पादन बढ़ाया है, लेकिन सप्लाई लाइन ठप्प होने के कारण इसका लाभ दूसरे देशों को नहीं मिल रहा। होर्मुज ही एकमात्र सस्ता और आसान रास्ता है जो कि अभी ईरान और अमेरिका ने ब्लॉक कर रखा है। विशेषज्ञों का भी यही कहना है की जब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह नहीं खुल जाता तब तक सप्लाई की समस्या बरकरार रहेगी और युद्ध के कारण बढ़ी महंगाई भी आम नागरिकों की जेब काटती रहेगी।
निष्कर्ष
दो देशों की आपसी लड़ाई का अंजाम आज पूरी दुनिया भुगत रही है। सभी की निगाहें इसी बात पर टिकी है कि कब ये युद्ध समाप्त होगा और कब उन्हें इस महंगाई की समस्या से निजात मिलेगी। आज पूरी दुनिया के मन में यह सवाल जरूर होगा कि क्या भविष्य में भी यह ऊर्जा संकट किसी भी समय किसी भी देश की इकॉनमी को हिला के रख देगा और क्या इसका कोई विल्कप मौजूद है?