
दक्षिण चीन के युन्नान प्रांत की राजधानी खुनमिंग एक बार फिर दक्षिण एशिया के बड़े व्यापारिक और सांस्कृतिक आयोजन का केंद्र बनने जा रही है। 11 से 16 जून, 2026 तक यहां 10वां चीन-दक्षिण एशिया एक्सपो आयोजित हो रहा है। त्येनछी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी केंद्र में हो रहे इस आयोजन में दक्षिण एशिया के कई देश एक साथ दिखाई दे रहे हैं।
दरअसल, दक्षिण एशियाई देशों के बीच यह मंच चीन और भारत दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां होने वाली मुलाकातें, व्यापारिक चर्चाएं और समझौता ज्ञापन आगे चलकर क्षेत्रीय एकता और सहयोग की मजबूत नींव रखते हैं। यही वजह है कि इस एक्सपो को केवल व्यापारिक आयोजन नहीं, बल्कि कूटनीतिक और सांस्कृतिक संवाद के बड़े मंच के रूप में भी देखा जाता है।
इसी कड़ी में इस पूरे एक्सपो में भारत का मंडप एक खास आकर्षण बनकर उभर रहा है। यह केवल व्यापार करने की जगह नहीं है, बल्कि चीन में बसे ‘मिनी-इंडिया’ जैसा अनुभव दे रहा है। यहां भारतीय कपड़े, मसाले, चाय, आभूषण, हस्तशिल्प और आयुर्वेदिक उत्पाद लोगों को भारत की जीवंत झलक दिखा रहे हैं। अगर पिछले वर्षों की बात करें, तो भारत पहले भी इस एक्सपो में मजबूत भागीदारी करता रहा है। साल 2015 में भारत को विशेष साझेदार देश बनाया गया था। इसके बाद साल 2016 में क्वांगचो में भारतीय कॉन्सुलेट की अगुआई में लगभग 100 भारतीय कंपनियों ने यहां हिस्सा लिया। इन कंपनियों ने जूट, कपड़ा, चमड़े के सामान, मसाले और हस्तशिल्प जैसे उत्पाद प्रदर्शित किए थे।
यही नहीं, पिछले एक्सपो में भारत को करीब 140 स्टॉल मिले थे। इससे साफ संकेत मिलता है कि भारतीय उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि भारत मंडप व्यापार के साथ-साथ भारतीय संस्कृति को भी दुनिया के सामने मजबूती से पेश करेगा। इस बीच भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (FIEO) ने भी इस एक्सपो को भारतीय व्यापारियों के लिए बड़ा अवसर बताया है। यहां हस्तशिल्प, कपड़े, घर सजाने के सामान, खाद्य उत्पाद, आयुर्वेद, जूट और चमड़े के उत्पादों को प्रदर्शित किया जा रहा है। एक ही जगह पर बनारसी साड़ी, दार्जिलिंग की चाय, जयपुर के आभूषण और केरलम के मसाले देखने को मिल रहे हैं।
हालांकि, यह आयोजन केवल सामान बेचने तक सीमित नहीं है। इसकी सबसे बड़ी ताकत संस्कृति को जोड़ना है। सोचिए, अगर कोई चीनी परिवार भारत मंडप में जाए और वहां उसे भारतीय संगीत सुनाई दे, मसालों की खुशबू आए और रंग-बिरंगे भारतीय कपड़े दिखाई दें, तो वह अनुभव किसी छोटी भारत यात्रा जैसा लगेगा। वास्तव में, यही किसी देश की असली सांस्कृतिक ताकत होती है।
दूसरी ओर, व्यापार के लिहाज़ से भी यह एक्सपो भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है। यह एक्सपो भारतीय MSMEs और स्टार्टअप्स के लिए चीन और पूर्वी एशिया के बाजार को समझने की ‘लाइव लैबोरेटरी’ जैसा है। यहां एक ही जगह पर चीनी रिटेलर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और दक्षिण एशिया के खरीदार मिलते हैं। इससे भारतीय कंपनियों को नए बाज़ार समझने और नए व्यापारिक संबंध बनाने का मौका मिलेगा।
अगर पिछले आयोजनों पर नजर डालें, तो खेती, खाद्य उत्पाद, कपड़ा और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में कई समझौते हुए थे। इस बार भी उम्मीद है कि मसालों से लेकर तकनीक तक कई नए व्यापारिक अवसर सामने आएंगे। भारत मंडप की खास बात यह है कि यहां केवल उत्पाद नहीं दिखाए जाते, बल्कि उनके पीछे की कहानी भी बताई जाती है। जब कोई भारतीय उद्यमी अपने उत्पाद की मेहनत और खासियत बताता है, तो उसके साथ नए भारत की तस्वीर भी सामने आती है।
उधर, खुनमिंग शहर भी इस आयोजन में बड़ी भूमिका निभा रहा है। चीन इसे दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ने वाले बड़े केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है। ऐसे में भारत की भागीदारी इस पूरे क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत बनाती है। असल में, यह एक्सपो एक ऐसा मंच है जहां हर देश अपनी ताकत दुनिया को दिखाना चाहता है। कोई तकनीक दिखा रहा है, कोई संस्कृति, तो कोई व्यापार। इसी बड़े मंच पर भारत मंडप भारत की पहचान, संस्कृति और रचनात्मकता का प्रतीक बनकर सामने आ रहा है। अगर भारत इसे पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ पेश करे, तो यह केवल व्यापार ही नहीं बढ़ाएगा, बल्कि चीन-भारत दोनों देशों के बीच रिश्तों को भी नई मजबूती देगा।
(अखिल पाराशर, CGTN हिन्दी संवाददाता, पेइचिंग)