Last Updated: November 7, 2026

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मानव संसाधन और तकनीक के बीच विकसित होता श्रम बल

May 2, 2025

मानव संसाधन और तकनीक के बीच विकसित होता श्रम बल

Human Resources And Technology : भारत और चीन की जनसंख्या नीतियों का असर दोनों देशों के श्रमिकों की संख्या में दिख रहा है। हालांकि चीन ने एक संतान नीति को अब लगभग त्याग दिया है, इसके बावजूद चीन में जनसंख्या लगातार घट रही है। इसका असर यह हुआ है कि चीन में कार्यशील हाथों की संख्या घटती जा रही है। इससे चीन में चिंताएं जताईं जा रही हैं। वहीं भारत में जनसंख्या नियंत्रण को कड़ाई से लागू नहीं किया गया, इसका असर यह है कि अब भी भारत में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। इसका असर भारत के कार्यशील यानी काम करने वालों की संख्या के रूप में दिख रहा है।

भारत में काम करने वाले लोगों की संख्या लगभग 60 करोड़ से अधिक है। भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, साल 2017-18 से 2023-24 के बीच देश के कुल कार्यबल का आकार 45 करोड़ से बढ़कर करीब 60 करोड़ हो गया है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के अनुसार, साल 2020 में, भारत में लगभग 47 करोड़ 67 लाख श्रमिक थे, जो चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा श्रमिक आकार है। विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, चीन में साल 2024 में 77 करोड़ 31 लाख 28 हजार से ज्यादा कार्यबल था। दुनिया में यह कार्यबल सबसे ज्यादा है।

आज अगर चीन दुनिया की दूसरे नंबर की अर्थव्यस्था बन चुका है, आज अगर चीन के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की विकास दर साढ़े चार प्रतिशत है, या अतीत में पांच प्रतिशत रही है, तो उसमें चीन की आर्थिक नीतियों के साथ ही इन श्रमिकों का भी बड़ा योगदान है। इसी तरह अगर भारत के जीडीपी की विकास दर साढ़े छह फीसद सालाना है तो उसकी बड़ी वजह उसका यह श्रम बल भी है, सरकारी नीतियां तो खैर हैं हीं।

भारत और चीन के श्रम बल में एक बड़ा अंतर है। चीन ने अपने विकास की गाथा अपने श्रम बल को कुशल मानव संसाधन में बदलकर लिखी है। भारत के कुल श्रम बल में अब भी अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन यानी आईएलओ के अनुसार, भारत में वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे दीर्घतम औसत कार्य सप्ताह है, जो 46.7 घंटे का है। इसमें भी 51 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो सप्ताह में 49 घंटों से अधिक कार्य करते हैं। इतने श्रम के बावजूद भारत की श्रम उत्पादकता बेहद कम है, जो प्रति कार्य घंटे सकल घरेलू उत्पाद सिर्फ आठ अमेरिकी डॉलर बनता है। वहीं चीन में, मानक कार्य सप्ताह 40 घंटे का है, जो प्रतिदिन 8 घंटे काम करने पर आधारित है। हालांकि, कुछ कंपनियां, खासकर तकनीकी क्षेत्र में, 996 कार्य घंटे प्रणाली का पालन करती हैं, जिसमें कर्मचारियों को 6 दिन तक सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक काम करना पड़ता है।

भारत में कार्यबल का एक हिस्सा असंगठित क्षेत्र भी है, जिसमें करीब 43.7 करोड़ श्रमिक हैं। इनमें से 24.6 करोड़ कृषि क्षेत्र में हैं, जबकि करीब 4.4 करोड़ निर्माण कार्य और शेष विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसी तरह चीन में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की संख्या 29 करोड़ से अधिक है, जो चीन की कुल कामकाजी आबादी का 35 प्रतिशत है। अब बात करते हैं, भारत के श्रमिक बल के लैंगिक अनुपात की। भारत के कुल कार्यबल में जहां पुरुष श्रम शक्ति की भागीदारी दर 67.4 प्रतिशत है, वहीं महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर 9.4 प्रतिशत है। भारत के कुल श्रमिक बल में पुरूषों की हिस्सेदारी करीब अस्सी फीसद है, जबकि बीस फीसद महिलाएं हैं। लेकिन चीन के श्रमिक बल में पुरूषों की भागीदारी करीब 57 प्रतिशत है, जबकि महिला कार्यबल की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत है।

भारत और चीन, दोनों ही जगह श्रम में तकनीक का उपयोग बढ़ा है। सूचना, संचार और मेडिकल को छोड़ दें तो बाकी क्षेत्रों में चीन में तकनीक का उपयोग और विकास कहीं बेहतर है। इसकी वजह से चीन के श्रम बल की कार्यशीलता कहीं ज्यादा बेहतर है। जबकि भारतीय श्रम बल की विशेषता उसका निष्ठावान श्रम बल है। भारत के इस श्रम बल को अगर मानव संसाधन में बदल दिया जाए तो वह दुनिया के हर श्रम बल के आगे बेहतर साबित होगा।

चाहे चीन हो या भारत, दोनों जगह की विकास की कहानी यहां के श्रमिक ही लिख रहे हैं, चाहे वे कुशल हों या अकुशल। इसलिए श्रम दिवस पर जरूरी है कि इनके योगदान को आदर सहित याद किया जाए, उन्हें उनका वाजिब देने की कोशिश की जाए और उन्हें सलाम किया जाए।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)

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