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लोकतांत्रिक रास्ते को किया नजरअंदाज, तो Imran Khan का राजनीतिक भविष्य अंधेरे में : Bilawal Bhutto Zardari

February 21, 2023

लोकतांत्रिक रास्ते को किया नजरअंदाज, तो Imran Khan का राजनीतिक भविष्य अंधेरे में : Bilawal Bhutto Zardari

इस्लामाबादः पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी ने कहा है कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान लोकतांत्रिक रास्ते की अनदेखी करते रहे और सैन्य प्रतिष्ठान का समर्थन मांगते रहे तो हो सकता है कि उनका कोई राजनीतिक भविष्य न हो। एक साक्षात्कार में, बिलावल ने कहा, कि ‘पाकिस्तान का एक इतिहास रहा है जो किसी से छिपा नहीं है। हमारे देश के इतिहास का आधे से अधिक समय प्रत्यक्ष सैन्य शासन और बीच में ट्रांजिशन फेज रहा है। फिलहाल, मेरा मानना है कि पाकिस्तान बुरे दौर से गुजर रहा है और निश्चित रूप से यह किसी भी तरफ जा सकता है।’’ ‘‘इसका मतलब लोकतांत्रिक ताकतें को मजबूत करने में सफलता हो सकती है या ये भी हो सकता है कि असंवैधानिक अलोकतांत्रिक ताकतें मजबूत हों।’’

उन्होंने आगे कहा कि इमरान खान सत्ता से बाहर होने के पीछे विदेशी साजिश पर आरोप लगा सकते हैं, लेकिन बात यह है कि उनकी सरकार को संसद में अविश्वास प्रस्ताव से बाहर किया गया, जो खुद बिलावल के दिमाग की उपज थी क्योंकि वह पूर्व प्रधानमंत्री को हटाने के लिए लोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल करना चाहते थे। विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘पीटीआई (पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ) के प्रमुख को पद से हटाने वाला अविश्वास प्रस्ताव एक संस्थागत और लोकतांत्रिक मील का पत्थर था।’’ बिलावल ने कहा कि खान को हटाना और पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल (रिटायर्ड) कमर जावेद बाजवा का एक संस्था के तौर पर सैन्य प्रतिष्ठान की ओर से तटस्थता का संकल्प, अब तक के दो सबसे महत्वपूर्ण कदम थे, जिन्होंने अब देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को संक्रमण की स्थिति में डाल दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘पूर्व सेना प्रमुख खड़े हुए और अपनी वर्दी में एक भाषण दिया जहां उन्होंने स्वीकार किया कि पहले सेना राजनीति में हस्तक्षेप करती थी और यह न तो संस्था के लिए और न ही देश के लिए अच्छा है और वे इससे दूर जाना चाहेंगे, यह एक उल्लेखनीय विकास था।’’ बिलावल ने कहा कि सैन्य प्रतिष्ठान के तटस्थ और अराजनीतिक रहने के नए रुख की न केवल सराहना की जानी चाहिए बल्कि लोकतंत्र को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक दलों द्वारा इसका समर्थन भी किया जाना चाहिए।

हालांकि, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि खान अभी भी अपने राजनीतिक भविष्य को सैन्य प्रतिष्ठान के कंधों पर टिकाए हुए हैं, जिनसे वह उन्हें सत्ता में वापस लाने की मांग करते हैं क्योंकि यही एकमात्र तरीका है जिससे उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के हर चरण को जिया है। ‘‘खान के लिए यह मेरा संदेश तब से है जब वह प्रधानमंत्री थे या जब वह कार्यालय छोड़ रहे थे और आज तक है। इमरान खान का निश्चित रूप से राजनीति में भविष्य होगा यदि वह लोकतांत्रिक रास्ते पर चलने का प्रयास करते हैं।’’ बिलावल ने कहा, कि ‘खान को सैन्य प्रतिष्ठान को बुलाने और राजनीति में संवैधानिक भूमिका निभाने के लिए हर किसी को राजनीति में हस्तक्षेप करने के लिए अपना विरोध बदलने की जरूरत है। अन्यथा, इमरान खान का नाम इतिहास में उनके जैसे कई लोगों की तरह खो जाएगा।’’

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