इंटरनेशनल डेस्क: चीन में महज दो दशक पहले तक लाखों लोग धीमी गति वाली ट्रेनों से सफर करते थे, जिसके कारण उन्हें एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचने में घंटों लगते थे। 300 किमी. की यात्रा भी बहुत लंबी और थकान भरी होती थी। लेकिन आज चीन में पूरी परिवहन व्यवस्था बदल चुकी है, खासकर हाई-स्पीड रेल नेटवर्क ने शहरों के बीच दूरी बेहद कम कर दी है।
मसलन पेइचिंग और शांगहाई की दूरी करीब 1,318 किमी. है, हाई-स्पीड ट्रेन के जरिए यह सिर्फ 4:30 घंटे से 5 घंटे के बीच में पूरी हो जाती है। आप इसी से चीन में ट्रेनों की गति का अंदाजा लगा सकते हैं। आम तौर पर चीन में उक्त ट्रेनें 330-350 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ती हैं। जरा सोचिए कि अगर आप दिल्ली से मुंबई का सफर 4-5 घंटे में पूरा करने लगें तो कैसा होगा।
वैसे मुंबई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन अगले साल तक चलने की योजना है। हालांकि मैं चीन में लंबे समय से रह रहा हूं और कई बार बुलेट ट्रेन से यात्रा भी कर चुका हूं, बावजूद इसके हर बार नया और अलग अनुभव होता है। पिछले दिनों मई दिवस की छुट्टियों के दौरान देश की राजधानी पेइचिंग से पूर्वोत्तर चीन के ल्याओनिंग प्रांत के शनयांग शहर और आसपास के इलाकों में जाना हुआ।
व्यस्त सीज़न और यात्रियों की भीड़ होने के बाद भी रेल सिस्टम पूरी तरह व्यवस्थित नजर आया। स्टेशन पहुंचते ही चीन की आधुनिक रेल व्यवस्था का अहसास हुआ, हर चीज़ यात्रियों की सुविधा के लिए मौजूद थी। इस तरह चीन में रेल के जरिए य़ात्रा करना सुखद अनुभव देता है। चीनी रेल कर्मियों का अनुशासन और व्यवहार प्रभावित करता है।
जो ट्रेनों के समयबद्ध संचालन में साफ नजर आता है, शायद ही मैंने चीन में कभी किसी बुलेट ट्रेन को देरी से पहुंचते देखा हो। जाहिर सी बात है कि स्टेशन की साफ-सफाई और आधुनिक व्यवस्था से लेकर ट्रेनों की गुणवत्ता विदेशी लोगों को आश्चर्य में डाल देती है।
आज, चीन दुनिया का सबसे लंबा हाई-स्पीड रेल मार्ग तैयार कर चुका है। चीन के बुलेट ट्रेन नेटवर्क की लंबाई 50 हज़ार किमी. से अधिक पहुंच चुकी है। इस नेटवर्क की खासियत यह है कि इन ट्रेनों में सफर करना बेहद सुरक्षित और आरामदायक होता है। चीन में लोग कई मौकों पर हवाई यात्रा के बजाय रेलमार्ग से सफर करना पसंद करते हैं। क्योंकि फ्लाइट से सफर करने के लिए उन्हें एयरपोर्ट में समय से दो-तीन घंटे पहुंचने के साथ-साथ अन्य चीजों का भी ख्याल रखना होता है। लेकिन ट्रेन के जरिए यात्रा करना ज्यादा आसान लगता है।
गौरतलब है कि चीन ने वर्ष 2004 में आधिकारिक तौर पर चाइना रेलवे हाई-स्पीड(सीआरएच) योजना लांच करने के साथ-साथ आधुनिक हाई-स्पीड रेल (एचएसआर) नेटवर्क तैयार करना शुरू किया। इस तरह कुछ ही वर्षों में चीन ने पेइचिंग ओलंपिक से ठीक पहले पेइचिंग-थ्येनचिन रेलमार्ग चालू किया, जिससे इन दो शहरों के बीच का सफर सिर्फ तीस मिनट में पूरा होने लगा।
इसके बाद चीन में फिर हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार में युद्धस्तर पर काम शुरू हो गया। जिसका नतीजा आज हम देख सकते हैं, जब चीन के लगभग सभी प्रमुख शहर इस नेटवर्क से जुड़ चुके हैं।
इस बीच चीन ने 330 से 350 किमी. प्रति घंटा की गति वाली ट्रेनों के संचालन से आगे भी तेज गति से काम हो रहा है। जो दुनिया में यातायात के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। क्योंकि चीन में इन दिनों लगभग 1000 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ट्रेन का परीक्षण हो रहा है।
इसे मैग्लेव तकनीक पर आधारित बताया जाता है। इस तकनीक में ट्रेन चुंबकीय बल की मदद से पटरियों से ऊपर उठकर दौड़ती है, जिससे घर्षण लगभग खत्म हो जाता है। इस तरह इस ट्रेन की स्पीड 1000 किमी. प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। जो कि आम यात्री विमानों की गति भी ज्यादा है। इस तरह चीन दुनिया को ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में दिशा दिखा रहा है।
कहना होगा कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग के सत्ता संभालने के बाद चीन में गरीबी उन्मूलन अभियान में काफी तेजी आयी। दावा है कि चीन गरीबी को मूल रूप से खत्म कर चुका है, और आम नागरिकों का जीवन स्तर बेहतर होने का सीधा असर लोगों की खर्च करने की क्षमता में नजर आता है। राष्ट्रपति शी के नेतृत्व में चीन विभिन्न क्षेत्रों में तरक्की कर रहा है, रेल व्यवस्था में भी यह स्पष्ट तौर पर दिखता है।
(अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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