Last Updated: September 27, 2026

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Japan में सत्ता को मिली मजबूती, PM सनाए ताकाइची के नेतृत्व में गठबंधन को दो-तिहाई बहुमत

February 9, 2026

Japan में सत्ता को मिली मजबूती, PM सनाए ताकाइची के नेतृत्व में गठबंधन को दो-तिहाई बहुमत

इंटरनेशनल डेस्क: जापान की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन ने संसदीय चुनावों में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है। इस ऐतिहासिक जीत पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई संदेश भेजा है।

जापानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव में यह सफलता पीएम ताकाइची की बढ़ती लोकप्रियता और आक्रामक चुनावी रणनीति का नतीजा मानी जा रही है। जीत के बाद सरकारी प्रसारक NHK को दिए इंटरव्यू में ताकाइची ने कहा कि उनकी सरकार देश को आर्थिक रूप से मजबूत और वैश्विक स्तर पर अधिक प्रभावशाली बनाने की दिशा में काम करेगी।

पीएम मोदी ने जताया भरोसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा, “प्रतिनिधि सभा चुनावों में शानदार जीत के लिए प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची को हार्दिक बधाई। मुझे पूरा विश्वास है कि आपके नेतृत्व में भारत-जापान की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी।”

निचले सदन में रिकॉर्ड प्रदर्शन

NHK की मतगणना रिपोर्ट के अनुसार, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने 465 सदस्यीय निचले सदन में अकेले 316 सीटों पर जीत दर्ज की है। यह आंकड़ा बहुमत के लिए जरूरी 261 सीटों से कहीं अधिक है। पार्टी के इतिहास में यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है, जिसने 1986 का पिछला रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।

एजेंडा लागू करने में मिलेगी सहूलियत

हालांकि ऊपरी सदन में एलडीपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, लेकिन निचले सदन में मिली भारी जीत से पीएम ताकाइची को अपने नीतिगत एजेंडे को आगे बढ़ाने में आसानी होगी। उनका फोकस जापान की आर्थिक स्थिति मजबूत करने, रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग खासकर अमेरिका के साथ संबंधों को और सुदृढ़ करने पर है, ऐसे समय में जब चीन के साथ क्षेत्रीय तनाव बढ़ा हुआ है।

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पीएम ताकाइची ने कहा कि वह विपक्ष के साथ संवाद बनाए रखते हुए अपने लक्ष्यों को आगे बढ़ाएंगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि परिस्थितियों के अनुसार वह लचीला रुख अपनाने को तैयार हैं। गौरतलब है कि उन्होंने पद संभालने के महज तीन महीने बाद ही मध्यावधि चुनाव कराने का फैसला लिया था, जो उनके लिए निर्णायक साबित हुआ।

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