Last Updated: September 26, 2026

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इस तरह बेहतर हो सकते हैं चीन-भारत संबंध

September 8, 2025

इस तरह बेहतर हो सकते हैं चीन-भारत संबंध

हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने थ्येनचिन में आयोजित शांगहाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के उपलक्ष्य में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। द्विपक्षीय संबंधों की चर्चा में शी ने एक दिलचस्प कहावत“कांगच्युमूचांग (चीनी उच्चारण)”का प्रयोग किया। इसका शाब्दिक अर्थ होता है कि जब मछली पकड़ने वाले जाल का मुख्य रस्सा उठाया जाता है, तो उसके छोटे-छोटे छेद खुल जाते हैं। इसका निहितार्थ यह है कि अगर अहम मुद्दे पर ध्यान दिया जाय और उसका समाधान किया जाय तो उसके साथ अन्य छोटे मुद्दे आसानी से हल हो सकते हैं। 

इस कहावत का स्रोत दो हजार से अधिक वर्ष के पहले लिखी गयी एक कालजयी पुस्तक है, जिसका नाम“ल्युशीछुनछ्यो”है। इस पुस्तक के प्रमुख संपादक ल्यु बूवेइ थे। वे एक मशहूर व्यापारी, राजनीतिज्ञ और विचारक थे। उन्होंने इस पुस्तक में ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव के अनुभव और सबक का सार लिखा। कहावत“कानच्युमूचांग” में गहरा दार्शनिक विचार निहित है। वह मामले के निपटारे में उसके अहम हिस्से पर जोर देता है और उस पर कायम रहते हुए ही अन्य भागों के सवालों का समाधान सुचारू ढंग से किया जा सकता है। यानी किसी भी काम में हमें आम स्थिति ,समग्र और रणनीतिक विचार होना चाहिए।

चीन-भारत संबंध का मुख्य रस्सा क्या है?वह दोनों देशों के नेताओं के बीच संपन्न हुई यही समानता है कि चीन और भारत प्रतिद्वंद्वी के बजाय सहयोग के साझेदार हैं और खतरे के बजाय एक दूसरे के विकास के अवसर हैं। अगर चीन और भारत इस आम दिशा पर कायम रहते हैं, तो द्विपक्षीय संबंध स्थिरता से आगे बढ़ेंगे।

चीन और भारत की राष्ट्रीय स्थितियां मिलती-जुलती हैं। वे दोनों प्राचीन सभ्यता वाले देश हैं। आधुनिक युग की शुरुआत के बाद वे पश्चिमी उपनिवेशवादियों के अत्याचार के प्रकोप में फंसे। लंबे संघर्ष के बाद भारत ने वर्ष 1947 में स्वतंत्रता हासिल की की और चीन लोक गणराज्य वर्ष 1949 में स्थापित हुआ। अब दोनों देश विकास और पुनरुथान के ऐतिहासिक कार्य का सामना कर रहे हैं। भारत का शताब्दी लक्ष्य वर्ष 2047 में विकसित भारत का विजन पूरा करना है। चीन का शताब्दी लक्ष्य है कि वर्ष 2049 तक शक्तशाली आधुनिक समाजवादी देश का निर्माण पुरा करना है। कहा जा सकता है कि विकास के रास्ते पर चीन और भारत हमराह हैं।

पिछले कुछ साल द्विपक्षीय संबंधों में उतार-चढ़ाव के बावजूद चीन भारत व्यापार में स्थिर वृद्धि का रूझान बना रहा। वर्ष 2024 में चीन भारत व्यापार 1 खरब 38 अरब 47 करोड़ 80 लाख अमेरिकी डॉलर पर जा पहुंचा। चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार बना। इस साल के पूर्वार्द्ध में द्विपक्षीय व्यापार 74 अरब 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर दर्ज हुआ, जो साल दर साल 10.2 प्रतिशत अधिक है। इससे जाहिर है कि आर्थिक क्षेत्र में चीन और भारत के बीच बड़ी प्रतिपूरकताएं मौजूद हैं। वास्तव में महत्वपूर्ण धातु, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, इंजीनियरिंग उपकरण, दवाइयों के कच्चे पदार्थ, नवीन ऊर्जा के उत्पाद, रासायनिक उत्पाद और निवेश आदि पहलुओं में चीन-भारत के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। विकास के रास्ते पर चीन और भारत एक दूसरे की सफलता के लिए मदद दे सकते हैं।

इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि चीन और भारत के बीच सीमा सवाल मौजूद है। यह उपनिवेश काल में छोड़ गया मामला है, जो बहुत जटिल और संवेदनशील है। इसके निपटारे में विवेकतापूर्ण और व्यावहारिक रूख की जरूरत है। वह चीन-भारत संबंधों का पूरा विषय नहीं है, जो समग्र चीन-भारत संबंधों को निर्धारित कर सकता है। उसे एक उचित स्थान पर रखा जाना चाहिए। उल्लेखनीय बात है कि सीमा सवाल पर चीन और भारत के बीच विशेष प्रतिनिधि भेंटवार्ता की व्यवस्था मौजूद है, इस मसले के समाधान पर राजनीतिक निर्देशक सिद्धांतों की संधि संपन्न हुई है और विभिन्न स्तरों के राजनयिक व सैन्य संवाद चैनल भी हैं। इस अगस्त में नई दिल्ली में विशेष प्रतिनधियों की भेंटवार्ता में दोनों पक्षों ने सीमा पर सामान्य प्रबंधन करने, सीमांत क्षेत्र की शांति सुरक्षित करने, संवेदनशील स्थानों के उचित निपटारे और शर्त तैयार होने वाले सेक्टर पर सीमा निर्धारण वार्ता शुरू करने पर नयी समानताएं संपन्न की हैं।

भारत में कुछ लोगों का विचार है कि वर्तमान चीन-अमेरिका-भारत संबंध पिछली सदी के 70 और 80 वाले दशक में चीन-अमेरिका-सोवियत संघ बृहद त्रिकोण जैसे हैं। भारत तत्कालीन चीन की भूमिका निभा सकता है और सर्वाधिक लाभ प्राप्त कर सकता है। ऐसा विचार इतिहास के बढ़ने के कदम के साथ नहीं चला और वर्तमान विश्वास के मुख्य रूझान से मेल नहीं खाता। सबसे पहले, शीतयुद्ध बहुत पहले ही समाप्त हुआ था और गुटों का मुकाबला पूरी तरह अप्रचलित है। खास बात है कि आज का चीन कतई सोवियत संघ नहीं है। दूसरी तरफ, शांति, विकास, सहयोग और साझी जीत वर्तमान युग की मुख्य धारा है। वैश्विक ध्रुवीकरण और आर्थिक भूमंडलीकरण का आम रुझान रोका नहीं जा सकता।

कजान में चीन और भारत के नेताओं की भेंटवार्ता से दोनों देशों के संबंध की बहाली शुरू हुई और आवाजाही व सहयोग में निरंतर नयी प्रगति प्राप्त हुई। स्थानीय विश्लेषकों के विचार में थ्येनचिन शिखर बैठक से चीन भारत संबंध के स्वस्थ व स्थिर विकास को बढ़ावा मिला है और द्विपक्षीय संबंध और उन्नत होंगे। ड्रैगन और हाथी का साथ-साथ नाचना न सिर्फ दोनों देशों की जनता के लिए अधिक कल्याण लाएगा, बल्कि पूरे विश्व पर दूरगामी प्रभाव डालेगा। 

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)        

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