India America trade conflict : अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 4 अगस्त को सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर कहा कि क्योंकि भारत बड़ी मात्रा में रूस से तेल खरीदता है और इसे मुनाफा कमाता है, अमेरिका बड़े पैमाने पर भारतीय वस्तुओं पर आयात टैरिफ बढ़ाएगा। उस दिन भारतीय विदेश मंत्रालय ने जवाब देते हुए कहा कि भारत राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाएगा।
विश्लेषकों के विचार में ट्रंप प्रशासन ने फिलहाल भारत पर निरंतर दबाव डाला। उसे इससे अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता में सौदेबाजी चिप्स बढ़ाने का इरादा है। इसके अलावा इससे रूस-यूक्रेन संकट की मध्यस्थता में अमेरिका की हताशा भी ज़ाहिर हुई है।
विश्लेषकों के विचार में भारत ने व्यापार और कूटनीति क्षेत्र में ट्रंप प्रशासन की मांग पूरी नहीं की, इसलिए भारत के प्रति अमेरिका का रुख बदला है। रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल अमेरिका और भारत ने कई दौर की व्यापार वार्ता की, लेकिन भारत कृषि और डेयरी जैसे अहम मुद्दे पर समझौता नहीं करना चाहता।
कूटनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए, ट्रंप ने शीघ्र ही रूस-यूक्रेन मुठभेड़ सुलझाने का वादा दिया था, लेकिन अब तक ठोस प्रगति प्राप्त नहीं हुई। फिलहाल अमेरिका रूस के तेल निर्यात को नियंत्रित कर रूस पर दबाव डालने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप भारत का सहयोग पाना चाहते हैं, लेकिन भारत इससे इंकार करता है। इसका मुख्य कारण है कि भारत और रूस के बीच लंबे समय से घनिष्ठ सम्बंध हैं। इसके अलावा इधर कुछ साल भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि बनी रही। भारत की आर्थिक शक्ति से मोदी सरकार को अमेरिका के साथ मुकाबला करने का विश्वास है।
उल्लेखनीय बात है कि अमेरिका पाकिस्तान के करीब आ रहा है, जिस से अमेरिका-भारत सम्बंध पर प्रभाव भी पड़ा है। रिपोर्ट है कि अमेरिका और पाकिस्तान ने हाल ही में तेल और खनिज पर समझौता संपन्न किया है। इससे पहले ट्रंप ने पाक सेना की चीफ ऑफ स्टाफ मुनीर को व्हाइट हाउस की यात्रा का निमंत्रण दिया था। ऐसी कार्रवाइयों से अमेरिका-भारत सम्बंध अधिक जटिल हो रहे हैं। भारत का अमेरिका के प्रति अविश्वास बढ़ रहा है।
(साभार—-चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

