Last Updated: September 26, 2026

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ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर, होर्मुज से जहाज गुजरने की मिली इजाजत

March 12, 2026

ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर, होर्मुज से जहाज गुजरने की मिली इजाजत

इंटरनेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। ईरान ने दो भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। ये दोनों जहाज बुधवार रात से गुरुवार सुबह के बीच इस रास्ते से गुजर रहे हैं। तेल सप्लाई को लेकर चल रही चिंता के बीच यह भारत के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई थी और कई जहाज वहीं फंसे हुए थे। इन दो जहाजों के निकलने से भारत में तेल की सप्लाई की समस्या कुछ हद तक कम हो सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का सख्त नियंत्रण
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने दो भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है। इससे पहले एक लाइबेरियन झंडे वाला ऑयल टैंकर भी यहां से गुजर चुका है, जो सऊदी अरब का कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा था। इस जहाज का कप्तान भारतीय था और यह दो दिन पहले होर्मुज से सुरक्षित गुजरकर मुंबई पोर्ट पहुंच गया। युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला जहाज था जो भारत तक सुरक्षित पहुंच पाया। ईरान ने साफ कर दिया है कि इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका पूरा नियंत्रण है।

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर रियर एडमिरल अलीरेजा तंगसीरी ने कहा कि जो भी जहाज इस रास्ते से गुजरना चाहता है, उसे ईरान से अनुमति लेनी होगी। अगर कोई जहाज बिना अनुमति के गुजरने की कोशिश करता है, तो उस पर हमला किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि “एक्सप्रेस रोम” और “मयूरी नारे” नाम के दो जहाजों ने चेतावनी को नजरअंदाज करके गुजरने की कोशिश की थी, जिसके बाद उन पर हमला किया गया।

भारत के लिए यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयात करने वाला देश है और भारत के लिए आने वाला अधिकतर कच्चा तेल मिडिल ईस्ट से आता है। इस तेल को भारत तक पहुंचने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना पड़ता है। युद्ध शुरू होने से पहले ही कई भारतीय जहाज इस इलाके में फंस गए थे। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के मुताबिक, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के समय इस क्षेत्र में 28 से 37 भारतीय झंडे वाले जहाज मौजूद थे। इन जहाजों पर करीब 1000 से ज्यादा भारतीय नाविक (सीफेयरर्स) सवार थे।

पश्चिमी देशों पर सख्ती, भारत को मिली राहत
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय देशों से जुड़े जहाजों के लिए कड़ी पाबंदियां लगाई हैं। लेकिन भारत जैसे गैर-पश्चिमी देशों के जहाजों को कुछ हद तक राहत दी जा रही है और उन्हें सीमित अनुमति दी जा रही है।

भारत की कूटनीतिक कोशिशों का असर
माना जा रहा है कि यह फैसला भारत की कूटनीतिक बातचीत का नतीजा है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की थी। सूत्रों के मुताबिक, इसी बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी। इस फैसले से भारत की तेल सप्लाई को राहत मिल सकती है और वहां फंसे भारतीय जहाजों के लिए भी रास्ता खुलने की उम्मीद बढ़ गई है।

 

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