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भारत ने दिखाया डिजिटल विकास के साथ समावेशिता भी संभव: राघव चड्ढा

India shown digital development possible along inclusivity Raghav Chadha

India shown digital development possible along inclusivity Raghav Chadha

नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित ‘इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ यंग पार्लियामेंटेरियंस’ (युवा सांसदों का वैश्विक सम्मेलन) के 12वें संस्करण में डिजिटल युग में डिजिटल एक्सेस और अधिकार पर बात की।

राघव चड्ढा ने रविवार को एक्स पोस्ट में कहा, “मैंने उज़्बेकिस्तान में 12वीं आईपीयू कॉन्फ्रेंस में ‘डिजिटल युग में डिजिटल एक्सेस और अधिकार’ विषय पर बात की। एक अरब से अधिक लोगों के जुड़े होने और यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के जरिए तुरंत पेमेंट की सुविधा रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनने के साथ, भारत ने दिखाया है कि डिजिटल स्तर और समावेश (सबकी भागीदारी) साथ-साथ चल सकते हैं।

राघव चड्ढा ने आगे कहा, “मैंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे टेक्नोलॉजी पहुंच बढ़ा रही है और एक ऐसा भविष्य बना रही है जो सबको जोड़ती है, बिना शोषण किए नए आविष्कार करती है और बिना नियंत्रण किए सुरक्षा देती है। इस दौर की असली परीक्षा यह नहीं है कि हमारी मशीनें कितनी स्मार्ट हो जाती हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या सबसे गरीब जिले में सबसे सस्ता फोन रखने वाले व्यक्ति को भी वही पहुंच, सुरक्षा और अवसर मिलते हैं जो बाकी सभी को मिलते हैं।”

इसके पहले शनिवार को राघव चड्ढा ने एक्स पर लिखा था, “समरकंद में मुझे उज्बेकिस्तान की ‘ओली मजलिस’ (संसद) की सीनेट की चेयरपर्सन, महामहिम तंजिला नारबायेवा से मिलने का मौका मिला। उन्हें 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम के लिए व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित करना मेरे लिए खुशी की बात थी। यह फोरम इस साल अक्टूबर में दिल्ली में भारतीय संसद की अध्यक्षता में आयोजित किया जाएगा। हमने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ते रिश्तों पर बातचीत की। उन्होंने भारत और माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सफल उज़्बेकिस्तान यात्रा के बारे में बहुत गर्मजोशी से बात की और निमंत्रण में गहरी रुचि दिखाई। हम भारत में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।”

राज्यसभा सांसद ने 3 सितंबर को एक्स पोस्ट में कहा था, “4 से 6 सितंबर तक समरकंद, उज़्बेकिस्तान में होने वाले ‘इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ़ यंग पार्लियामेंटेरियंस’ (आईपीयू) के 12वें संस्करण में भारतीय संसद का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुने जाने पर मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं। इस प्रतिनिधिमंडल के लिए मुझे नामित करने के लिए मैं भारत के माननीय उपराष्ट्रपति का आभार व्यक्त करता हूं। 1889 में स्थापित और जिनेवा में मुख्यालय वाला आईपीयू राष्ट्रीय संसदों का दुनिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा संगठन है, जिसमें 180 सदस्य संसदें और 15 सहयोगी सदस्य शामिल हैं।”

राघव चड्ढा ने कहा, “इस वर्ष का विषय है-‘मुश्किल दौर में सभी के लिए मानवाधिकारों, न्याय और सम्मान को फिर से स्थापित करना।’ तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में दुनिया भर के युवा विधायक संघर्ष के दौरान युवाओं के अधिकारों, डिजिटल अधिकारों और ऑनलाइन सुरक्षा, जलवायु के प्रति लचीलेपन और न्याय, तथा युवाओं के लिए आर्थिक अवसरों पर चर्चा करेंगे। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां की आबादी भी बहुत युवा है। इन सभी मुद्दों पर हमारी संसद के पास साझा करने के लिए बहुत कुछ है और सीखने के लिए भी। चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी-अभी उज़्बेकिस्तान की अपनी सफल यात्रा पूरी की है, इसलिए हमारी साझेदारी के संसदीय पक्ष में उस गति को आगे बढ़ाने में एक छोटी सी भूमिका निभाना हमारे प्रतिनिधिमंडल के लिए सौभाग्य की बात है।”

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